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मनरेगा से सुधारी जाएगी भैसाया में बंगाली हिंदू परिवारों को आवंटित कृषि भूमि

Mon, 22 Nov 2021 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 12:39 AM IST
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Agricultural land allotted to Bengali Hindu families in Bhaisaya will be improved by MNREGA
कानपुर देहात के भैसाया में आवास के लिए आवंटित जमीन देखते अपर मुख्य सचिव व मौजूद अधिकारी। (संवाद) - फोटो : AKBARPUR
रसूलाबाद (कानपुर देहात)। वर्ष 1970 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) छोड़कर मेरठ के हस्तिनापुर में बसे 63 बंगाली हिंदू परिवारों को रसूलाबाद में बसाने के लिए अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास विभाग ने प्रतिनिधि मंडल के साथ रविवार को भैसाया में आवास व कृषि आवंटन के लिए चिह्नित भूमि देखी।
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कृषि आवंटन कीं ऊसर भूमि को उन्होंने मनरेगा से उपजाऊ बनाने की बात कही। आवास आवंटन का ले आउट जांचा और रास्ते पर चलकर देखा। अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास विभाग मनोज कुमार सिंह दोपहर में करीब दो बजे रसूलाबाद पहुंचे।
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यहां लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में कुछ देर रुकने के बाद भैसाया गांव के महेंद्र नगर पहुंचे। उनके साथ वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान से भारत आए विस्थापित हिंदू बंगालियों के प्रतिनिधि मंडल में शामिल अनिल विश्वास व मनोज मंडल भी मौजूद थे।
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यहां उन्होंने 63 विस्थापित हिंदू परिवारों के आवास के लिए चिह्नित भूमि देखी। डीएम जेपी सिंह ने अपर मुख्य सचिव को बताया कि भूमि के प्लाट बांट दिए गए हैं। कृषि भूमि भी चिह्नित कर दी गई है।
लोगों से रूबरू होते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुनर्वास विभाग एवं एक्ट समाप्त होने के बावजूद कैबिनेट में निर्णय लेकर हिंदू बंगाली परिवारों को पुनर्वासित करने का निर्णय लिया है।
वर्ष 1971 में मेरठ के हस्तिनापुर स्थित मदन सूत मिल में कार्यरत विस्थापित परिवार मिल के बंद हो जाने से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। लगभग साढ़े तीन सौ परिवारों को बदांयू में पुनर्वासित किया जा चुका है।

उन्हीं परिवारों में शेष 63 परिवारों ने 30 साल की लंबी लड़ाई के बाद यह अवसर पाया है। रसूलाबाद की सुरक्षित श्रेणी की 130 हेक्टेयर भूमि में से इन परिवारों को दो-दो एकड़ भूमि कृषि कार्य के लिए दी जाएगी। इस भूमि को मनरेगा के तहत उपजाऊ बनाया जाएगा।
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