फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Advocates who raised slogans of Ekta Zindabad became bitter enemies

Kanpur News: अधिवक्ता एकता जिंदाबाद के नारे लगाने वाले बने कट्टर दुश्मन

Wed, 18 Feb 2026 02:08 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 02:08 AM IST
विज्ञापन
Advocates who raised slogans of Ekta Zindabad became bitter enemies
कानपुर। चुनाव में अधिवक्ता एकता जिंदाबाद के नारे लगाने वाले अधिवक्ता गुटों में बंटकर एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए हैं। अधिवक्ताओं के जेल जाने का सिलसिला चल रहा है। गुटबाजी इतनी हावी है कि एक गुट किसी पीड़ित को लेकर पुलिस कमिश्नर के यहां दूसरे गुट के अधिवक्ता की शिकायत करने पहुंच रहा है। इसकी जानकारी मिलते ही दूसरे दिन दूसरे गुट के अधिवक्ता शिकायत करने वाले के खिलाफ ही सबूतों का पुलिंदा लेकर उसे झूठा और अपराधी बताने में जुट रहे हैं।
विज्ञापन


बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह की शिकायत पर अधिवक्ता आशीष शुक्ला के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई। इस रिपोर्ट को दर्ज कराने में बार एसोसिएशन की निवर्तमान कार्यकारिणी के अध्यक्ष इंदीवर वाजपेई ने मुहर लगाई थी। इसके बाद यह सिलसिला चल निकला। आशीष ने अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा का गठन कर उसमें संदीप शुक्ला, सौरभ भदौरिया, नरेश मिश्रा, मनोज सिंह जैसे अधिवक्ताओं को जोड़ा। खुलकर अखिलेश दुबे के खिलाफ सामने आए। अखिलेश को जेल भिजवाने और जमानतें निरस्त कराने के लिए पैरवी में जुटे दिखाई दिए। अरिदमन ने जहां आशीष की कुंडली पुलिस को दी वहीं आशीष ने पिंटू सेंगर हत्याकांड की दबी जांच को दोबारा खुलवाकर उसमें अरिदमन सिंह को जेल भिजवा दिया। इसी के साथ दीनू उपाध्याय का भी नाम सामने आया और उसके जेल जाने के साथ ही कई अधिवक्ताओं को जेल जाना पड़ा।
विज्ञापन

इधर अखिलेश दुबे मुक्ति मोर्चा के नाम पर बयानबाजी कर रहे आशीष शुक्ला को भी आखिर फर्जी डिग्री मामले में जेल की हवा खानी पड़ रही है। कचहरी का एक गुट दीनू उपाध्याय को जेल भिजवाने में बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री राकेश तिवारी का हाथ मान रहा था। इसके चलते मौका मिलते ही दीनू गुट के अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता राजाराम वर्मा हत्याकांड में राकेश तिवारी का नाम सामने लाकर जांच खुलवा दी। राकेश तिवारी पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। पिछले दिनों करीब नौ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद राकेश को पुलिस ने हिरासत से छोड़ तो दिया लेकिन अब तक क्लीन चिट नहीं दी। थाने में जुटी भीड़ जहां राकेश की रिहाई की मांग कर रही थी। वहीं, अधिवक्ता गोपाल चौहान द्वारा पहुंचकर राजाराम के हत्यारों को फांसी दो के नारे लगाए जाने से गुटबाजी खुलकर सामने भी आ गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन







केस -1

कोतवाली में अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें अखिलेश व पप्पू स्मार्ट समेत 10 नामजद थे। इसमें पप्पू स्मार्ट के गिरोह के लोगों के साथ मिलकर अखिलेश दुबे द्वारा उन्हें पॉक्सो के झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया गया है। अखिलेश अब तक जेल में ही बंद है।



केस -2

बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने कोतवाली में अधिवक्ता आशीष शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें इंटर की फर्जी मार्कशीट के आधार पर स्नातक और विधि स्नातक की डिग्री हासिल कर आशीष पर वकालत करने का आरोप लगाया गया था। इसमें आशीष को जेल जाना पड़ा और अब तक जेल में ही बंद है।

------------------------------

अधिवक्ताओं में भले ही कोई गुटबाजी जैसी कोई बात हो लेकिन पुलिस अपना कार्य कर रही है। किसी भी तरह की शिकायत को पहले तथ्यों के आधार पर जांचा जा रहा है और फिर कार्रवाई हो रही है।
- रघुबीर लाल, पुलिस कमिश्नर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed