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जीवन रक्षक 40 यूनिट ब्लड लापरवाही में नष्ट
Kanpur
Updated Fri, 31 May 2013 05:30 AM IST
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कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में लापरवाही से ‘ओ-पाजिटिव’ ग्रुप का 40 यूनिट ब्लड खराब (ओवरड्यू) हो गया। गुरुवार को इसका पता चलते ही विभाग में हड़कंप मच गया। मामला दबाने की कोशिश में आनन- फानन में इसे नष्ट करा दिया गया।
मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में इस समय एक हजार यूनिट ब्लड का स्टॉक है। यहां सामान्यतया एक्सचेंज में ही 300 रुपये जांच शुल्क लेकर ब्लड दिया जाता है, पर विशेष परिस्थितियों में मुफ्त में भी ब्लड दिया जाता है। मुफ्त में ब्लड देने की अनुमति ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. महेंद्र सिंह देते हैं। इस ब्लड बैंक से रोजाना औसतन 60 से 70 यूनिट ब्लड दिया जाता है। पता चला है कि ‘ओ-पाजिटिव’ ब्लड 300 यूनिट है। यहां तैनात कर्मचारी मरीजों के लिए अन्य ग्रुपों के ब्लड के साथ ही रूटीन में रोजाना आने वाला ‘ओ-पाजिटिव’ ग्रुप का ब्लड देते रहे, पर रेफ्रिजरेटर में पीछे की तरफ रखे इस ग्रुप के 40 यूनिट (बोतल) ब्लड को 35 दिन से नहीं दिया गया। इस वजह से यह ब्लड ओवरड्यू (खराब) हो गया। मानकों के अनुसार कोल्डचेन में रखे ब्लड को 35 दिन के भीतर जरूरतमंद मरीजों को चढ़ा देना चाहिए। यदि कोल्डचेन में ब्लड रखे-रखे 35 दिन हो जाएं तो इसे मरीजों को नहीं चढ़ाना चाहिए, वरना इसके दुष्प्रभाव से मरीजों की जान भी जा सकती है। इसी वजह से यहां रखे 40 यूनिट ‘ओ-पाजिटिव’ ब्लड को गुरुवार को नष्ट करते हुए मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई।
‘ओ-पाजिटिव’ ग्रुप का 40 यूनिट ब्लड ओवरड्यू हो गया। इसलिए मानकों के अनुरूप इसे हाइपो में रखने के बाद हॉस्पिटल वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट ‘एमपीसीसी’ को देकर नष्ट किया गया है।
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डॉ. महेंद्र सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
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मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में इस समय एक हजार यूनिट ब्लड का स्टॉक है। यहां सामान्यतया एक्सचेंज में ही 300 रुपये जांच शुल्क लेकर ब्लड दिया जाता है, पर विशेष परिस्थितियों में मुफ्त में भी ब्लड दिया जाता है। मुफ्त में ब्लड देने की अनुमति ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. महेंद्र सिंह देते हैं। इस ब्लड बैंक से रोजाना औसतन 60 से 70 यूनिट ब्लड दिया जाता है। पता चला है कि ‘ओ-पाजिटिव’ ब्लड 300 यूनिट है। यहां तैनात कर्मचारी मरीजों के लिए अन्य ग्रुपों के ब्लड के साथ ही रूटीन में रोजाना आने वाला ‘ओ-पाजिटिव’ ग्रुप का ब्लड देते रहे, पर रेफ्रिजरेटर में पीछे की तरफ रखे इस ग्रुप के 40 यूनिट (बोतल) ब्लड को 35 दिन से नहीं दिया गया। इस वजह से यह ब्लड ओवरड्यू (खराब) हो गया। मानकों के अनुसार कोल्डचेन में रखे ब्लड को 35 दिन के भीतर जरूरतमंद मरीजों को चढ़ा देना चाहिए। यदि कोल्डचेन में ब्लड रखे-रखे 35 दिन हो जाएं तो इसे मरीजों को नहीं चढ़ाना चाहिए, वरना इसके दुष्प्रभाव से मरीजों की जान भी जा सकती है। इसी वजह से यहां रखे 40 यूनिट ‘ओ-पाजिटिव’ ब्लड को गुरुवार को नष्ट करते हुए मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई।
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‘ओ-पाजिटिव’ ग्रुप का 40 यूनिट ब्लड ओवरड्यू हो गया। इसलिए मानकों के अनुरूप इसे हाइपो में रखने के बाद हॉस्पिटल वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट ‘एमपीसीसी’ को देकर नष्ट किया गया है।
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डॉ. महेंद्र सिंह, प्रभारी, ब्लड बैंक, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज