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पांच प्रोफेसरों के इशारे पर आईआईटी का हो सकता था जामिया जैसा हाल
Sat, 07 Mar 2020 12:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 07 Mar 2020 12:58 AM IST
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कानपुर आईआईटी
आईआईटी कानपुर में सीएए-एनआरसी के विरोध में जामिया जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में निकाले गए शांति मार्च को कुछ प्रोफेसरों ने हवा देकर माहौल खराब करने की कोशिश की थी। वे मार्च में शामिल छात्रों को उकसाकर बवाल कराने का प्रयास कर रहे थे।
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जांच के लिए बनी छह सदस्यीय विभागीय कमेटी ने पांच प्रोफेसरों की भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके खिलाफ रिपोर्ट सौंपी है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इन प्रोफेसरों के खिलाफ कार्रवाई हो कती है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय दिल्ली में सीएए-एनआरसी का विरोध कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में आईआईटी कानपुर में छात्रों ने 17 दिसंबर, 2019 को शांति मार्च निकाला था।
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इसमें बीटेक, एमटेक और पीएचडी के करीब तीन सौ छात्र शामिल हुए थे। संस्थान की तरफ से प्रतिबंध लगाने के बावजूद हुए प्रदर्शन में पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज की नज्म हम देखेंगे... पढ़ी गई थी। कुछ प्रोफेसरों ने प्रदर्शन को हवा देकर इसका रुख बदलने का प्रयास किया था। इनकी हरकतें परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद थीं। सीसीटीवी फुटेज में आईआईटी के पांच प्रोफेसर छात्रों को उकसाने वाले इशारे करते दिख रहे हैं।
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आईआईटी के सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को समझा-बुझाकर शांत किया था। प्रारंभिक जांच में 11 प्रोफेसर संदेह के घेरे में थे, जिनमें से सात के आंशिक रूप से प्रदर्शन में शामिल होने की पुष्टि हुई है।
वायरल वीडियो में भी दिखी हरकत आईआईटी के प्रो. वाशी शर्मा ने शांति मार्च की वायरल वीडियो आईआईटी प्रशासन को भेजकर प्रदर्शन और फैज की नज्म पढ़े जाने की जांच की मांग की थी।
आईआईटी प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर नज्म की जांच कराने से इनकार कर दिया था। आईआईटी के एक अधिकारी के मुताबिक, मामले में कार्रवाई हो सकती है। प्रदर्शन के दौरान शहर में धारा-144 लागू थी। ऐसे में प्रशासन की इजाजत के बिना किसी भी तरह का प्रदर्शन करना कानून का उल्लंघन था।