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Anti Sikh Riots: उम्रदराज आरोपियों को झटका, सेशन कोर्ट से दो की जमानत अर्जियां खारिज

Sat, 16 Jul 2022 07:45 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 16 Jul 2022 07:45 AM IST
सार

सिख विरोधी दंगे में एसआईटी ने 38 सालों के बाद जिन 22 लोगों की गिरफ्तारियां की हैं, वे सभी उम्रदराज हैं। ऐसा माना जा रहा था कि उन्हें शासन स्तर से ही उम्र और अच्छे व्यवहार के आधार पर सजा में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन ऐसे आरोपियों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

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Anti Shikh Riots: Shock to the aged accused, bail applications of two rejected by the sessions court
सिख विरोधी दंगा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर सिख विरोधी दंगे के उम्रदराज आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। उम्र के आधार पर जमानत में राहत मिलने की उनकी उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। अपर जिला जज 17 विकास गोयल ने जूही लाल कालोनी निवासी 75 वर्षीय रविशंकर मिश्रा और निराला नगर के ब्लॉक निवासी 54 वर्षीय गंगा बख्श सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अब उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। कम से कम एक माह अभी जेल में ही रहना होगा।

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किदवईनगर थाना क्षेत्र के निराला नगर निवासी दो सिखों को जिंदा जला दिया गया था। एक को भी गोली मार दी। कई सरदारों के हाथ-पैर काट दिए। आरोपी रविशंकर के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि मामला 38 साल पुराना है। रविशंकर नामजद आरोपी भी नहीं है। गंगा बख्श के अधिवक्ता ने कहा कि वह घटना के एक दिन पहले रिश्तेदार के यहां गया था। दंगा होने पर 12 दिन तक वहीं रहा। 

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इन्हीं आधारों पर 31 दिसंबर 1984 को पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट भी लगा दी थी। एसआईटी ने गुडवर्क दिखाने के लिए झूठा फंसा दिया। वही एडीजीसी संजय कुमार झा ने तर्क रखा कि विवेचना के दौरान कई चश्मदीद गवाहों ने बयान दर्ज कराए। इन बयानों में रविशंकर और गंगाबख्श का नाम सामने आया है। वे दंगे, लूटपाट और आगजनी में भीड़ का हिस्सा थे। 

वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के दौरान कुल 18 मुकदमे दर्ज हुए थे। सबसे ज्यादा गोविंद नगर थाने में सात, नौबस्ता में चार, नजीराबाद, अर्मापुर, किदवई नगर में दो-दो तथा एक मुकदमा पनकी थाने में दर्ज हुआ था। किदवईनगर थाने में दर्ज हुए मुकदमे में 26 आरोपी बनाए गए हैं। इनमें से 11 जेल में बंद हैं। शुक्रवार को कोर्ट ने इनमें से दो आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर अर्जियां खारिज कर दीं।  -संजय कुमार झा, एडीजीसी

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सभी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक एसआईटी की कार्रवाई अधूरी : भोगल
अखिल भारतीय सिख दंगा पीड़ित राहत कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगल शुक्रवार अधिवक्ता संग शहर पहुंचे। उन्होंने एसआईटी के डीआईजी बालेंदु भूषण से मुलाकात कर कार्रवाई की प्रगति जानी। अब तक की हुई गिरफ्तारियों के लिए उन्होंने डीआईजी को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। वहीं पीड़ित परिवारों से भी मिले। उन्होंने ने कहा कि मामले में जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक एसआईटी की कार्रवाई अधूरी ही है।

भोगल ने बताया कि कानपुर में 96 आरोपियों के नाम प्रकाश में आए थे, इनमें से 73 जीवित हैं। 22 आरोपियों को एसआईटी गिरफ्तार कर चुकी है। 51 की गिरफ्तारी बाकी है। वे बंबा रोड गुमटी नंबर पांच पहुंचे, यहां कुलदीप सिंह, अवतार सिंह और महेंदर सिंह मिलकर उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद निराला नगर में पीड़ित परिवार से मिले। 

झारखंड के बोकारों में भी हुई थी 60 सिखों की हत्या
भोगल ने बताया कि कानपुर में कार्रवाई पूरी होने के बाद यहां काम करने वाली उनकी कमेटी झारखंड के बोकारो में काम करेगी। वहां भी 60 लोगों की हत्या हुई थी, जिनके आरोपियों के बारे में अब तक कुछ पता नहीं चल सका है। उन्हें भी सलाखों के पीछे पहुंचाना है।

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