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ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन सार्वजनिक करेगी कर्जदारों के नाम, देश की 2500 बैंक शाखाएं हैं शामिल
Fri, 17 Jul 2020 06:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 17 Jul 2020 06:40 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कानपुर देश में बैंक कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने जानबूझ कर कर्ज न चुकाने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक करने की घोषणा की है। एसोसिएशन ने सरकार से कार्रवाई के बाद भी अगर कर्ज नहीं चुकाने वालों के खिलाफ सख्त कानून लाने की मांग की है।
नामों की घोषणा करने को लेकर संगठन से जुड़े प्रदेश की यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री रजनीश गुप्ता ने बताया कि 19 जुलाई को राष्ट्रीयकृत दिवस के मौके पर ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के महामंत्री सी एच वेंकटाचलम कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करेंगे।
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नामों की घोषणा करने को लेकर संगठन से जुड़े प्रदेश की यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री रजनीश गुप्ता ने बताया कि 19 जुलाई को राष्ट्रीयकृत दिवस के मौके पर ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के महामंत्री सी एच वेंकटाचलम कर्जदारों के नाम सार्वजनिक करेंगे।
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पहले चरण में देश की 2500 बैंक शाखाओं के ऐसे कर्जदारों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन पर पांच करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। ऐसे लोगों पर करीब एक लाख तीस हजार करोड़ का कर्ज बकाया है। रजनीश ने ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के हवाले से बताया कि देश के राष्ट्रीयकृत व सरकारी बैंकों का करीब 14 लाख करोड़ रुपये कर्ज में फंसा है।
बड़े-बड़े उद्योगपति जानबूझकर यह रकम वापस नहीं कर रहे हैं। बैंकों का कर्ज कम दिखाने को विलय का खेल खेला जा रहा है। विलय के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं। एसोसिएशन ने सरकार से कई बार मांग की है कि जानबूझकर कर्ज वापस न करने वालों के नाम अखबारों में छपने चाहिए और बैंक शाखाओं के बाहर चस्पा होने चाहिए। सरकार इनसे वसूूली के लिए सख्त कानून लाए, मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
इस वजह से संगठन मजबूर होकर वह काम करेगा जो सरकार के स्तर से होना चाहिए। संगठन के इस निर्णय की सराहना बैंक कर्मचारी नेता मनोज तिवारी, अनुराग शुक्ल, अंकुर द्विवेदी, संदीप सक्सेना, नितिन शर्मा, रोशुल सचान, जीआर तिवारी, राजेश गुप्ता, धर्मराज पांडेय, एसके शुक्ला, वीके निगम, सुधीर शर्मा व सुधीर सोनकर ने की है।
बड़े-बड़े उद्योगपति जानबूझकर यह रकम वापस नहीं कर रहे हैं। बैंकों का कर्ज कम दिखाने को विलय का खेल खेला जा रहा है। विलय के नाम पर करोड़ों खर्च हो रहे हैं। एसोसिएशन ने सरकार से कई बार मांग की है कि जानबूझकर कर्ज वापस न करने वालों के नाम अखबारों में छपने चाहिए और बैंक शाखाओं के बाहर चस्पा होने चाहिए। सरकार इनसे वसूूली के लिए सख्त कानून लाए, मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
इस वजह से संगठन मजबूर होकर वह काम करेगा जो सरकार के स्तर से होना चाहिए। संगठन के इस निर्णय की सराहना बैंक कर्मचारी नेता मनोज तिवारी, अनुराग शुक्ल, अंकुर द्विवेदी, संदीप सक्सेना, नितिन शर्मा, रोशुल सचान, जीआर तिवारी, राजेश गुप्ता, धर्मराज पांडेय, एसके शुक्ला, वीके निगम, सुधीर शर्मा व सुधीर सोनकर ने की है।