Kanpur: अमर उजाला के स्टिंग में खुली पोल- हर नुक्कड़ पर बिक रहा है नशा, सीपी बोले- मेरे स्तर का मामला नहीं
Kanpur News: ड्रग कारोबार से जुड़े एक शख्स ने बताया कि मादक पदार्थ का रोज 50 लाख का शहर में कारोबार है। सबसे ज्यादा खपत गांजे की है। गांजा व चरस उड़ीसा, बिहार, नेपाल व बाराबंकी से आता है।
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Kanpur Exclusive: कानपुर में ड्रग तस्करों को लेकर दो थाना प्रभारियों के बीच हुए विवाद में भले ही एक थाना प्रभारी का नुकसान हो गया हो, लेकिन चरस, गांजे का गोरखधंधा इसके बाद और फल-फूल गया है। मादक पदार्थों की बिक्री करने वालों ने खुले आम गुमटियों और ठेलों पर माल बेचने के बजाए गली, नुक्कड़ की ओर रुख कर लिया है।
इन अड्डों का पता भी आसानी से गुमटी और ठेले वाले ही दे देंगे। पुलिस की सख्ती से अधिक रिस्क बताकर माल के दाम में इजाफा करके बेचा जा रहा है। गली, नुक्कड़ में जाइए, रुपये थमाइए और बेझिझक चरस, गांजा ले आइए...। यह बात हम यूं ही नहीं कह रहे। अमर उजाला की टीम के स्टिंग ऑपरेशन में हकीकत सामने आई है।
समय:: दोपहर 12.47 बजे | स्थान:: काकादेव
अमर उजाला की टीम थाने से चंद कदम दूर स्थित एक समोसा, खस्ते वाले के ठेले पर पहुंची, जहां माल मिलने की जानकारी दी गई थी।
रिपोर्टर : पुड़िया है क्या ?
दुकानदार : आज यहां बंद है। बगल वाली गली में जाओ। लड़का खड़ा होगा।
रिपोर्टर गली में पहुंचा तो वहां चार पांच युवक ताश पत्ते खेलते दिखे। उन लोगों से रिपोर्टर ने पुड़िया के बारे में पूछा।
जवाब : ताश खेल रहे युवक ने पास खड़े लड़के से कहा, अबे पुड़िया क्यों नहीं देता...। इधर-उधर देखने के बाद युवक ने 100 रुपये लेकर पैंट की जेब से गांजे की पुड़िया निकालकर थमा दी। इसके बाद वह साथियों से हंसी मजाक करने लगा।
समय:: दोपहर 1:55 बजे | स्थान:: डिप्टी का पड़ाव
टीम डिप्टी पड़ाव से हमराज कांप्लैक्स की ओर जाने वाली रोड पर पहुंची।
सड़क किनारे चहल कदमी कर रहे युवक से--
रिपोर्टर : भइया...गांजा की पुड़िया कहां मिलेगी?
युवक : वहां देखो दो महिलाएं खड़ी हैं। उन्हें पैसे दो और ले लो जाकर।
रिपोर्टर महिला से: पुड़िया है ?
महिला : काला सोना लोगे या हरा वाला गांजा।
रिपोर्टर : गांजा चाहिए।
महिला ने ब्लाउज से पॉलिथीन निकली। उसमें कागज में लिपटी गांजा की पुड़िया निकालकर थमा दी। इसके 40 रुपये लिए।
रिपोर्टर : तुम्हारा माल ठीक नहीं लग रहा। रूमा वाले का क्यों नहीं देती?
महिला पिहले पुड़िया खोलकर देखो...ये वही वाला माल है। यह कहते हुए आगे बढ़ गई।
समय:: दोपहर 3:15 बजे | स्थान:: कंजड़नपुरवा
कंजड़नपुरवा में महिलाएं, पुरुषों के साथ बच्चे भी जेब में पुड़िया लेकर बेचते व खुद भी कश लगाते दिखे।
रिपोर्टर की मौजूद एक युवक से बात हुई
रिपोर्टर : पुड़िया है ?
युवक : कौन सी ? गांजा या चरस की?
रिपोर्टर : गांजे वाली।
युवक ने जेब से कागज में लिपटी पुड़िया निकाली। 80 रुपये लेकर पुड़िया थमा दी। बोला, जल्दी निकल लो यहां से...। कहते हुए वह गली में चला गया।
रोज 50 लाख का कारोबार, सब्जियों के बीच आता है माल
ड्रग के कारोबार से जुड़े एक शख्स ने बताया कि मादक पदार्थ का रोज 50 लाख का शहर में कारोबार है। सबसे ज्यादा खपत गांजे की है। गांजा व चरस उड़ीसा, बिहार, नेपाल व बाराबंकी से आता है। तस्कर गांजा छोटे, बड़े वाहनों में सब्जियों आदि के बीच रखकर माल मंगाते हैं। आगे, पीछे सब्जियों के बोरे और बीच में माल भरा होता है।
कोचिंग मंडी और स्कूलों के पास फैला जाल
माफिया ने काकादेव कोचिंग मंडी, शास्त्रीनगर, कल्याणपुर, आईआईटी, कानपुर यूनिवर्सिटी आदि स्थानों पर अपने गुर्गे तैनात कर अपना जाल फैला रखा है। गुर्गों को गांजा और चरस बेचने पर प्रतिदिन हजार रुपये से 15 हजार रुपये तक का मेहनताना दिया जाता है। वहीं, पुलिस की सख्ती के साथ ही 50 रुपये में बिकने वाली गांजा की पुड़िया 100 रुपये में कर दी गई। दो सौ रुपये वाली चरस (काला सोना) की पुड़िया का रेट अब 350 रुपये हो गया है।
पुरानों ने किया किनारा नये नाम आए सामने
एक समय ड्रग का अड्डा लाटूश रोड, कुली बाजार, रेल बाजार, कल्याणपुर सीटीएस बस्ती को माना जाता था। पुलिस ने इनका गैंगचार्ट बनाया तगड़ी कार्रवाई की। क्षेत्र में कई और नामचीन ड्रग तस्कर रहे, जिनका प्रतिदिन 50 से 60 हजार रुपये का धंधा था। पुलिस की कार्रवाई के चलते ड्रग तस्करों ने कारोबार से किनारा किया और ब्याज, जुए के धंधे में उतरकर अपना खर्च चलाने लगे। कई ड्रग तस्कर अपने समाज के नेता बन गए। इनके हटते ही ड्रग के धंधे में नए लोगों ने अपनी पैठ जमा ली।
ये हैं नशे के कारोबारी
काकादेव के शास्त्री नगर में सक्रिय ड्रग माफिया सुशील शर्मा उर्फ बच्चा उसका भाई बऊआ लिंडा, डबल पुलिया में राजेश यादव उर्फ टेढ़ा, काकादेव में जितेंद्र लंगड़ा, कोचिंग मंडी में राकेश, नवाबगंज थानाक्षेत्र के परमट में बऊआ नंगी, नवाबगंज में किशोरी, काली खेड़ा लालबंगला में बलराम राजपूत, ग्वालटोली में अबरार व खलासी लाइन गुड्डू पंडित शामिल हैं। पुलिस इस सभी तस्करों को कई बार मादक पदार्थ की बिक्री में जेल भी भेज चुकी है।
बच्चे हो रहे नशे के लती, सीपी बोले- मेरे स्तर का मामला नहीं
शहर में नशे के कारोबार में छात्र और बच्चे डूब रहे हैं। नशे के आदी हो रहे हैं और सीपी डॉ. आरके स्वर्णकार बोले कि मेरे स्तर का मामला ही नहीं है। जब उनसे इस संबंध में बात की गई तो वह बोले स्टिंग के पहले अपकी टीम स्थानीय थाने या 112 में सूचना नहीं दे सकती थी क्या ? स्टींग कराने के बाद आप हमसे बात कर रहे हैं।
टीम का गठन करके अभियान चलाया जाएगा
संबंधित डीसीपी, मीडिया सेल अथवा जेसीपी से वर्जन ले लीजिए। ये मेरे स्तर का मामला नहीं है। नोएडा व दिल्ली में मीडिया सेल वर्जन देता है। यहां भी मीडिया सेल है। अगर कोई जानकारी मिलती है, तो संबंधित जोन के डीसीपी से कार्रवाई कराई जाएगी। वहीं, जेसीपी आनंद प्रकाश तिवारी के अनुसार गांजा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के लिए टीम का गठन करके अभियान चलाया जाएगा।