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अगरबत्ती से आसः कारीगरों को मिलेगा काम, चूल्हों में बढ़ेगी आंच

Fri, 06 Sep 2019 02:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशुतोष दीक्षित, कन्नौज
आशुतोष दीक्षित, कन्नौज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 06 Sep 2019 02:46 AM IST
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Kanpur News: Artisans will get work after Incense stick industry get back to track in kanpur
अगरबत्ती - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्र सरकार के फैसले से अगरबत्ती कारोबार की उखड़ती सांसों को दम मिलने की उम्मीद जगी है। कारोबारी नए सिरे से योजना बनाने लगे हैं। कारीगरों को उम्मीद है कि काम मिलेगा तो ठंडे पड़ते चूल्हे में आंच भी बढ़ेगी। जिले में 50 से ज्यादा कारखाने अगरबत्ती बनाने के हैं। इनमें काम सिकुड़ रहा है। तकरीबन 15 से 20 हजार लोग काम में लगे थे। 

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शहर से सटे गांवों को भी रोजगार मिला हुआ था। वियतनाम और  चीन के दखल से यहां कारोबार धीमा पड़ता चला गया। अब केंद्र सरकार ने वियतनाम और चीन से आ रहीं सादी अगरबत्ती (बिना सुगंध वाली) पर रोक लगा दी है।
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दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, मैसूर, बंगलूरू, इंदौर के साथ ही यूपी के कन्नौज, कानपुर, गया, बनारस, गोरखपुर और अलीगढ़ अगरबत्ती के कारोबार में अग्रणी हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश में करीब छह हजार करोड़ रुपये का अगरबत्ती कारोबार है। इसे पिछले चार सालों में वियतनाम और चीन से कड़ी टक्कर मिली है। 
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सादी अगरबत्ती और बंबू स्टिक का 800 करोड़ का सालाना कारोबार इन दोनों देशों से हो रहा था। यानी करीब 70-75 फीसदी आवश्यकता इन दोनों देशों से पूरी हो रही थी। अगरबत्ती कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक अकेले कन्नौज में इन चार सालों में करीब 70 फीसदी कारोबार घट गया। कई फर्मों का 20 लाख रुपये तक का कारोबार घटकर दो लाख पर आ गया। 

केंद्र सरकार के इस फैसले से इस कारोबार को फिर से ताकत मिलेगी। नोटिफिकेशन में अभी रिस्ट्रिक्शन लिखा है। जरूरत बैन करने की है। सरकार आगे चलकर इसे बैन कर देती है तो कारोबार को और राहत मिलेगी। अभी भी डीजीएफटी लाइसेंस पर इन देशों से अगरबत्ती आयात की जा सकती है।
 

मुनाफा सात से घटकर एक रुपये पर आया

भारत दर्शन अगरबत्ती वर्क्स के मैनेजर मुस्तफा कहते हैं कि 2014 से पहले कन्नौज की अगरबत्ती की देश भर में मांग थी। एक किलो माल पर सात रुपये तक का मुनाफा मिल जाता था। वियतनाम और चीन का माल आने के बाद एक रुपये किलो मुनाफा निकालना मुश्किल हो रहा है। कारोबार बंद होने की स्थिति में था। केंद्र सरकार के इस फैसले से बड़ी राहत मिली है।

कभी 3000 मजदूर थे, अब बचे सिर्फ 50
1980 से चल रही श्री जय अंबे अगरबत्ती कंपनी के मालिक रामजी लाल ने बताया कि किसी समय उनकी कंपनी में 3000 मजदूर तक काम करते थे। हर किसी को सात आठ हजार रुपये तक आमदनी हो जाती थी। जब से दूसरे देश का माल आना शुरू हुआ, बाजार में उनके माल की मांग घट गई। अब यह 50 ही रह गए हैं। कारोबार 20 फीसदी ही बचा है।

काम न मिलने से मजदूरी को मजबूर हैं कारीगर
अगरबत्ती का काम करने वाले हाफीजीन का कहना है कि वियतनाम और चीन से आ रहे माल ने लोकल के काम को खत्म सा कर दिया था। अकेले कन्नौज में अगरबत्ती बनाने की करीब 400 मशीनें लगी हैं। इनमें से आधी बंद हो गई थीं। नए फैसले से फिर से यह कारोबार रफ्तार पकड़ेगा। कारीगर मजदूरी करने को मजबूर थे। इन्हें अब फिर से काम मिल सकेगा।

केंद्र सरकार का यह कदम सराहनीय है। कन्नौज में यह लघु उद्योग की तरह चल रहा था। वियतनाम और चीन से कड़ी टक्कर मिलने से यह 70 फीसदी तक सिमट गया। इसे फिर से ताकत मिलेगी। कारोबार पहले की स्थिति में लौटने से न सिर्फ राजस्व बल्कि रोजगार भी बढ़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक कन्नौज में 50 कारखानों में अगरबत्ती बन रही हैं।
- शक्ति विनय शुक्ला, डायरेक्टर, सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) कन्नौज।

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