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स्कूलों में स्वेटर उपभोग प्रमाणपत्र गले की फांस बना
Updated Wed, 14 Feb 2018 11:52 PM IST
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फर्रुखाबाद। परिषदीय स्कूलों में शासनादेश को ताक कर रखकर बच्चों को स्वेटरों का वितरण किया गया। शासनादेश के अनुसार शिक्षकों को स्वेटर वितरण का उपभोग प्रमाण पत्र देना होगा। प्रकरण में जांच के आदेश के बाद विभागीय अधिकारियों ने शिक्षकोें पर उपभोग प्रमाण पत्र दिए जाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक इससे बीईओ और एसएमसी में भी तनातनी बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। स्वेटर की गुणवत्ता खराब होने की शासन को शिकायत भेजी गई है। वहीं डीएम ने जांच भी बैठाई है। जांच हुई तो प्रबंध समिति और प्रधानाध्यापकों के फंसना तय हो जाएगा।
योगी सरकारी में परिषदीय स्कूलों के बच्चों को सर्दी में स्वेटर बांटे गए है। इनका वितरण विभागीय अधिकारियों ने शासनादेश को ताक पर रखकर ठेकेदारों से खरीद कर स्वेटर मंगवाए। बीईओ और एनपीआरसी के माध्यम से स्वेटर विद्यालयों में भेजे गए। स्वेटरों की गुणवत्ता जांचने में विद्यालय प्रबंध समिति की कोई मदद नहीं ली गई।
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बिना किसी कोटेशन और टेंडर प्रक्रिया पूरी हुए शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों के दबाव में बच्चों को स्वेटर बांट दिए। स्वेटरों की गुणवत्ता पर बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सवाल उठाए। शिकायतों को संज्ञान में लेकर भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने सवाल उठा दिया। उन्होंने घटिया किस्म के स्वेटर बच्चों को बांटे जाने की शासन को
शिकायत भेजी। वहीं जिलाधिकारी मोनिका रानी ने स्वेटरों की गुणवत्ता खराब मिलने की शिकायतोें पर सीडीओ को जांच सौंपी है। सांसद की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी अपना गला बचाने को शिक्षकों के पाले में मामला डालने की कवायद में लग गए। स्वेटर वितरण संबंधी प्रधानाध्यापकों से उपभोग प्रमाण पत्र लिया जाएगा।
इसमें एसएमसी अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक को संयुक्त रूप से गुणवत्ता युक्त और शासनादेश के अनुसार सभी प्रक्रिया पूरी कर स्वेटर बांटे जाने की रिपोर्ट देनी होगी। शासन से जांच आने पर स्वेटर शिक्षकों के लिए गले की फास बन जाएंगे।
शासनादेश के अनुसार बीस हजार से एक लाख तक धनराशि से जिन स्कूलों में स्वेटर बंटने थे, वहां कोटेशन लिए जाते और एक लाख या इससे अधिक धनराशि से स्वेटरों की खरीद होनी थी, वहां खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया
अपनाई जाए। प्रबंध समिति और विद्यालय के प्रधानाध्यापक को इसकी जिम्मेदारी होगी। क्रय प्रक्रिया में प्रबंध समिति अध्यक्ष, प्रधानाध्यापक, ग्राम पंचायत या नगर पंचायत और नगर पालिका की ओर से नामित सदस्य व एक अन्य अभिभावक या संरक्षक जो एसएमसी के माध्यम से नामित किया गया, वह शामिल होंगे। स्वेटर खरीद के बाद एसएमसी की बैठक बुलाकर सभी सदस्यों को दिखाया जाता और उनके हस्ताक्षर कराए जाने के बाद बांटना था।
शासनादेश में गुणवत्ता पूर्व स्वेटर बंटवाने की बीईओ को जिम्मेदार ठहराया गया है। स्वेटर बंटवाने में बीईओ की संलिप्तता होने की शिकायत की शिकायत पर रिकवरी की कार्रवाई होगी। बीईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होने का उल्लेख शासनादेश में किया गया है।
खराब स्वेटर बंटने की शिकायतों पर डीएम की अध्यक्षता में जांच की जा रही है। जांच को शीघ्र पूरा कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। अपूर्वा दुबे, सीडीओ
स्वेटर उपभोग प्रमाणपत्र गले की फांस बना
प्रमाण पत्र में स्वेटरों की खरीद, कोटेशन प्रक्रिया में शासनादेश के पालन की देनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक इससे बीईओ और एसएमसी में भी तनातनी बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। स्वेटर की गुणवत्ता खराब होने की शासन को शिकायत भेजी गई है। वहीं डीएम ने जांच भी बैठाई है। जांच हुई तो प्रबंध समिति और प्रधानाध्यापकों के फंसना तय हो जाएगा।
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योगी सरकारी में परिषदीय स्कूलों के बच्चों को सर्दी में स्वेटर बांटे गए है। इनका वितरण विभागीय अधिकारियों ने शासनादेश को ताक पर रखकर ठेकेदारों से खरीद कर स्वेटर मंगवाए। बीईओ और एनपीआरसी के माध्यम से स्वेटर विद्यालयों में भेजे गए। स्वेटरों की गुणवत्ता जांचने में विद्यालय प्रबंध समिति की कोई मदद नहीं ली गई।
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बिना किसी कोटेशन और टेंडर प्रक्रिया पूरी हुए शिक्षकों ने विभागीय अधिकारियों के दबाव में बच्चों को स्वेटर बांट दिए। स्वेटरों की गुणवत्ता पर बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सवाल उठाए। शिकायतों को संज्ञान में लेकर भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने सवाल उठा दिया। उन्होंने घटिया किस्म के स्वेटर बच्चों को बांटे जाने की शासन को
शिकायत भेजी। वहीं जिलाधिकारी मोनिका रानी ने स्वेटरों की गुणवत्ता खराब मिलने की शिकायतोें पर सीडीओ को जांच सौंपी है। सांसद की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी अपना गला बचाने को शिक्षकों के पाले में मामला डालने की कवायद में लग गए। स्वेटर वितरण संबंधी प्रधानाध्यापकों से उपभोग प्रमाण पत्र लिया जाएगा।
इसमें एसएमसी अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक को संयुक्त रूप से गुणवत्ता युक्त और शासनादेश के अनुसार सभी प्रक्रिया पूरी कर स्वेटर बांटे जाने की रिपोर्ट देनी होगी। शासन से जांच आने पर स्वेटर शिक्षकों के लिए गले की फास बन जाएंगे।
शासनादेश के अनुसार बीस हजार से एक लाख तक धनराशि से जिन स्कूलों में स्वेटर बंटने थे, वहां कोटेशन लिए जाते और एक लाख या इससे अधिक धनराशि से स्वेटरों की खरीद होनी थी, वहां खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया
अपनाई जाए। प्रबंध समिति और विद्यालय के प्रधानाध्यापक को इसकी जिम्मेदारी होगी। क्रय प्रक्रिया में प्रबंध समिति अध्यक्ष, प्रधानाध्यापक, ग्राम पंचायत या नगर पंचायत और नगर पालिका की ओर से नामित सदस्य व एक अन्य अभिभावक या संरक्षक जो एसएमसी के माध्यम से नामित किया गया, वह शामिल होंगे। स्वेटर खरीद के बाद एसएमसी की बैठक बुलाकर सभी सदस्यों को दिखाया जाता और उनके हस्ताक्षर कराए जाने के बाद बांटना था।
शासनादेश में गुणवत्ता पूर्व स्वेटर बंटवाने की बीईओ को जिम्मेदार ठहराया गया है। स्वेटर बंटवाने में बीईओ की संलिप्तता होने की शिकायत की शिकायत पर रिकवरी की कार्रवाई होगी। बीईओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होने का उल्लेख शासनादेश में किया गया है।
खराब स्वेटर बंटने की शिकायतों पर डीएम की अध्यक्षता में जांच की जा रही है। जांच को शीघ्र पूरा कर जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। अपूर्वा दुबे, सीडीओ
स्वेटर उपभोग प्रमाणपत्र गले की फांस बना
प्रमाण पत्र में स्वेटरों की खरीद, कोटेशन प्रक्रिया में शासनादेश के पालन की देनी होगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो