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डीआरएम ने शुरू कराई जांच, मचा हड़कंप
Updated Sat, 03 Feb 2018 12:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। रसूलाबाद रेलवे स्टेशन के पास इंटरसिटी ट्रेन के रेड सिग्नल पार करने की जांच शुक्रवार को डीआरएम इलाहाबाद ने शुरू करा दी है। रेलवे इंजीनियरों का मानना है कि लोको (इंजन) में तकनीकी खराबी आने, लोको चालक की लापरवाही से ऐसा होता है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही जल्द ही दोषी पर गाज गिरेगी।
दिल्ली-हावड़ा रूट पर कानपुर से इलाहाबाद जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस ने गुरुवार सुबह रेड सिग्नल पार कर दिया था। इससे करीब ढाई घंटा ट्रेनों का आवागमन बाधित रहा। मालगाड़ी का इंजन लगाकर ट्रेन को रवाना किया गया था। रेलवे यातायात प्रभारी नवीन कुमार ने बताया कि लोको कार्यालय इलाहाबाद में है। डीआरएम कार्यालय से इसकी जांच की जा रही है।
इसमें लोको सिग्नल में फाल्ट, लोको पायलट की लापरवाही, ट्रेन तेज रफ्तार में होना कोई भी वजह हो सकता है। रेलवे इंजीनियरों की मानें तो आमतौर पर रेड सिग्नल को तोड़ देना हद दर्जे का अपराध है। इसमें ज्यादातर संभावना ट्रेन की रफ्तार को लेकर हो सकता है। यह संभव है कि लोको पायलट यानी ट्रेन ड्राइवर की रफ्तार तेज रही हो, अचानक रेड सिग्नल वह नहीं देख पाया और रोकते-रोकते आगे निकल गया।
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दूसरी संभावना यह होती है कि ट्रेन ड्राइवर से यह चूक लापरवाही में हो गई हो या फिर इंजन में कोई तकनीकी खामी के चलते वह ट्रेन को रेड सिग्नल पर नहीं रोक पाया। तीसरी संभावना सिग्नल विभाग के स्तर से भी हो सकती है। यहां आमतौर पर तकनीकी दिक्कत के चलते ही होता है।
हालांकि स्थिति न्यूनतम की रहती है। पीआरओ अमित मालवीय का कहना है कि विभागीय उच्च स्तर से जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ इस बारे में निर्णय ले पाना संभव होगा।
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फतेहपुर। रसूलाबाद रेलवे स्टेशन के पास इंटरसिटी ट्रेन के रेड सिग्नल पार करने की जांच शुक्रवार को डीआरएम इलाहाबाद ने शुरू करा दी है। रेलवे इंजीनियरों का मानना है कि लोको (इंजन) में तकनीकी खराबी आने, लोको चालक की लापरवाही से ऐसा होता है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होते ही जल्द ही दोषी पर गाज गिरेगी।
दिल्ली-हावड़ा रूट पर कानपुर से इलाहाबाद जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस ने गुरुवार सुबह रेड सिग्नल पार कर दिया था। इससे करीब ढाई घंटा ट्रेनों का आवागमन बाधित रहा। मालगाड़ी का इंजन लगाकर ट्रेन को रवाना किया गया था। रेलवे यातायात प्रभारी नवीन कुमार ने बताया कि लोको कार्यालय इलाहाबाद में है। डीआरएम कार्यालय से इसकी जांच की जा रही है।
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इसमें लोको सिग्नल में फाल्ट, लोको पायलट की लापरवाही, ट्रेन तेज रफ्तार में होना कोई भी वजह हो सकता है। रेलवे इंजीनियरों की मानें तो आमतौर पर रेड सिग्नल को तोड़ देना हद दर्जे का अपराध है। इसमें ज्यादातर संभावना ट्रेन की रफ्तार को लेकर हो सकता है। यह संभव है कि लोको पायलट यानी ट्रेन ड्राइवर की रफ्तार तेज रही हो, अचानक रेड सिग्नल वह नहीं देख पाया और रोकते-रोकते आगे निकल गया।
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दूसरी संभावना यह होती है कि ट्रेन ड्राइवर से यह चूक लापरवाही में हो गई हो या फिर इंजन में कोई तकनीकी खामी के चलते वह ट्रेन को रेड सिग्नल पर नहीं रोक पाया। तीसरी संभावना सिग्नल विभाग के स्तर से भी हो सकती है। यहां आमतौर पर तकनीकी दिक्कत के चलते ही होता है।
हालांकि स्थिति न्यूनतम की रहती है। पीआरओ अमित मालवीय का कहना है कि विभागीय उच्च स्तर से जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के बाद ही कुछ इस बारे में निर्णय ले पाना संभव होगा।