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एम्स एमबीबीएस रिजल्टः बौद्ध भिक्षु का बेटा एम्स में करेगा पढ़ाई, पुष्पेश-उत्कर्ष ने मारी बाजी
Thu, 13 Jun 2019 12:44 AM IST
प्रशांत कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Thu, 13 Jun 2019 12:44 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) 2019 के बाद अब एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में भी पुष्पेश मिश्रा ने ऑल इंडिया स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। कानपुर जाजमऊ के रहने वाले पुष्पेश को इस बार 122वीं रैंक मिली है। नीट में उनकी 180वीं रैंक है। 17 साल के पुष्पेश गरीबों की सेवा करना चाहते हैं।
पुष्पेश बताते हैं कि अभी उन्होंने तय नहीं किया है कि वह एम्स की रैंक से एडमिशन लेंगे या फिर नीट से। हालांकि एम्स भोपाल में एडमिशन लेने का मन बना रहे हैं। बताते हैं कि उनका जितना मन बायोलॉजी में लगता है उतना ही तेजी से वह मैथ्स के सवाल भी हल कर लेते हैं। इसी के चलते 10वीं तक काफी कंफ्यूज थे। पुष्पेश गांव और गरीबों की मदद करना चाहते थे।
पुष्पेश ने सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंड्री स्कूल से इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी की। बोर्ड परीक्षा में उनके 96.6 प्रतिशत अंक थे, जबकि हाईस्कूल में 10 सीजीपीए अंक थे। पुष्पेश सालभर से केवल नीट की तैयारी में जुटे थे। स्कूल के बाद कोचिंग में सारा समय बीत जाता था। बताते हैं कि इस बीच वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर ही पूरा फोकस करते थे। बोर्ड परीक्षा के ठीक 15 दिन पहले अन्य विषयों पर फोकस शुरू किया। उनका सबसे पसंदीदा विषय फिजिक्स है।
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पुष्पेश के पिता सुदर्शन कुमार मिश्र लेदर टेक्नोलॉजी के इंजीनियर हैं। मां मृदुला मिश्रा गृहिणी हैं और छोटा भाई करुणेश 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। पुष्पेश पढ़ाई से समय मिलने पर शतरंज खेलना पसंद करते थे। क्रिकेट खेलना भी पसंद है लेकिन 12वीं के बाद यह छूट गया।
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पुष्पेश बताते हैं कि अभी उन्होंने तय नहीं किया है कि वह एम्स की रैंक से एडमिशन लेंगे या फिर नीट से। हालांकि एम्स भोपाल में एडमिशन लेने का मन बना रहे हैं। बताते हैं कि उनका जितना मन बायोलॉजी में लगता है उतना ही तेजी से वह मैथ्स के सवाल भी हल कर लेते हैं। इसी के चलते 10वीं तक काफी कंफ्यूज थे। पुष्पेश गांव और गरीबों की मदद करना चाहते थे।
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पुष्पेश ने सेंट जोसेफ सीनियर सेकेंड्री स्कूल से इसी साल 12वीं की पढ़ाई पूरी की। बोर्ड परीक्षा में उनके 96.6 प्रतिशत अंक थे, जबकि हाईस्कूल में 10 सीजीपीए अंक थे। पुष्पेश सालभर से केवल नीट की तैयारी में जुटे थे। स्कूल के बाद कोचिंग में सारा समय बीत जाता था। बताते हैं कि इस बीच वह फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी पर ही पूरा फोकस करते थे। बोर्ड परीक्षा के ठीक 15 दिन पहले अन्य विषयों पर फोकस शुरू किया। उनका सबसे पसंदीदा विषय फिजिक्स है।
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पुष्पेश के पिता सुदर्शन कुमार मिश्र लेदर टेक्नोलॉजी के इंजीनियर हैं। मां मृदुला मिश्रा गृहिणी हैं और छोटा भाई करुणेश 12वीं की पढ़ाई कर रहा है। पुष्पेश पढ़ाई से समय मिलने पर शतरंज खेलना पसंद करते थे। क्रिकेट खेलना भी पसंद है लेकिन 12वीं के बाद यह छूट गया।
उत्कर्ष सिंह ने हासिल की ऑल इंडिया 507वीं रैंक
कानपुर नौबस्ता बसंत विहार के उत्कर्ष सिंह ने एम्स एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया 507वीं रैंक हासिल की है। उत्कर्ष ने हाल ही में नीट 2019 में ऑल इंडिया 845 रैंक हासिल की है। उत्कर्ष के पिता डॉ. महेंद्र सिंह मनोचिकित्सक और मां अंजू सिंह शिक्षिका हैं। उत्कर्ष बताते हैं कि वह एमबीबीएस करके गरीब लोगों का इलाज करेंगे।
उत्कर्ष ने 2018 में पूर्णचंद्र विद्यानिकेतन इंटर कॉलेज से 92.6 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की है। 10वीं में मर्सी मेमोरियल स्कूल से 94.6 प्रतिशत अंक पाए थे। उत्कर्ष कहते हैं कि हमेशा एकाग्रता से पढ़ाई करनी चाहिए, तभी सफलता मिलती है। उत्कर्ष को बचपन से ही बायोलॉजी पढ़ने में मन लगता था, इसलिए वह डॉक्टर बनना चाहते हैं।
बास्केटबॉल और कला में भी माहिर
उत्कर्ष बास्केटबॉल और बैडमिंटन खेलने में भी माहिर हैं। कहते हैं कि पढ़ाई से फुर्सत मिलने पर वह इन खेलों को जरूर समय देते हैं। इसके अलावा उन्हें पेंटिंग करने का भी शौक है। उत्कर्ष रंग और ब्रश से खेलना जानते हैं।
उत्कर्ष ने 2018 में पूर्णचंद्र विद्यानिकेतन इंटर कॉलेज से 92.6 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की है। 10वीं में मर्सी मेमोरियल स्कूल से 94.6 प्रतिशत अंक पाए थे। उत्कर्ष कहते हैं कि हमेशा एकाग्रता से पढ़ाई करनी चाहिए, तभी सफलता मिलती है। उत्कर्ष को बचपन से ही बायोलॉजी पढ़ने में मन लगता था, इसलिए वह डॉक्टर बनना चाहते हैं।
बास्केटबॉल और कला में भी माहिर
उत्कर्ष बास्केटबॉल और बैडमिंटन खेलने में भी माहिर हैं। कहते हैं कि पढ़ाई से फुर्सत मिलने पर वह इन खेलों को जरूर समय देते हैं। इसके अलावा उन्हें पेंटिंग करने का भी शौक है। उत्कर्ष रंग और ब्रश से खेलना जानते हैं।
बौद्ध भिक्षु का बेटा एम्स में करेगा पढ़ाई
एम्स एमबीबीएस में ऑल इंडिया 215 और ओबीसी वर्ग में 30वीं रैंक हासिल करने वाले अंकित कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा। पिता अपना परिवार छोड़ बौद्ध भिक्षु बन गए। इसके बावजूद अंकित ने सफलता का नया मार्ग गढ़ लिया। काकादेव में रहकर पढ़ाई करने वाले अंकित के पिता राम सिंह 12 साल पहले सबकुछ छोड़कर बौद्ध भिक्षु बन चुके हैं। परिवार फर्रुखाबाद में रहता है। मां सुहागश्री गृहिणी हैं।
अंकित बताते हैं कि पिता के भिक्षु बनने के बाद बड़े भाई राजीव ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। खेती करके सबको पढ़ाया और खुद भी पढ़ाई पूरी की। अब वह एसएससी क्वालीफाई करके आयकर विभाग में नौकरी कर रहे हैं। बड़े भाई ने मुझे पढ़ाई के लिए कानपुर भेज दिया। अंकित बताते हैं कि वह डॉक्टर बनकर अपने गांव के लोगों की मदद करना चाहते हैं। गांव में अभी भी लोग इलाज न मिलने के चलते मर जाते हैं। इनकी कोई गिनती नहीं होती।
कानपुर कल्याणपुर की रहने वाली दिव्यांशी ने एम्स एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में एससी कैटेगिरी में ऑल इंडिया 77वीं रैंक हासिल की है। जनरल कैटेगिरी में पांच हजार रैंक पाई है। पिता विजय शंकर इंटरनेट कैफे चलाते हैं और मां राजकुमारी गृहिणी हैं। दिव्यांशी कहती हैं कि वह अब एम्स दिल्ली या फिर भोपाल से एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी।
अंकित बताते हैं कि पिता के भिक्षु बनने के बाद बड़े भाई राजीव ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। खेती करके सबको पढ़ाया और खुद भी पढ़ाई पूरी की। अब वह एसएससी क्वालीफाई करके आयकर विभाग में नौकरी कर रहे हैं। बड़े भाई ने मुझे पढ़ाई के लिए कानपुर भेज दिया। अंकित बताते हैं कि वह डॉक्टर बनकर अपने गांव के लोगों की मदद करना चाहते हैं। गांव में अभी भी लोग इलाज न मिलने के चलते मर जाते हैं। इनकी कोई गिनती नहीं होती।
कानपुर कल्याणपुर की रहने वाली दिव्यांशी ने एम्स एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में एससी कैटेगिरी में ऑल इंडिया 77वीं रैंक हासिल की है। जनरल कैटेगिरी में पांच हजार रैंक पाई है। पिता विजय शंकर इंटरनेट कैफे चलाते हैं और मां राजकुमारी गृहिणी हैं। दिव्यांशी कहती हैं कि वह अब एम्स दिल्ली या फिर भोपाल से एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी।