Civil Disobedience Movement: 94 साल पहले गांधी ने राठ से भरी थी हुंकार, क्रांतियज्ञ में कूद पड़े थे हजारों वीर
Hamirpur News: सेठ हीरालाल के प्रपौत्र अजय अग्रवाल ने बताया गांधी जी ताम्रपात्र उनके दादा जी को सौंप गए थे। गांधी जी के आह्वान पर स्वामी ब्रह्मानंद, दीवान शत्रुघ्न सिंह, बालेंदु, देवकीनंदन सुल्लेरे सहित सैकड़ों क्रांतिकारियों ने आंदोलन की बागडोर संभाली थी।
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महात्मा गांधी ने हमीरपुर में 94 साल पहले जनसभा के दौरान सविनय अवज्ञा आंदोलन की हुंकार भरी थी। उनकी एक आवाज पर हजारों लोग स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े। उस दौरान बापू को ताम्रपात्र और 1514 रुपये की थैली भेंट की गई थी। साहित्यकार डॉ. भवानीदीन ने लिखा है नवंबर 1929 को महात्मा गांधी महोबा से राठ पहुंचे।
तत्कालीन नोटिफाइड एरिया के चेयरमैन सेठ हीरालाल अग्रवाल की हवेली पर रात विश्राम किया। हवेली परिसर में बने गोल चबूतरे से क्रांतिकारियों को संबोधित किया था। उन्हें सुनने के लिए हजारों की भीड़ जुटी रही। गांधी जी ने अपने भाषण में सविनय अवज्ञा आंदोलन की हुंकार लगाते हुए क्रांतिकारियों में आजादी का जोश भरा था।
कस्बे के लोगों व सेठ हीरालाल ने महात्मा गांधी को ताम्रपात्र भेंट किया था। सेठ हीरालाल के प्रपौत्र अजय अग्रवाल ने बताया गांधी जी ताम्रपात्र उनके दादा जी को सौंप गए थे। गांधी जी के आह्वान पर स्वामी ब्रह्मानंद, दीवान शत्रुघ्न सिंह, बालेंदु, देवकीनंदन सुल्लेरे सहित सैकड़ों क्रांतिकारियों ने आंदोलन की बागडोर संभाली थी।
हवेली में जमीन पर बैठकर गांधी ने किया था भोजन
उन्होंने ने बताया कि पहली बार राठ कस्बे में महात्मा गांधी के आगमन पर क्षेत्रीय लोगों ने उन पर फूल बरसाए थे। गांधी ने हमारी हवेली में रात्रि विश्राम किया था। महात्मा गांधी ने हवेली के अंदर बरामदे में जमीन पर बैठकर सभी के साथ भोजन किया था। यह बरामदा आज भी उसी स्थिति में बना है, जबकि हवेली खंडहर में तब्दील हो गई है।
नमक सत्याग्रह आंदोलन में 372 लोग गए थे जेल
गांधी के जाते ही नमक सत्याग्रह आंदोलन का आगाज राठ कस्बे से हुआ था। पं. बैजनाथ तिवारी को कानून का उल्लंघन करने पर गिरफ्तार कर छह माह की सजा देते हुए बांदा जेल भेजा गया था। पुलिस ने आंदोलन करने वालों पर डंडे बरसाए थे। बताया कि आंदोलन में 372 लोगों को कारावास की सजा और जुर्माना भी किया गया था।
दो दिन नहीं जले थे चूल्हे
अजय अग्रवाल ने बताया उनकी चाची कृष्णा देवी का मायका हरपालपुर में है। कृष्णा देवी के पिता विश्वनाथ गांधी जी के करीबी थे। जब कृष्णा 10 साल कीं थीं तब उनके पिता का गांधी जी से मिलना जुलना था। बताया गांधी जी की हत्या पर पूरा परिवार फूट-फूट कर रोया था। उनके घर में दो दिन तक चूल्हा नहीं जला था।