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देश में 75 हजार अल्ट्रासाउंड मशीनें अवैध
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 01 Dec 2015 02:35 AM IST
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देश में अब तक एक लाख अल्ट्रासाउंड मशीनें बिक चुकी हैं लेकिन पंजीकरण सिर्फ 25 का ही है। मतलब 75 हजार मशीनें अवैध रूप से संचालित हैं। यह कहना है फाग्सी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा का।
डॉ. मल्होत्रा फाग्सी (फेडरेशन ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया) और कानपुर आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी (कोग्स) सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी व 27वीं राज्य कांफ्रेंस (यूपीकोग) के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि प्रशासन के अफसर सिर्फ पंजीकृत सेंटरों पर छापे मारते हैं और थोड़ी सी कमी मिलने पर मशीन को सील कर देते हैं। वहीं, अवैध रूप से सेंटर चलाने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। उन्होंने कहा कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
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बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट में भी कई खामियां हैं। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एक रिव्यू कमेटी गठित कर दी है। फाइव डी कलर डाप्लर अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भस्थ शिशु के अंदर की भी जांच आसानी से हो सकती है।
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डॉ. मल्होत्रा फाग्सी (फेडरेशन ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया) और कानपुर आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी (कोग्स) सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी व 27वीं राज्य कांफ्रेंस (यूपीकोग) के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
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डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि प्रशासन के अफसर सिर्फ पंजीकृत सेंटरों पर छापे मारते हैं और थोड़ी सी कमी मिलने पर मशीन को सील कर देते हैं। वहीं, अवैध रूप से सेंटर चलाने वालों पर शिकंजा नहीं कसा जा पा रहा है। उन्होंने कहा कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
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बताया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट में भी कई खामियां हैं। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एक रिव्यू कमेटी गठित कर दी है। फाइव डी कलर डाप्लर अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भस्थ शिशु के अंदर की भी जांच आसानी से हो सकती है।