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कानपुर के मेरे ऊपर बहुत अहसान हैं, मुझे बेटे की तरह स्वीकार किया है- आरिफ मोहम्मद खान
Tue, 03 Sep 2019 01:37 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 03 Sep 2019 01:37 PM IST
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आरिफ मोहम्मद खान
- फोटो : अमर उजाला
केरल के राज्यपाल और कानपुर के पूर्व सांसद आरिफ मोहम्मद खान का कहना है कि कानपुर के मेरे ऊपर बहुत-बहुत अहसान हैं। कानपुर का जिक्र मुझे इमोशनल कर देता है। इस शहर ने मुझे बेटे की तरह स्वीकार किया है। इतना प्यार दिया है कि जीवन में कभी भूल नहीं सकता। वह कहते हैं कि उनके राजनीतिक कॅरियर में कानपुर का बहुत योगदान है।
कानपुर (चमनगंज) में उनकी ससुराल है। यह अलग बात है, लेकिन शहर ने मुझे बहुत अपनापन दिया और बहुत सिखाया है। जब चुनाव लड़ा तो हर समुदाय ने मुझे हाथों-हाथ लिया। सबने अपना समझा। केरल के राज्यपाल आरिफ मो. खान से सोमवार को ‘अमर उजाला’ की फोन पर बात हुई।
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कानपुर (चमनगंज) में उनकी ससुराल है। यह अलग बात है, लेकिन शहर ने मुझे बहुत अपनापन दिया और बहुत सिखाया है। जब चुनाव लड़ा तो हर समुदाय ने मुझे हाथों-हाथ लिया। सबने अपना समझा। केरल के राज्यपाल आरिफ मो. खान से सोमवार को ‘अमर उजाला’ की फोन पर बात हुई।
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यह पूछने पर कि शहर को लेकर वे क्या सोचते हैं? इस सवाल से ही उनकी भावनाएं जाग गईं और स्मृतियां सजीव हो उठीं। बताया कि जब यहां संसदीय चुनाव लड़ा था तो उम्र 29 साल रही है। उस वक्त घोड़े वाले भगवती प्रसाद दीक्षित मेरे खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।
सर्व दलीय सभा हो रही थी, दीक्षित ने जज्बाती भाषण दिया। फिर एकदम से अपने गले से माला उतारी और मेरे गले में पहनाते हुए लोगों से बोले कि अगर मुझे नहीं जिताना है तो आरिफ को वोट दे देना। कानपुर ने मेरे ऊपर प्यार का दरिया उड़ेला है। यहीं से मेरे अंदर आत्मविश्वास आया और इच्छा शक्ति बलवती हुई।
सर्व दलीय सभा हो रही थी, दीक्षित ने जज्बाती भाषण दिया। फिर एकदम से अपने गले से माला उतारी और मेरे गले में पहनाते हुए लोगों से बोले कि अगर मुझे नहीं जिताना है तो आरिफ को वोट दे देना। कानपुर ने मेरे ऊपर प्यार का दरिया उड़ेला है। यहीं से मेरे अंदर आत्मविश्वास आया और इच्छा शक्ति बलवती हुई।