अर्जुन ने किया इकबाल-ए-जुर्म: पत्नी के साथ शराब पी, भांग खाई, फिर दोनों की गला घोट कर की हत्या
कानपुर में पत्नी और बेटी की हत्या करने के बाद आत्महत्या के प्रयास के मामले में अर्जुन ने जुर्म कबूल कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने पत्नी व बेटी का अंतिम संस्कार किया।
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मैं वो अभागा हूं जो न तो अपनी पत्नी-बेटी के साथ खुशी से जी पाया और न ही साथ मर पाया। पत्नी की मर्जी से उसकी और बेटी की हत्या करने का फैसला किया। दोनों को इन्हीं हाथों से मार डाला लेकिन ये हाथ मेरी ही जान नहीं ले सके। मैं बच गया। इतना कहते हुए पोस्टमार्टम हाउस में पत्नी निशा और बेटी आशवी का पोस्टमार्टम कराने आया अर्जुन सिर पकड़कर रोने लगा।
अर्जुन ने बताया कि रविवार रात दोनों ने पहले शराब पी, फिर भांग खाई। इसके बाद वह पत्नी का गला दुपट्टे से कस रहा था कि पत्नी ने पहले बेटी को मारने को कहा। बेटी को मारने के बाद पत्नी का गला घोट दिया और उसके बाद पंखे से उसी दुपट्टे का फंदा बनाकर जान देने की कोशिश की लेकिन दुपट्टा फट गया। फिर चाकू से हाथ पैर की नसें काट लीं लेकिन वह नहीं मरा।
वीडियोग्राफी के बीच डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
निशा और आशवी का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने वीडियो फोटोग्राफी के बीच किया। पीएम रिपोर्ट के अनुसार निशा की मौत दुपट्टे जैसे किसी कपड़े से गला घोंटे जाने से होने की बात सामने आई है। जबकि आशवी को जहर देने की आशंका के चलते उसका विसरा सुरक्षित कर विस्तृत जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस हिरासत में अर्जुन ने बताया कि उसने पत्नी के कहने पर पहले रात में ही भांग और शराब का सेवन किया। दोनों लोगों ने भांग खाई और बेटी को जहरीला पदार्थ दिया। चूंकि वह मेडिकल लाइन में पहले रहा था इसलिए उसे पता था कि कितना जहर बेटी के शरीर में काम करेगा। इसके बाद पत्नी का गला घोंटकर उसने खुद की जान लेने का प्रयास किया।
निशा से लव मैरिज के बाद से रह रहे थे अलग
अर्जुन ने बताया कि उसने निशा से लव मैरिज की थी। निशा सेे पहली बार वह लखनऊ में मिला था, जहां दोनों को पहली मुलाकात में ही एक दूसरे से प्यार हो गया। रिश्तेदारी में होने की वजह से दोनों के परिवार वाले शादी को तैयार नहीं थे लेकिन दोनों ने ही पारिवारिक एतराज को दरकिनार कर शादी कर ली। जांच में अर्जुन ने बताया है कि उसने घर बेचने की कोशिश भी की लेकिन उसका घर नहीं बिका। पारिवारिक एतराज की वजह से ही वह परिवार से अलग रहता था। परिवार रेल बाजार में रहता था जबकि वह चकेरी में रह रहा था