आपके घी, लिपस्टिक में जानवर की चर्बी तो नहीं!

Kanpur Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। जो देशी घी, पेटीज, जीरा बिस्कुट, टोस्ट, दालमोठ आप खा रहे हैं और जिस लिपस्टिक, क्रीम का इस्तेमाल कर रहे हैं, कहीं उसमें जानवर की चर्बी तो नहीं है? जाजमऊ में गंगा किनारे जानवरों की खाल से बनाई जा रही चर्बी का इस्तेमाल इनमें होने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार कम लागत में ज्यादा कमाई के चक्कर में बेकरी संचालक भी इसी चर्बी का इस्तेमाल कर रहे हैं। जाजमऊ में गंगा के किनारे पुलिस की मिलीभगत से भट्ठियां लगाकर जानवरों की खाल की छीलन से अवैध रूप से चर्बी बनाई जा रही है। ठंडी होने के बाद यह चर्बी दानेदार घी की तरह प्रतीत होती है।
यहां खपाई जा रही है चर्बी
देशी घी, रिफाइंड, पेटीज समेत कई बेकरी प्रोडक्ट, लिपस्टिक, क्रीम, साबुन आदि।

ऐसे तैयार करते हैं मिलावटी देशी घी
सूत्रों के अनुसार जानवरों की खाल से बनाई जा रही चर्बी में ऐसा एसेंस मिलाया जाता है, जिससे इसमें देशी घी की तरह खुशबू आने लगती है। एक किलो चर्बी में चंद बूंद एसेंस मिलाया जाता है। इस प्रकार तैयार मिलावटी देशी घी को विभिन्न नामों से पैक कर बाजार में शुद्ध देशी घी के नाम पर बेचा जा रहा है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि कुछ ब्रांडेड कंपनियों के नाम से भी इसे अवैध रूप से पैक कर बेचा जा रहा है।

चोखा धंधा
असली एक किलो देशी घी तैयार करने में ढाई सौ से तीन सौ लागत आती है, वहीं धंधेबाज चर्बी से एक किलो नकली या मिलावटी देशी घी 40 - 50 रुपए में ही तैयार कर लेते हैं। इस धंधे में लिप्त कुछ लोग असली देशी घी में चर्बी मिलाकर असली के नाम पर ही बेच रहे हैं।

पेटीज का खेल
बेकरी में यदि ब्रांडेड घी, मैदा, सब्जी मसाला आदि मिलाकर पेटीज तैयार की जाए तो इसकी लागत लगभग 4 रुपए प्रति पीस आती है। जबकि बड़े पैमाने पर पेटीज तैयार करने वाले इसे सेल्समैनों को तीन - साढ़े तीन रुपए में बेचते हैं और वे इसे लगभग 4 रुपए में दुकानदारों को सप्लाई करते हैं। ब्रांडेड कंपनी के रिफाइंड 85 -87 और वनस्पति घी 70 से 75 रुपए प्रति किलो हैं। जबकि अवैध धंधेबाज जानवरों की खाल से तैयार चर्बी 35 से 40 रुपए प्रति किलो की दर से बेच रहे हैं। ज्यादा मुनाफे के चक्कर में तमाम बेकरी संचालक घी की जगह चर्बी इस्तेमाल कर रहे हैं। एक बेकरी संचालक ने बताया कि यदि वह सारा असली सामान डालेगा तो कमाएगा क्या? पेट्रीज चार - पांच साल पहले भी जितने की बिकती थी, अब भी उतने की ही बिक रही है। इसीतरह चर्बी से घटिया जीरा बिस्कुट, टोस्ट, दालमोठ भी तैयार की जा रही है।


सस्ती लिपस्टिक से होता है संदेह
ऐेसी चर्बी का इस्तेमाल लिपस्टिक में भी हो रहा है। बाजार खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले मेलों आदि में 10 - 15 रुपए में लिपस्टिक बिकने से यह संदेह तो होता ही है।

क्रीम कहीं चेहरे की रंगत न बिगाड़ दे
मिलावटी या नकली क्रीम बनाने में भी ऐसी चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी क्रीम से चेहरे की खूबसूरती बढ़ने के बजाय झुर्रियां आने लगती है। इतना ही नहीं इस चर्बी को यदि हाथों और सिर में लगाया जाए तो बाल झड़ने लगते हैं।
जांच कराई जाएगी
औषधि अधिकारी डीआर मिश्रा का कहना है कि जाजमऊ में गंगा किनारे भट्ठियां लगाकर चर्बी तैयार करने के मामले की जांच कराई जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि इसका उपयोग किस तरह किया जा रहा है। बेकरी वाले भी यदि गलत काम कर रहे हैं तो उन पर कार्रवाई करेंगे। देशी घी के बजाय अन्य प्रकार से तैयार घी को नकली देशी घी कहते हैं। जबकि यदि चर्बी, रिफाइंड आदि मिला दिया जाए तो वह मिलावटी देशी घी हो जाता है। वहीं, कानपुर वनस्पति एंड आयल एसोसिएशन के महामंत्री मनोज कपूर का कहना है कि शहर में चर्बी से मिलावटी देशी घी बनाने की जानकारी नहीं है। हालांकि मेरठ, हापुड़, अलीगढ़, बुलंदशहर के कुछ मिलावटखोर 1200 रुपए प्रति टीन मिलने वाले घी में एसेंस मिलाकर इसे देशी घी बताते हुए 3000 रुपए प्रति टीन की दर से बेच रहे हैं। मिलावटी घी बनाने वाले डिब्बों में देशी घी या वनस्पति न लिखकर वेजीटेबिल फैट लिखते हैं, ताकि वह धरपकड़ से बचे रहें। कुछ लोग खाल की छीलन का इस्तेमाल धूप, अगरबत्ती बनाने में भी कर रहे हैं क्योंकि इसमें चिपकने की क्षमता ज्यादा होती है और जलता भी जल्दी है। इस बाबत बेकरी मालिक देवेंद्र कुमार जायसवाल का कहना है कि हम लोग पेटीज समेत अन्य बेकरी उत्पादों में चर्बी का इस्तेमाल नहीं करते। यदि कुछ बेकरी संचालक चर्बी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इसकी जानकारी नहीं है। 80 फीसदी बेकरी संचालक पाम आयल का इस्तेमाल करते है, जो रिफाइंड से 15-20 लीटर रुपये सस्ता होता है। वहीं, मैजिक ओ नेचर द सेंस के वाइस प्रेसीडेंट (मार्केटिंग) सुनीता अरोड़ा का कहना है कि चर्बी मिली लिपस्टिक से होंठ डार्क हो सकते हैं। स्किन क्रेक हो सकती है। यदि क्रीम में चर्बी मिली है तो इससे स्किन क्रेक हो सकती है। अन्य साइड इफैक्ट भी हो सकते हैं।

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