{"_id":"5f9b1ab38ebc3e9bd01264c4","slug":"arun-had-opened-50-bank-accounts-to-hide-black-money","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अरुण ने कालाधन छिपाने के लिए खुलवाए थे 50 खाते, जांच में करीब आठ करोड़ बीस लाख रुपये के लेनदेन का हुआ था खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अरुण ने कालाधन छिपाने के लिए खुलवाए थे 50 खाते, जांच में करीब आठ करोड़ बीस लाख रुपये के लेनदेन का हुआ था खुलासा
Fri, 30 Oct 2020 01:17 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 30 Oct 2020 01:17 AM IST
विज्ञापन
पुलिस गिरफ्त में अरुण कुमार मिश्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) के प्रधान महाप्रबंधक अरुण कुमार मिश्रा पर चलने वाला सबसे बड़ा मामला आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का है। आरोप है कि भ्रष्टाचार कर उसने अकूत कालाधन जमा किया है।
इस कालेधन को छिपाने के लिए अरुण ने 2005 से 2006 के बीच 50 से अधिक फर्जी खाते खुलवाए थे। सीबीआई की देहरादून शाखा को इसकी सूचना मिली थी। इसके बाद 2011 में ईडी ने भी जांच की थी।
इसमेेें खुलासा हुआ था कि इन खातों से आठ करोड़ बीस लाख का लेनदेन हुआ है। अरुण ने ये फर्जी खाते देहरादून, हरिद्वार के अलावा कानपुर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, पंजाब नेशनल बैंक और सिंडीकेट बैंक में खुलवाए थे।
विज्ञापन
खातों को खोलने में जाली ड्राइविंग लाइसेंस और नकली पैन कार्ड लगाया गया था। ईडी की जांच के बाद 2011 में ही एसआईटी ने एक मामला दर्ज किया था। यह मामला अभी तक अरुण के लिए सुरक्षा कवच बना हुआ है।
विज्ञापन
इस कालेधन को छिपाने के लिए अरुण ने 2005 से 2006 के बीच 50 से अधिक फर्जी खाते खुलवाए थे। सीबीआई की देहरादून शाखा को इसकी सूचना मिली थी। इसके बाद 2011 में ईडी ने भी जांच की थी।
विज्ञापन
इसमेेें खुलासा हुआ था कि इन खातों से आठ करोड़ बीस लाख का लेनदेन हुआ है। अरुण ने ये फर्जी खाते देहरादून, हरिद्वार के अलावा कानपुर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, पंजाब नेशनल बैंक और सिंडीकेट बैंक में खुलवाए थे।
विज्ञापन
खातों को खोलने में जाली ड्राइविंग लाइसेंस और नकली पैन कार्ड लगाया गया था। ईडी की जांच के बाद 2011 में ही एसआईटी ने एक मामला दर्ज किया था। यह मामला अभी तक अरुण के लिए सुरक्षा कवच बना हुआ है।
क्योंकि एसआईटी में कोई भी मुकदमा शासन की अनुमति के बाद ही दर्ज होता है लेकिन इस मामले में शासन की अनुमति नहीं ली गई थी। इसके चलते एसआईटी जांच के खिलाफ अरुण को हाईकोर्ट से स्टे मिला हुआ है।
इसी आधार पर 2014 मेें देहरादून में चार्जशीट खारिज हुई और 2015 में ईडी का मामला भी खारिज हो गया था। जिस दौरान यह मामला दर्ज हुआ था तब प्रदेश में बसपा सरकार थी।
अरुण के खिलाफ शुरू होगी विभागीय जांच, चार्जशीट की तैयारी
पीडब्ल्यूडी की ओर से पाली में बनवाई गई सड़क को यूपीसीडा का दिखाकर 2.11 करोड़ का भुगतान करा लेने के मामले में पुलिस चार्जशीट लगाने की तैयारी में जुटी है। इसके अलावा शासन की ओर से अरुण के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू होगी। चार्जशीट के बाद पुरानी हिस्ट्री निकालकर गैंगस्टर भी लगाया जाएगा।
इसी आधार पर 2014 मेें देहरादून में चार्जशीट खारिज हुई और 2015 में ईडी का मामला भी खारिज हो गया था। जिस दौरान यह मामला दर्ज हुआ था तब प्रदेश में बसपा सरकार थी।
अरुण के खिलाफ शुरू होगी विभागीय जांच, चार्जशीट की तैयारी
पीडब्ल्यूडी की ओर से पाली में बनवाई गई सड़क को यूपीसीडा का दिखाकर 2.11 करोड़ का भुगतान करा लेने के मामले में पुलिस चार्जशीट लगाने की तैयारी में जुटी है। इसके अलावा शासन की ओर से अरुण के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू होगी। चार्जशीट के बाद पुरानी हिस्ट्री निकालकर गैंगस्टर भी लगाया जाएगा।