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शेर और उसकी डॉटर पिएगी मिनरल वॉटर
Kanpur
Updated Wed, 25 Sep 2013 05:38 AM IST
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कानपुर। चिड़ियाघर में जानवरों की गिरती सेहत को देखते हुए उन्हें आरओ ट्रीटेड पानी पिलाने का फैसला किया गया है। इसके लिए जू में आरओ प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। बुधवार से जानवरों के बाड़े में आरओ प्लांट से ट्रीट (साफ) किए हुए पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद कानपुर चिड़ियाघर देश का दूसरा ऐसा चिड़ियाघर होगा, जहां जानवरों को आरओ का पानी पीने को मिलेगा। अब तक यह सुविधा सिर्फ जूनागढ़ जू में है।
‘अमर उजाला’ ने 21 सितंबर के अंक में ‘खतरे में जंगल के राजा-रानी’ हेडिंग से जानवरों की सेहत का मुद्दा उठाया था। आईवीआरआई बरेली की रिपोर्ट के हवाले से कहा था कि जू के जानवरों के शरीर में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। बब्बर शेरनी भी इसी वजह से बीमार हुई है। जू में गंदे नाले का पानी इस समस्या की जड़ है। नाले के गंदे पानी से लेप्टो स्पाई रोसेस, पैथेजिन, हिमोजोरिक सेप्टीसीमिया जैसे बैक्टीरिया जू में आ चुके हैं। यह मामला लखनऊ तक उछला और रविवार को प्रमुख वन संरक्षक और वन सचिव ने चिड़ियाघर का दौरा किया था। उन्होंने भी जू में गिरते गंदे नाले के पानी से जानवरों की सेहत को खतरा बताया था। जू के डॉक्टर्स ने भी यह माना है कि बीते सालों में हुई बब्बर शेर के जोड़े, बाघिन के तीन शावकों, भालू, हिरण की मौत का कारण भी इन्फेक्शन ही रहा है। इसके बाद कानपुर जू प्रशासन ने जानवरों को साफ पानी पिलाने का फैसला किया है। सोमवार को जू के निदेशक ने नाले का निरीक्षण कर इसे बंद करने के उपायों की रणनीति बनाई। निदेशक के थॉमस ने कहा कि अस्पताल के पास सोमवार को 85 हजार रुपये की लागत से आरओ प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्लांट में ट्रीट किए जाने वाले पानी की सप्लाई बुधवार से पाइप लाइन के जरिये बाड़ों में शुरू दी जाएगी।
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‘अमर उजाला’ ने 21 सितंबर के अंक में ‘खतरे में जंगल के राजा-रानी’ हेडिंग से जानवरों की सेहत का मुद्दा उठाया था। आईवीआरआई बरेली की रिपोर्ट के हवाले से कहा था कि जू के जानवरों के शरीर में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। बब्बर शेरनी भी इसी वजह से बीमार हुई है। जू में गंदे नाले का पानी इस समस्या की जड़ है। नाले के गंदे पानी से लेप्टो स्पाई रोसेस, पैथेजिन, हिमोजोरिक सेप्टीसीमिया जैसे बैक्टीरिया जू में आ चुके हैं। यह मामला लखनऊ तक उछला और रविवार को प्रमुख वन संरक्षक और वन सचिव ने चिड़ियाघर का दौरा किया था। उन्होंने भी जू में गिरते गंदे नाले के पानी से जानवरों की सेहत को खतरा बताया था। जू के डॉक्टर्स ने भी यह माना है कि बीते सालों में हुई बब्बर शेर के जोड़े, बाघिन के तीन शावकों, भालू, हिरण की मौत का कारण भी इन्फेक्शन ही रहा है। इसके बाद कानपुर जू प्रशासन ने जानवरों को साफ पानी पिलाने का फैसला किया है। सोमवार को जू के निदेशक ने नाले का निरीक्षण कर इसे बंद करने के उपायों की रणनीति बनाई। निदेशक के थॉमस ने कहा कि अस्पताल के पास सोमवार को 85 हजार रुपये की लागत से आरओ प्लांट लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। प्लांट में ट्रीट किए जाने वाले पानी की सप्लाई बुधवार से पाइप लाइन के जरिये बाड़ों में शुरू दी जाएगी।
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