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महोबा: पांच लोगों की मौत पर मातम का माहौल, गम में डूबा रहा गांव, गूंजती रहीं चीखें
Fri, 11 Dec 2020 01:26 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 11 Dec 2020 01:26 AM IST
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छतरपुर में दर्दनाक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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महोबा जिले में चरखारी के स्वासामाफ का हर बाशिंदा गुरुवार को भी गम में डूबा रहा। पांच लोगों की मौत पर मातम का माहौल बना रहा। चारों तरफ रोने और चीखने की आवाजें गूंजती रहीं। घर में सब कुछ था, लेकिन नहीं थे मनोज अहिरवार की बरात में जाने वाले उनके अपने। करवटें बदलते हुए रात कटी। सुबह से पीड़ित परिजनों के घरों में रिश्तेदारों व सांत्वना देने वाले पहुंचने लगे।
दिनभर गांव में रोने और चीखने की आवाजें गूंजती रहीं। वैसे तो गांव का माहौल कुछ सामान्य दिखा, गांव की दुकानें भी खुलीं और लोग कामकाज पर भी निकले, पांच लोगों की मौत के जख्म सबको तड़पाते रहे। मृतकों के परिजन उस काली रात को कोस रहे हैं, जब लोग मनोज की शादी में शामिल होने छतरपुर के दीवान जू का पुरवा गए थे।
बरात के साथ न तो दुल्हन विदा होकर लौटी, न ही उनके अपने। हादसे का शिकार हुए गांव के सत्यपाल, राजू कुशवाहा, कुलदीप, घनश्याम और रामरतन के परिजनों के घर में सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। किसी के आंसू फूटे तो कोई दहाड़ें मारकर रोने लगा।
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इसी बीच पूर्व विधायक कप्तान सिंह राजपूत, पूर्व राज्यमंत्री चौधरी ध्रुवराम लोधी, सपा जिलाध्यक्ष प्राण सिंह यादव, भाजपा नेता विनीता गोस्वामी समेत कई राजनीतिक दलों के नेता मृतकों के घर एक-एक कर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना देकर मदद का भरोसा दिया।
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दिनभर गांव में रोने और चीखने की आवाजें गूंजती रहीं। वैसे तो गांव का माहौल कुछ सामान्य दिखा, गांव की दुकानें भी खुलीं और लोग कामकाज पर भी निकले, पांच लोगों की मौत के जख्म सबको तड़पाते रहे। मृतकों के परिजन उस काली रात को कोस रहे हैं, जब लोग मनोज की शादी में शामिल होने छतरपुर के दीवान जू का पुरवा गए थे।
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बरात के साथ न तो दुल्हन विदा होकर लौटी, न ही उनके अपने। हादसे का शिकार हुए गांव के सत्यपाल, राजू कुशवाहा, कुलदीप, घनश्याम और रामरतन के परिजनों के घर में सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। किसी के आंसू फूटे तो कोई दहाड़ें मारकर रोने लगा।
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इसी बीच पूर्व विधायक कप्तान सिंह राजपूत, पूर्व राज्यमंत्री चौधरी ध्रुवराम लोधी, सपा जिलाध्यक्ष प्राण सिंह यादव, भाजपा नेता विनीता गोस्वामी समेत कई राजनीतिक दलों के नेता मृतकों के घर एक-एक कर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना देकर मदद का भरोसा दिया।
ऐसा ही माहौल स्वासामाफ गांव का दिनभर रहा। उधर, गांव और क्षेत्र के लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। बता दें, चरखारी के स्वासामाफ गांव निवासी मनोज अहिरवार की बरात मंगलवार को महाराजपुर, छतरपुर के दीवान जू का पुरवा गांव गई थी। वहां समारोह स्थल के पास खुले पड़े कुएं में बरातियों से भरी कार गिर गई थी। हादसे में स्वासामाफ गांव के पांच लोगों की मौत हो गई थी। जबकि, तीन बरातियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था।
दिल्ली से बेटों के आने पर हुआ अंतिम संस्कार
कस्बा के देवगनपुरा निवासी रामाधीन भी इस हादसे में मौत का शिकार हुए। उनके बेटे सुरेंद्र व विपिन दिल्ली में मजदूरी करते हैं। पिता की मौत की खबर पाकर दोनों भाई रात में गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार कराया। रामाधीन गांव में मजदूरी करता था, उसकी दो बीघा जमीन है। जमीन का पट्टा शासन ने उसे दिया था। पिछले साल उसने छत्रसाल बैंक से 40 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था।
देखा था अफसर बनने का सपना, अब मजदूरी ही सहारा
हादसे में राजू कुशवाहा की मौत से परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। राजू शादी-बरातों में आतिशबाजी करता था। ये काम न मिलने पर वह मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था। राजू ने बेटे की शादी के लिए 2.35 लाख का कर्ज भी लिया था, जो अभी तक चुकता नहीं हुआ है।
राजू कुशवाहा चाहता था कि उसके बेटे खेमचंद्र, सुधीर पढ़कर लिखकर अफसर बनें। खेमचंद्र बीए की पढ़ाई करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा था। अब बच्चों के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी आ गई है।
दिल्ली से बेटों के आने पर हुआ अंतिम संस्कार
कस्बा के देवगनपुरा निवासी रामाधीन भी इस हादसे में मौत का शिकार हुए। उनके बेटे सुरेंद्र व विपिन दिल्ली में मजदूरी करते हैं। पिता की मौत की खबर पाकर दोनों भाई रात में गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार कराया। रामाधीन गांव में मजदूरी करता था, उसकी दो बीघा जमीन है। जमीन का पट्टा शासन ने उसे दिया था। पिछले साल उसने छत्रसाल बैंक से 40 हजार रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था।
देखा था अफसर बनने का सपना, अब मजदूरी ही सहारा
हादसे में राजू कुशवाहा की मौत से परिवार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। राजू शादी-बरातों में आतिशबाजी करता था। ये काम न मिलने पर वह मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था। राजू ने बेटे की शादी के लिए 2.35 लाख का कर्ज भी लिया था, जो अभी तक चुकता नहीं हुआ है।
राजू कुशवाहा चाहता था कि उसके बेटे खेमचंद्र, सुधीर पढ़कर लिखकर अफसर बनें। खेमचंद्र बीए की पढ़ाई करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा था। अब बच्चों के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी आ गई है।
खेमचंद्र ने बताया कि परिवार में मां लक्ष्मी के अलावा छोटा भाई सुधीर और बहनें प्रियंका व खुश्बू हैं। छोटे भाई व बहनें पढ़ाई कर रही हैं। उसकी (खेमचंद्र) की शादी इसी साल 29 जून नटर्रा गांव, महोबा में हुई थी। तब पिता ने शादी के लिए कुछ लोगों से करीब 2.35 लाख रुपये कर्ज लिया था। यह कर्ज चुकाने को उसके पिता खूब मेहनत कर रहे थे। पर अभी तक कर्ज नहीं चुका पाए।
पति का चेहरा भी नहीं देख सकी काशीबाई
छतरपुर में हुए हादसे में जान गंवाने वाले रामरतन की पत्नी काशीबाई दिल्ली में मजदूरी करती है। रामरतन भी वहां मजदूरी करता था। इसी साल जुलाई में दोनों दिल्ली गए थे। रामरतन करीब एक महीने पहले मां और बच्चों के पास गांव लौट आया था।
मनोज की शादी में शामिल होने के लिए रुक गया था। पत्नी काशीबाई से वायदा किया था कि वह मनोज की शादी के बाद दिल्ली लौट आएगा। काशीबाई ने बताया कि वह पति के दिल्ली लौटने का इंतजार कर रही थी।
इंतजार पूरा होता कि इससे पहले ही उसका सुहाग उजड़ गया। पति की मौत की खबर मिलने पर वह तुरंत बस से दिल्ली से महोबा के लिए चल दी। घर पहुंची तो पति का अंतिम संस्कार हो चुका। अंत में वह पति का चेहरा भी नहीं देख सकी।
पति का चेहरा भी नहीं देख सकी काशीबाई
छतरपुर में हुए हादसे में जान गंवाने वाले रामरतन की पत्नी काशीबाई दिल्ली में मजदूरी करती है। रामरतन भी वहां मजदूरी करता था। इसी साल जुलाई में दोनों दिल्ली गए थे। रामरतन करीब एक महीने पहले मां और बच्चों के पास गांव लौट आया था।
मनोज की शादी में शामिल होने के लिए रुक गया था। पत्नी काशीबाई से वायदा किया था कि वह मनोज की शादी के बाद दिल्ली लौट आएगा। काशीबाई ने बताया कि वह पति के दिल्ली लौटने का इंतजार कर रही थी।
इंतजार पूरा होता कि इससे पहले ही उसका सुहाग उजड़ गया। पति की मौत की खबर मिलने पर वह तुरंत बस से दिल्ली से महोबा के लिए चल दी। घर पहुंची तो पति का अंतिम संस्कार हो चुका। अंत में वह पति का चेहरा भी नहीं देख सकी।
घनश्याम का नाम आवास सूची में भी नहीं
स्वासामाफ गांव में वर्ष 2011 की प्रधानमंत्री आवास के पात्रों की सूची तैयार की गई थी। सूची में हादसे में मरे घनश्याम का नाम शामिल नहीं था। इसलिए उसे इस योजना का लाभ नहीं मिला है। घनश्याम के परिजन आज भी कच्चे मकान में जीवन गुजार रहे हैं।
सभी की पानी में डूबने से मौत
छतरपुर के दीवान जू का पुरवा गांव में बरातियों से भरी कार गिरने से स्वासामाफ गांव के पांच और पननाड़ी के देवगन पुरवा के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सभी की कुएं के अंदर पानी में डूबने से मौत हुई थी। जिला प्रशासन ने गांव के लेखपाल उत्तम सिंह से भी रिपोर्ट मांगी है। गुरुवार सुबह से ही उत्तम सिंह गांव पहुंच गए। यहां उन्होंने मृतकों के परिजनों के दस्तावेज तैयार किए।
गांव आई मध्यप्रदेश की टीम
छतरपुर में हादसे का शिकार हुए मृतकों के परिजनों को मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से भी मुआवजा दिया जाएगा। इस सिलसिले में छतरपुर जिले के महाराजपुर तहसील के राजस्व निरीक्षक रामप्रसाद अहिरवार व महाराजपुर तहसील मटौंदा बेसन हल्के के पटवारी (लेखपाल) से संतोष साहू गुरुवार को स्वासामाफ गांव पहुंचे।
यहां उन्होंने मृतकों के परिजनों के घर पहुंचकर परिवार का हाल जाना। साथ ही आश्रितों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड व अन्य दस्तावेजों की छाया प्रति ली। यहां उन्होंने मृतकों के पंचनामे तैयार कराए। राजस्व निरीक्षक ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन पानी में डूबने से मौत होने पर मृतक आश्रित को मुआवजा देता है।
स्वासामाफ गांव में वर्ष 2011 की प्रधानमंत्री आवास के पात्रों की सूची तैयार की गई थी। सूची में हादसे में मरे घनश्याम का नाम शामिल नहीं था। इसलिए उसे इस योजना का लाभ नहीं मिला है। घनश्याम के परिजन आज भी कच्चे मकान में जीवन गुजार रहे हैं।
सभी की पानी में डूबने से मौत
छतरपुर के दीवान जू का पुरवा गांव में बरातियों से भरी कार गिरने से स्वासामाफ गांव के पांच और पननाड़ी के देवगन पुरवा के एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक सभी की कुएं के अंदर पानी में डूबने से मौत हुई थी। जिला प्रशासन ने गांव के लेखपाल उत्तम सिंह से भी रिपोर्ट मांगी है। गुरुवार सुबह से ही उत्तम सिंह गांव पहुंच गए। यहां उन्होंने मृतकों के परिजनों के दस्तावेज तैयार किए।
गांव आई मध्यप्रदेश की टीम
छतरपुर में हादसे का शिकार हुए मृतकों के परिजनों को मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से भी मुआवजा दिया जाएगा। इस सिलसिले में छतरपुर जिले के महाराजपुर तहसील के राजस्व निरीक्षक रामप्रसाद अहिरवार व महाराजपुर तहसील मटौंदा बेसन हल्के के पटवारी (लेखपाल) से संतोष साहू गुरुवार को स्वासामाफ गांव पहुंचे।
यहां उन्होंने मृतकों के परिजनों के घर पहुंचकर परिवार का हाल जाना। साथ ही आश्रितों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड व अन्य दस्तावेजों की छाया प्रति ली। यहां उन्होंने मृतकों के पंचनामे तैयार कराए। राजस्व निरीक्षक ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन पानी में डूबने से मौत होने पर मृतक आश्रित को मुआवजा देता है।