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सिख विरोधी दंगा: पड़ोसी ने बचाने को खोला था दरवाजा, दंगाइयों ने चौखट पर ही मार डाला था

Sat, 14 Aug 2021 05:03 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 14 Aug 2021 05:03 AM IST
सार

घटना के दिन दंगाइयों ने तेज प्रताप के मकान में धावा बोल दिया था। तेज प्रताप व उनके बेटे सत्यवीर को घर के अंदर ही पीटा।

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Anti-Sikh riots: Neighbor had opened the door to save, the rioters killed him on the doorstep
सिख दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : गूगल

विस्तार

सिख विरोधी दंगे के दौरान दबौली एल-ब्लॉक स्थित मकान में रहने वाले पिता और पुत्र को जब दंगाइयों ने मारने की कोशिश की थी तब पड़ोसी रामचंद्र शर्मा ने उन्हें बचाने के लिए अपना घर का दरवाजा खोल दिया था। लेकिन दंगाइयों ने उनकी आंखों के सामने पिता-पुत्र की हत्या कर दी थी। यह बयान पड़ोसी ने एसआईटी को दर्ज कराए हैं।
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सिख दंगे की जांच कर रहे एसआईटी के एसएसपी बालेंदु भूषण ने दावा किया कि एक नवंबर 1984 को गोविंद नगर थाना क्षेत्र के दबौली एल-ब्लॉक स्थित मकान में रहने वाले कारोबारी तेज प्रताप सिंह (45) और बेटे सत्यवीर सिंह (22) की दंगाइयों ने हत्या कर शव को जला दिया था। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने इसी मकान के सामने रहने वाले पड़ोसी 70 वर्षीय रामचंद्र शर्मा के बयान दर्ज किए।
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रामचंद्र ने टीम को बताया कि वह 1984 के पहले से यहां रह रहे हैं। घटना के दिन दंगाइयों ने तेज प्रताप के मकान में धावा बोल दिया था। तेज प्रताप व उनके बेटे सत्यवीर को घर के अंदर ही पीटा। तेज प्रताप अपनी जान बचाने के लिए घर से बाहर भागे, जिन्हें बचाने के लिए उन्होंने अपने घर का दरवाजा खोल दिया।
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तेज प्रताप घर के अंदर घुसने ही वाले थे कि दंगाइयों ने उन्हें पकड़ा और घर की चौखट पर ही हत्या कर दी। यह दृश्य देखने के बाद उनका पूरा परिवार कई दिनों तक सदमे से बाहर नहीं निकल पाया था। बेटे सत्यवीर को घर के अंदर आग से जलाकर मार डाला था। इसके बाद दंगाई उनके घर का सारा सामान लूट कर भाग निकले थे। बुधवार को एसआईटी के साथ जांच करने पहुंची फोरेंसिक टीम को भी इसी मकान से 36 साल पुराने खून के धब्बे और जलाने के निशान मिले थे।

घटनास्थल पर चल रहा पानी का प्लांट
वर्तमान में इस मकान में अंगद दीप सिंह रोषी रहते हैं। उन्होंने बताया कि 1990 में उनके पिता ने मकान खरीदा था। तब से मकान के सभी कमरों का कई बार रंगरोगन होने के साथ ही मरम्मत भी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि एसआईटी और फोरेंसिक ने जिस जगह से साक्ष्य जुटाए हैं, वहां वह करीब 10 सालों से पानी के प्लांट का संचालन कर रहे हैं। जांच करने आई टीम ने उन्हें बाहरी कमरे में बैठा दिया था और इसके बाद टीम ने पूरे घर की जांच की थी। 
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