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ऑनलाइन ठगों ने श्रम विभाग की बढ़ाई मुश्किलें, एक लाख श्रमिकों के खाते में नहीं पहुंची सहायता राशि

Sat, 09 May 2020 08:13 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा अमित, अमर उजाला, कानपुर
अमित, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 09 May 2020 08:13 AM IST
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Assistance amount not reached in the account of one lakh workers
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
ऑनलाइन ठगी करने वालों ने श्रम विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विभाग के अफसर व कर्मचारी जब श्रमिकों को फोन कर उनके पंजीयन व बैंक खाता आदि संबंधी जानकारी मांगते हैं तो वे इन्हें ठग समझकर कुछ भी बताने से मना कर दे रहे हैं।
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इससे करीब 20 हजार निर्माण श्रमिकों के खाते में अभी तक एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता नहीं पहुंच पाई है। दरअसल, उप्र भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित आपदा राहत सहायता योजना के तहत शहर के सैकड़ों श्रमिकों को एक-एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
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यहां दो लाख से अधिक निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं। लेकिन अभी तक एक लाख श्रमिकों को ही यह सहायता राशि भेजी जा सकी है। शेष पंजीकृत श्रमिकों के खाते की जानकारी न होने तथा करीब 80 हजार का अंशदान नियमित न होने से भुगतान लटका हुआ है।
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इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने 11 ब्लाकों पर श्रम प्रवर्तन अधिकारियों की नियुक्ति की है। इनके व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए गए हैं। इन नंबरों पर जिन निर्माण श्रमिकों के अंशदान नियमित हैं, उन्हें अपना पंजीयन प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक की कॉपी, आईएफएससी कोड, खाता संख्या, बैंक शाखा का नाम उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें भुगतान किया जा सके।

लेकिन इस व्यवस्था के तहत जब विभाग के अधिकारी व कर्मचारी संबंधित श्रमिक को फोन करते हैं तो वह इन्हें ठग या जालसाज समझकर फोन काट देते हैं। श्रम विभाग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने बताया कि विभाग के कर्मचारी दिन रात खातों को अपडेट करने में जुटे हैं लेकिन श्रमिकों की ओर से जानकारी नहीं मिल पा रही है।

उन्हें लगता है कि कोई गलत व्यक्ति उनके बैंक खाते आदि की जानकारी ले रहा है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को अपना कोई भी डिटेल किसी को बताना नहीं है बल्कि विभाग की ओर जारी नंबरों पर भेजना है। बता दें कि विभाग में एक साल का पंजीकरण शुल्क 40 रुपये तथा तीन साल के लिए 80 रुपये है। 20 रुपये नवीनीकरण शुल्क लगता है।

केस-एक: फजलगंज में रहने वाले निर्माण श्रमिक घसीटाराम के फोन नंबर 9001345962 पर श्रम विभाग की ओर से संपर्क कर बताया गया कि उनका बैंक खाता विवरण विभाग के पास नहीं है। उनसे यह ब्योरा विभाग के व्हाट्सएप नंबर पर भेजने के लिए कहा गया तो श्रमिक ने जानकारी देने से मना कर दिया। साथ ही जालसाजी की आशंका जताते हुए फोन भी काट दिया।

 

केस-दो: पनकी ब्लाक-2 निवासी सीताराम के मोबाइल नंबर 8007949332 पर श्रम विभाग कर्मी ने फोन कर जब बैंक खाता, आईएफएससी कोड आदि की जानकारी विभाग की ओर से जारी मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप करने को कहा तो श्रमिक ने इसे फर्जीवाड़ा बताया। और दोबारा फोन न करने की हिदायत दी। 

विभाग ने जारी किए हैं ये नंबर
ब्लाकवार श्रमिकों के लिए बिधनू में श्रम प्रवर्तन अधिकारी बाल गोविंद 7060057686, भीतरगांव में केपी जायसवाल 9336240444, सरसौल में राजेश द्विवेदी 9140833712, चौबेपुर में अवधेश वर्मा 7905275653, बिल्हौर में जितेंद्र सिंह भदौरिया 7054375781, घाटमपुर में सुमन सिंह 9838998672, पतारा में गौरव गुप्ता 7007675535, शिवराजपुर में पंकज शुक्ला 9305865600, कल्याणपुर में सीडी ओझा 9450153361, ककवन में अमित सिंह, 7007607151 तथा कानपुर सदर में एसपी पांडेय का मोबाइल नंबर 9415961717 जारी किया गया है। वे इन नंबरों पर संपर्क कर जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
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