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जो दागदार, वही बना पहरेदार

Kanpur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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संतोष सिंह
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कानपुर। यूपीएसआईडीसी में बैकलॉग भर्ती घोटाले पर लीपापोती के प्रयास शुरू हो गए हैं। जो अफसर बैकलॉग भर्ती में धांधली कर नियुक्ति पाने का आरोपी है, उसे ही महत्वपूर्ण कार्मिक विभाग में दस्तावेज सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दे दी गई है। प्रभारी अधिकारी कार्मिक एवं वित्त नियंत्रक सुशील कुमार ने 9 मई को यह आदेश जारी किया है। अब आरोपी अफसर के हाथ यूपीएसआईडीसी में सभी तरह की नियुक्तियों के शैक्षिक दस्तावेज, अनुभव प्रमाण पत्र, जाति एवं आय प्रमाण पत्र रखने का काम आ गया है। ऐसे में दस्तावेजों के गायब होने या उनसे छेड़छाड़ की आशंका प्रबल हो गई है।
यूपीएसआईडीसी संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रदीप श्रीवास्तव, महामंत्री अरशद हलीम ने कहा है कि आरोपों के घेरे में आए रामेंद्र कुशवाहा को कार्मिक विभाग में तैनात करना साजिश लगता है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कद्दावर मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा के भतीजे रामेंद्र कुशवाहा को उप प्रबंधक बनाया गया है, जो स्थापना अनुभाग में तैनात हैं। बुधवार को उन्हें भी अभिलेख सुरक्षित करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महानिदेशक लेखाकार के सीनियर आडिटर ने भी रामेंद्र कुशवाहा की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। कहा है कि ओबीसी के प्रमाण पत्र का गलत लाभ लिया गया है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि भर्ती की धांधली में शामिल कई अन्य अफसरों को पहले स्थापना विभाग में रखा गया था। इससे दस्तावेजों के गायब किए जाने की आशंका बढ़ गई है।
कोट----
बैकलॉग भर्ती से जुड़े दस्तावेज जिस कमरे में रखे हैं। उसे सील कर दिया गया है। उसकी चाभी नजारत के पास है। आरोपियों को स्थापना विभाग में तैनाती का आदेश पूर्व एमडी ने दिया था।
सुशील कुमार
प्रभारी, कार्मिक



बैकलॉग भर्ती की
जांच कमिश्नर को
कानपुर। शासन ने यूपीएसआईडीसी की बैकलॉग भर्ती में हुई धांधली की जांच गुरुवार को कमिश्नर मुकुल सिंघल को सौंप दी। निगम के चेयरमैन और औद्योगिक विकास आयुक्त डॉ. अनिल गुप्ता ने बताया कि जांच रिपोर्ट दो सप्ताह में मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
यूपीएसआईडीसी के 176 पदों की बैगलॉग भर्ती में धांधली और पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा सहित बसपा सरकार के कई मंत्री, विधायक, आईएएस, पीसीएस और बसपा के कोआर्डिनेटर के सगे, संबंधियों को नौकरी देने के मामले को शासन ने गंभीरता से लिया है। चेयरमैन एवं औद्योगिक विकास आयुक्त ने गुरुवार को पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की। सभी दस्तावेज लखनऊ मंगवाए गए हैं। विशेष समिति इनकी जांच करेगी। उधर, बैकलॉग भर्ती से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने और छेड़छाड़ करने की आशंका को देखते हुए यूपीएसआईडीसी के कार्मिक विभाग का एक कमरा बुधवार देर रात सील कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रबंध निदेशक मो. इफ्तिखारुद्दीन के आदेश पर हुई। सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसके वर्मा, संयुक्त प्रबंध निदेश तपेंद्र प्रसाद, नियुक्ति प्रभारी और कई समितियों के चेयरमैनों की भूमिका संदेह के घेरे में है।
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