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जिम्मेदार विभाग मौन: कानपुर में वायु प्रदूषण दिल्ली से कम पर सामान्य से छह गुना ज्यादा

Tue, 16 Nov 2021 08:52 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 16 Nov 2021 08:52 AM IST
सार

प्रदूषण कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पूर्व की भांति इस बार भी गाइडलाइन जारी की गई है।

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Air pollution in Kanpur is less than Delhi but six times more than normal
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

प्रदूषण के मामले में शहर की स्थिति दिल्ली से बेहतर है, फिर भी यहां की हवा में सामान्य से छह गुना ज्यादा जहर है। इसके बाद भी प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर महज लीपापोती की जा रही है। जिम्मेदार विभागों को शायद उस दिन का इंतजार है, जब शहर की हालत दिल्ली जैसी हो जाएगी और वे सड़कों पर पानी के छिड़काव का पाखंड करेंगे।
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प्रदूषण नियंत्रण को लेकर विभागों को दिशा-निर्देश देने के लिए हर माह होने वाली जिला प्रशासन की बैठक भी कई महीनों से नहीं हुई है। आईआईटी कानपुर की तरफ से महानगर के प्रदूषण को लेकर किए गए सर्वे में यहां पर प्रदूषण की 75 फीसदी वजह सड़कों से उठने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं है।
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यह रिपोर्ट आने के बाद सड़कों का निर्माण तेजी से करने के आदेश जारी हुए। विभागों का दावा है कि अब अधिकांश सड़कें बन गई हैं, लेकिन हवा में प्रदूषण अब भी पांच से छह गुना तक ज्यादा है। इसके बावजूद अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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पीसीबी की गाइड लाइन, फाइलों तक सीमित
प्रदूषण कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पूर्व की भांति इस बार भी गाइडलाइन जारी की गई है। इसमें रोजाना सड़कों पर पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्रियां ढंककर रखने, निर्माण कार्य वाले स्थान के आसपास पानी का छिड़काव, कूड़े के जलाने पर रोक, गड्ढों वाली सड़कों का पैच वर्क, पुराने वाहनों के संचालन पर रोक, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले धुएं पर रोक, डबल लेन वाली सड़कों के किनारे जमा होने वाली धूल की समय-समय पर सफाई, ज्यादा प्रदूषित क्षेत्रों में वाटर गन से बौछार व प्रदूषण रोकने को लेकर जागरू कता करना शामिल है।

किसने देखा... पानी की तोप चली
दो सौ वर्ग किलोमीटर के दायरे वाले महानगर के प्रदूषण को कम करने के लिए नगर निगम की तरफ से पानी की एक तोप और पानी के दो टैंकर (सड़कों पर पानी का छिड़काव करने वाले) का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम की यह व्यवस्था नाकाफी है। पानी के छिड़काव के कुछ देर बाद ही हालात फिर वैसे ही हो जाते हैं।

पांच सेंसरों की मरम्मत
स्मार्ट सिटी के तहत शहर में प्रदूषण मामपने के लिए 50 सेंसर लगाए गए हैं। इनमें से 17 सेंसर महीनों से खराब थे। सोमवार को पांच सेंसरों की मरम्मत की गई। बताया गया कि एक-दो दिन में बाकी के सेंसर भी ठीक कर दिए जाएंगे।

महानगर में प्रदूषण की स्थिति
नेहरूनगर क्षेत्र में 288
किदवईनगर क्षेत्र में 234
एनएसआई कल्याणपुर क्षेत्र में 232
आईआईटी के आसपास 317
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