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Kanpur News: विजयादशमी पर उच्च गुरु, श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग
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कानपुर। विजयादशमी पर मंगलवार को इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। उच्च बृहस्पति, श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त का यह संयोग असाधारण माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य प्रीति पवन तिवारी के अनुसार 20 अक्तूबर को सुबह नवमी तिथि रहेगी और दशमी तिथि दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी। ऐसे में विजयादशमी की पूजा दोपहर बाद करना उचित होगा। उन्होंने बताया कि शुक्ल पक्ष की दशमी धर्म और विजय का प्रतीक है। इस दिन सूर्य का बल, चंद्रमा की वृद्धि और अपराह्न काल का संयोग शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी कारण विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त का पर्व भी कहा जाता है।
उन्होंने बताया कि विजय मुहूर्त 2:19 बजे से 3:06 बजे तक रहेगा। इस दिन व्यापार, यात्रा, शिक्षा, गृह प्रवेश, नया निवेश और नौकरी की शुरुआत जैसे कार्य सफल माने जाते हैं। इस बार विजयादशमी मंगलवार को होने के कारण मंगल से जुड़ी ऊर्जा को साहस और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक माना जा रहा है। उच्च गुरु का संयोग ज्ञान और शुभता से, जबकि श्रवण नक्षत्र सीखने और ज्ञान ग्रहण करने से जुड़ा है। विजयादशमी पर शस्त्रों के साथ हल, कृषि उपकरण, मशीनों और पुस्तकों का पूजन भी करना चाहिए।
विजयादशमी पर करें यह
मेष: साहसिक निर्णय लें।
वृषभ: संपत्ति विवाद के समाधान के लिए शमी पूजन करें।
मिथुन: व्यापारिक उपकरणों का पूजन करें।
कर्क: ज्ञान और वाणी के क्षेत्र में संकल्प लें।
सिंह: अपराजिता पूजन और पितृ-स्मरण करें।
कन्या: ध्यान-साधना शुरू करें।
तुला: नए उद्यम का संकल्प लें।
वृश्चिक: कॅरिअर से जुड़े निर्णय लें।
धनु: उच्च शिक्षा या तीर्थयात्रा की शुरुआत करें।
मकर: पितरों का स्मरण करें।
कुंभ: राहु शांति के उपाय करें।
मीन: शमी पूजन करें।
विजयादशमी के प्रमुख मुहूर्त
दशमी तिथि : 20 अक्तूबर को दोपहर 12:50 बजे से प्रारंभ होकर 21 अक्तूबर दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी।
विजय मुहूर्त : मंगलवार की दोपहर 1:47 से 2:33 बजे तक।
अपराह्न पूजा मुहूर्त : दोपहर 1:02 से 3:19 बजे तक।
दशहरा से जुड़ी परंपराएं
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के दहन के बाद पान खाना शुभ परंपरा मानी जाती है। विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को भी शुभ माना जाता है। शमी वृक्ष का दर्शन और पूजन करने की परंपरा है।
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उन्होंने बताया कि विजय मुहूर्त 2:19 बजे से 3:06 बजे तक रहेगा। इस दिन व्यापार, यात्रा, शिक्षा, गृह प्रवेश, नया निवेश और नौकरी की शुरुआत जैसे कार्य सफल माने जाते हैं। इस बार विजयादशमी मंगलवार को होने के कारण मंगल से जुड़ी ऊर्जा को साहस और शत्रुओं पर विजय का प्रतीक माना जा रहा है। उच्च गुरु का संयोग ज्ञान और शुभता से, जबकि श्रवण नक्षत्र सीखने और ज्ञान ग्रहण करने से जुड़ा है। विजयादशमी पर शस्त्रों के साथ हल, कृषि उपकरण, मशीनों और पुस्तकों का पूजन भी करना चाहिए।
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विजयादशमी पर करें यह
मेष: साहसिक निर्णय लें।
वृषभ: संपत्ति विवाद के समाधान के लिए शमी पूजन करें।
मिथुन: व्यापारिक उपकरणों का पूजन करें।
कर्क: ज्ञान और वाणी के क्षेत्र में संकल्प लें।
सिंह: अपराजिता पूजन और पितृ-स्मरण करें।
कन्या: ध्यान-साधना शुरू करें।
तुला: नए उद्यम का संकल्प लें।
वृश्चिक: कॅरिअर से जुड़े निर्णय लें।
धनु: उच्च शिक्षा या तीर्थयात्रा की शुरुआत करें।
मकर: पितरों का स्मरण करें।
कुंभ: राहु शांति के उपाय करें।
मीन: शमी पूजन करें।
विजयादशमी के प्रमुख मुहूर्त
दशमी तिथि : 20 अक्तूबर को दोपहर 12:50 बजे से प्रारंभ होकर 21 अक्तूबर दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी।
विजय मुहूर्त : मंगलवार की दोपहर 1:47 से 2:33 बजे तक।
अपराह्न पूजा मुहूर्त : दोपहर 1:02 से 3:19 बजे तक।
दशहरा से जुड़ी परंपराएं
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के दहन के बाद पान खाना शुभ परंपरा मानी जाती है। विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को भी शुभ माना जाता है। शमी वृक्ष का दर्शन और पूजन करने की परंपरा है।
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