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कानपुर: लॉकडाउन में 98 फीसदी घटे पारिवारिक कलह के मसले
Sat, 02 May 2020 08:24 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 02 May 2020 08:24 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कोरोना के चलते लॉकडाउन में शहर काजियों के दारुल कजा और मुफ्तियों की दारुल इफ्ताओं में पारिवारिक कलह के मसले 98 फीसदी घट गए हैं। लॉकडाउन के कारण दारुल इफ्ताओं से लिखित फतवे जारी नहीं किए जा रहे हैं। इमरजेंसी मसले आने पर फोन से जवाब दिए जा रहे हैं।
लोगों को शरीअत के प्रावधान बताकर लिखित जवाब लॉकडाउन के बाद दिए जाएंगे। शहर काजियों केे दारुल कजा और दारुल इफ्ता में लॉकडाउन की वजह से आने-जाने की पाबंदी है। इस वजह से मसले कम हो गए हैं। खासतौर पर पारिवारिक कलह के मसलों की गिरावट का ग्राफ शून्य के नजदीक पहुंच रहा है।
करीब दो फीसदी जो मसले आ भी रहे हैं, वे खास नहीं हैं। पारिवारिक कलह के इन मसलों के साथ बीमारी और अन्य दूसरी वजहें जुड़ी रह रही हैं। मदरसा अहसुन मदारिस कदीम, नई सड़क के प्रभारी मुफ्ती मो. हनीफ बरकाती का कहना है कि दारुल इफ्ता में बहुत कम मसले आ रहे हैं। इसी तरह दारुल कजा बांसमंडी के मुफ्ती साकिब अदीब ने कहा कि इमरजेंसी मसलों में फोन पर हो रही है। और बाद में आकर लिखित में फतवा लेने को कहा जा रहा है। यही हाल अन्य दारुल इफ्ताओं का भी है।
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लोगों को शरीअत के प्रावधान बताकर लिखित जवाब लॉकडाउन के बाद दिए जाएंगे। शहर काजियों केे दारुल कजा और दारुल इफ्ता में लॉकडाउन की वजह से आने-जाने की पाबंदी है। इस वजह से मसले कम हो गए हैं। खासतौर पर पारिवारिक कलह के मसलों की गिरावट का ग्राफ शून्य के नजदीक पहुंच रहा है।
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करीब दो फीसदी जो मसले आ भी रहे हैं, वे खास नहीं हैं। पारिवारिक कलह के इन मसलों के साथ बीमारी और अन्य दूसरी वजहें जुड़ी रह रही हैं। मदरसा अहसुन मदारिस कदीम, नई सड़क के प्रभारी मुफ्ती मो. हनीफ बरकाती का कहना है कि दारुल इफ्ता में बहुत कम मसले आ रहे हैं। इसी तरह दारुल कजा बांसमंडी के मुफ्ती साकिब अदीब ने कहा कि इमरजेंसी मसलों में फोन पर हो रही है। और बाद में आकर लिखित में फतवा लेने को कहा जा रहा है। यही हाल अन्य दारुल इफ्ताओं का भी है।
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मुफ्तियों का कहना है कि सामान्य दिनों में सबसे अधिक मसले पारिवारिक कलह के आते हैं। लेकिन इस बीच इक्का-दुक्का ही आ रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से शहर काजियों की दारुल इफ्ताओं में केस भी नहीं लग पा रहे हैं। दारुल कजा प्रभारी कहते हैं कि अब जब कोरोना की वबा (महामारी) खत्म होगी तो लोगों को सूचना दे दी जाएगी।
एक नजर मसलों की स्थिति पर
आम दिनों में आते हैं प्रतिदिन औसत 160 मसले
इस वक्त फोन पर प्रतिदिन आ रहे अधिकतम 11 मलसे
कुल मसलों में 70 फीसदी पारिवारिक कलह से जुड़े
10 फीसदी मामले प्रॉपर्टी झगड़े को लेकर
पांच फीसदी मामले शरीअत के प्रावधानों से संबंधित
पांच फीसदी मसले महिलाओं के हुकूक से जुड़े
छह फीसदी मसले खरीद-फरोख्त के
चार फीसदी में जकात, खैरात, वक्फ आदि के मामले
एक नजर मसलों की स्थिति पर
आम दिनों में आते हैं प्रतिदिन औसत 160 मसले
इस वक्त फोन पर प्रतिदिन आ रहे अधिकतम 11 मलसे
कुल मसलों में 70 फीसदी पारिवारिक कलह से जुड़े
10 फीसदी मामले प्रॉपर्टी झगड़े को लेकर
पांच फीसदी मामले शरीअत के प्रावधानों से संबंधित
पांच फीसदी मसले महिलाओं के हुकूक से जुड़े
छह फीसदी मसले खरीद-फरोख्त के
चार फीसदी में जकात, खैरात, वक्फ आदि के मामले