असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती मामला: एकेटीयू में मानक पूरा न करने पर रिजेक्ट हुए अभ्यर्थी, एचबीटीयू प्रशासन ने इंटरव्यू तक पहुंचाया
एचबीटीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में मानकों की अनदेखी का मामला सामने आया है।अभ्यर्थियों ने एचबीटीयू प्रशासन पर नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया है। एकेटीयू में मानक पूरा न करने पर रिजेक्ट हुए दो अभ्यर्थियों को एचबीटीयू प्रशासन ने इंटरव्यू तक पहुंचा दिया।
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हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में एक और घपला सामने आया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) ने जिन अभ्यर्थियों को मानक न पूरे होने पर रिजेक्ट कर दिया था, एचबीटीयू ने उन अभ्यर्थियों का चयन कर लिया है। एक ही प्रदेश की दो इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में दो तरह के भर्ती नियमों का पालन किया गया है। एचबीटीयू में चल रही असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया में घपलों की परत दर परत खुल रही है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि एकेटीयू में भी असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया के लिए 2021 में विज्ञापन निकला था। इसमें एपीआई (एकेडमिक परफार्मेंस इंडेक्स) के आधार पर दस्तावेज पूरा न होने के कारण दो अभ्यर्थियों को रिजेक्ट कर दिया गया था।
एक महिला अभ्यर्थी के रिजेक्शन का कारण बताया गया था कि उनकी पीएचडी की डिग्री और स्नातक की डिग्री के विषय अलग-अलग हैं। उन्होंने स्नातक कंप्यूटर साइंस से किया है, एमटेक किया नहीं है और पीएचडी इलेक्ट्रानिक्स से की है। वहीं, दूसरे पुरुष अभ्यर्थी को कम अनुभव के कारण रिजेक्ट किया गया था। इन दोनों को एचबीटीयू ने शॉर्टलिस्ट कर लिया है। दोनों अभ्यर्थी इंटरव्यू तक भी पहुंच गए हैं। एग्जिक्यूटिव काउंसिल में इनके परिणाम की भी घोषणा कर दी जाएगी। बता दें कि शिक्षक भर्ती के नियम एआईसीटीई और यूजीसी तय करती है। उन्हीं नियमों का पालन सभी यूनिवर्सिटी को करना पड़ता है।
नियम-कानून के दायरे में रहकर नियुक्तियां हो रही हैं। हर संस्थान के भर्ती के नियम अलग-अलग होते हैं। बीटेक धारी छात्र ने कुछ वैकल्पिक विषयों से अगर पीएचडी की है तो उसे नियुक्ति के लिए योग्य माना जाता है। जिन अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ है, वे ही ये सब अफवाह फैला रहे हैं। -प्रो. समशेर सिंह, कुलपति, एचबीटीयू
ये भी लगाए आरोप
संस्थान में एक ही नियुक्ति में अलग-अलग नियमों का पालन किया गया है। एक अभ्यर्थी को एमटेक न होने और पीएचडी दूसरे विषय में होने के बावजूद लिखित परीक्षा के लिए चयनित कर लिया है जबकि दूसरे अभ्यर्थी को एमटेक न होने पर रिजेक्ट कर दिया गया। नियमत: एक ही विषय से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी करने वाले अभ्यर्थी का चयन होना चाहिए। दस्तावेजों के सत्यापन के लिए संस्थान ने कुलसचिव को कार्यभार न सौंपकर दो उप कुलसचिवों की भी नियुक्ति की है जबकि संस्थान में इसके लिए कोई पद सृजित नहीं है।
नियुक्ति पत्र देने में शासन के निर्देश भी नहीं माने
अभ्यर्थियों का आरोप है कि 2017 में उत्तर प्रदेश सरकार और विश्व बैंक परियोजना के तहत एचबीटीयू में 28 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती हुई थी। उस दौरान नियुक्ति पाने वालों से कहा गया था कि उनका काम अगर संतुष्टिपूर्ण होता है तो उनको नियमित किया जाएगा और हर साल इंक्रीमेंट दिया जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद जब इनको नियमित नहीं किया गया तो वे कोर्ट चले गए। उनका कहना था कि काम संतुष्टिपूर्ण होने की वजह से हर साल इंक्रीमेंट दिया गया, लेकिन फिर भी उनको नियमित नहीं किया जा रहा है।
इस पर शासन ने कोर्ट का हवाला देते हुए सभी संस्थानों को निर्देश दिए थे कि अगर कोई नियुक्ति होती है तो नियुक्ति पत्र में इस मुकदमे के चलने की बात लिखी जाए ताकि मुकदमे का निर्णय आने पर किसी को कोई समस्या नहीं हो। संस्थान में दो महीने पहले सिविल और इलेक्ट्रानिक्स विभाग में आठ असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती हुई थी। इनके नियुक्ति पत्र में शासन के आदेश का हवाला नहीं दिया गया है।