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Kanpur News: एआई तय करेगा किस विशेषज्ञ से कराएं इलाज
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कानपुर। हैलट में रोगियों को पर्चा बनवाते वक्त विभाग, डॉक्टर का नाम वगैरह नहीं बताना पड़ेगा। उन्हें कुछ सवालों के जवाब देने होंगे। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उन्हें पर्चा बनाकर देगा जिसमें विशेषज्ञ का नाम, कक्ष संख्या, समय वगैरह सब लिखा रहेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ऐसा एआई मॉड्यूल तैयार कर रहा है। यह व्यवस्था प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में पहली होगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि यह एआई मॉड्यूल तैयार करने में आईआआईटी, एचबीटीयू के साथ सीएसजेएमयू के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। मेडिकल अस्पतालों में ई हॉस्पिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके साथ यह मॉड्यूल भी लागू हो जाएगा। रोगियों को 10 सवालों के जवाब देने होंगे। ये रोगी की तकलीफ से संबंधित रहेंगे। इसी आधार पर एआई विशेषज्ञों का चयन कर देगा। अभी रोगी पेट का दर्द बताता है तो उसे मेडिसिन भेज दिया जाता है। फिर वहां जांच के बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी भेजा जाता है। इस चक्कर में रोगी को यहां-वहां भागना पड़ता है। इस व्यवस्था से रोगी सीधे संबंधित विशेषज्ञ के पास पहुंच जाएगा। एप की भी व्यवस्था की जा रही है। रोगी एप पर अपना समय बुक करा सकता है। ऑन लाइन पर्चा भी उसके पास पहुंच जाएगा। व्यवस्था का ट्रायल हो चुका है। इसके साथ ही ऑन लाइन पैथोलॉजिकल रिपोर्टिंग की भी व्यवस्था कर दी गई है। इसका भी ट्रायल हो गया है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि यह एआई मॉड्यूल तैयार करने में आईआआईटी, एचबीटीयू के साथ सीएसजेएमयू के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। मेडिकल अस्पतालों में ई हॉस्पिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके साथ यह मॉड्यूल भी लागू हो जाएगा। रोगियों को 10 सवालों के जवाब देने होंगे। ये रोगी की तकलीफ से संबंधित रहेंगे। इसी आधार पर एआई विशेषज्ञों का चयन कर देगा। अभी रोगी पेट का दर्द बताता है तो उसे मेडिसिन भेज दिया जाता है। फिर वहां जांच के बाद गैस्ट्रोएंटरोलॉजी भेजा जाता है। इस चक्कर में रोगी को यहां-वहां भागना पड़ता है। इस व्यवस्था से रोगी सीधे संबंधित विशेषज्ञ के पास पहुंच जाएगा। एप की भी व्यवस्था की जा रही है। रोगी एप पर अपना समय बुक करा सकता है। ऑन लाइन पर्चा भी उसके पास पहुंच जाएगा। व्यवस्था का ट्रायल हो चुका है। इसके साथ ही ऑन लाइन पैथोलॉजिकल रिपोर्टिंग की भी व्यवस्था कर दी गई है। इसका भी ट्रायल हो गया है।
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