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Kanpur: पान मसाला के बाद अब लोहे पर भी तीसरी आंख की नजर, देश का दूसरा ऐसा ट्रेड जिसकी निगरानी CCTV से की जाएगी

Sun, 12 Jan 2025 12:13 PM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 12 Jan 2025 12:13 PM IST
सार

Kanpur News: जानकारों का कहना है कि लोहा कारोबार के कानपुर रीजन कानपुर नगर, उन्नाव, मलवां और रनियां शामिल हैं। कारोबार में रिमझिम इस्पात की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 प्रतिशत है। इसी तरह आरएचएल की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। चार दशक पहले आरएचएल का बाजार पर दबदबा था।

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After pan masala now third eye is on iron too this is second trade in country which will be monitored by CCTV
सीसीटीवी में खड़ा ट्रक । - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पान मसाला इकाइयों के बाद लोहा इकाइयों में भी सीसीटीवी कैमरे लगने लगे हैं। देश का यह दूसरा ट्रेड है, जिसकी निगरानी सीसीटीवी कैमरे से की जाएगी। अगले सप्ताह लखनपुर स्थित कार्यालय में निगरानी कक्ष कमांड सेंटर भी बनकर तैयार होने की संभावना है। वहीं, लोहा कारोबारी और व्यापार संगठन ने एक सुर में ट्रेड विशेष की निगरानी का विरोध जताते हुए जीएसटी कानून में संशोधन करने की मांग उठाई है।

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एसजीएसटी के प्रमुख सचिव एम देवराज के निर्देश पर अफसर पहले से ही लोहा इकाइयों की निगरानी कर रहे हैं। अफसरों को 24 घंटे ई-वे बिलों के सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले साल अक्तूबर महीने से विभाग के अफसर रोस्टर के अनुसार इकाइयों के बाहर निगरानी कर रहे हैं। बीच में प्रमुख सचिव ने विभाग की ओर से इकाइयों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए विभाग के अफसरों और कारोबारियों के बीच बैठक भी हुई थी। बैठक में कारोबारियों ने कैमरे लगवाने से इन्कार कर दिया था।

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दो ट्रेडों की इकाइयों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए
मांग और मंदी के चलते उद्यमी और व्यापारी संगठन 50 प्रतिशत पर चल रहे कारोबार की निगरानी का विरोध कर रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार कारोबार में सबसे ज्यादा ई-इनवाइस जीएसटी पोर्टल से जारी होता है। ट्रकों पर रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) सिस्टम लगा होता है। ऐसे में कारोबारी कर चोरी कैसे कर सकता है। अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। अभी दो ट्रेडों की इकाइयों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। ऐसे तो आगे हर ट्रेड में ऐसा किया जा सकेगा।

ट्रकों के नंबरों को साफ-साफ देखा जा सके
वहीं, अपर आयुक्त ग्रेड-दो, एसआईबी, एसजीएसटी कुमार आनंद ने बताया कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली उन्नाव स्थित रिमझिम इस्पात की इकाई के गेट पर विभाग की ओर से सीसीटीवी कैमरा लगवा दिया गया है। इसी तरह शिखर, मधु, शुद्ध प्लस और केसर पान मसाला इकाइयों में पहले ही कैमरे लगवा दिए गए हैं। कैमरे इस तरह से लगे है, जिसमें ट्रकों के नंबरों को साफ-साफ देखा जा सके। लखनपुर स्थित कार्यालय में कमांड सेंटर बनने का काम चल रहा है। संभावना है कि अगले सप्ताह प्रकिया पूरी हो जाएगी।

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राज्य कर विभाग लगातार लोहा और इस्पात उद्योग की इकाइयों के बाहर कैमरा लगवाकर उसका नियंत्रण विभाग को देने का दबाव बना रहा है। उद्यमी इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं। यदि विभाग ऐसा करना चाहता है तो उसे अपने एक्ट में संशोधन करके इसका प्रावधान करना चाहिए। उसके बाद ही ऐसी कोई मांग करनी चाहिए।  -उमंग अग्रवाल, महासचिव फीटा और लोहा कारोबार

पहले पान मसाला और अब लोहा-इस्पात इकाइयों में सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाएगी। इसका व्यापार संगठन विरोध करता है। लोहा और इस्पात बाजार अनिश्चिता की ओर है। शहर से लोहा कारोबार पहले से ही सिमटता जा रहा है। ई-वे बिल, ई-इनवाइस जारी होने पर शासन के पास सब जानकारी होती है। कौन माल कहां जा रहा और कहां आ रहा है। ये मनमानी खत्म होनी चाहिए।  -आशीष सचान, अध्यक्ष, कानपुर उद्योग व्यापार मंडल (कंछल गुट)

मांग की समस्या से जूझ रहा कारोबार
जानकारों का कहना है कि लोहा कारोबार के कानपुर रीजन कानपुर नगर, उन्नाव, मलवां और रनियां शामिल हैं। कारोबार में रिमझिम इस्पात की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 प्रतिशत है। इसी तरह आरएचएल की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। चार दशक पहले आरएचएल का बाजार पर दबदबा था। आरएचएल को गोल्ड क्वाइन कहा जाता था। शहर का लोहा और इस्पात बाजार मौजूदा समय में मांग की समस्या से जूझ रहा है। रूस-यू्क्रेन और चीन के सस्ते माल से कारोबार आधा रह गया है। भाव कम होने के बाद भी उत्पादों की मांग नही है। प्लास्टिक और फाइबर की बढ़ती मांग के बीच कारोबार बचाना मुश्किल हो रहा है। इन सबके बीच दो ट्रेडों को लक्ष्य करके निगरानी कराना ठीक नही है। इससे कारोबारियों में भय बढ़ेगा।

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