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कोरोना के इलाज के बाद लाखों का बिल थमाया, न चुका पाने पर 24 घंटे मरीज को नहीं ले जाने दिया
Fri, 30 Apr 2021 01:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 30 Apr 2021 01:49 AM IST
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रुपयों के लालच में अस्पताल वालों की मनमानी थम नहीं रही। न्यू शिवली रोड स्थित नॉन कोविड अस्पताल आरोग्य हॉस्पिटल एंड सर्जिकल में तो कोरोना मरीज को ही भर्ती कर लिया। उसका आठ दिन तक इलाज किया। परिजनों का आरोप है कि सादे पर्चे में 3.30 लाख का बिल थमा दिया। पैसा न देने पर मरीज को 24 घंटे तक ले नहीं जाने दिया। बाद में कल्याणपुर के एक दरोगा ने 1.62 लाख में समझौता कराया। तब परिजन मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए ले जा सके।
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कानपुर देहात के रूरा निवासी दिलीप कुमार रावत (42) दिबियापुर स्थित विवेकानंद ग्रामोद्योग डिग्री कॉलेज में क्लर्क हैं। साले दुर्गेश वर्मा ने बताया कि दिलीप को कई दिन से बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ थी। 21 अप्रैल को उन्हें नौबस्ता स्थित धन्वंतरि अस्पताल ले जाकर कोरोना की एंटीजन जांच कराई। रिपोर्ट निगेटिव आई, पर सीटी स्कैन में देखकर डॉक्टरों ने उन्हें कोरोना का मरीज बताया और किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराने को कहा। इसके बाद वे कई सरकारी और निजी अस्पताल गए लेकिन कहीं बेड नहीं मिला।
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दुर्गेश ने बताया कि एक दलाल ने 21 की रात करीब डेढ़ बजे मरीज को आरोग्य हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती करा दिया। भर्ती करते समय 40 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद 44 हजार और जमा कराए। रोज 15-20 हजार की दवाएं भी मंगवाते रहे। बुधवार को मरीज की छुट्टी कर दी गई। डिस्चार्ज स्लिप न देकर सादे कागज में 3.30 लाख का बिल पकड़ा दिया।
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आरोप है कि रुपये न देने पर मरीज को ले नहीं जाने दिया। गुरुवार दोपहर तक वे अस्पताल के बाहर ही कुर्सी पर बैठे रहे। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्हें कोरोना नहीं था। सांस लेने में तकलीफ थी। बताया कि बिल भी तीमारदारोें ने अपने हाथ से पर्चे पर बना लिया है। उनके यहां कंप्यूटराइज्ड बिल ही बनते हैं।