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टेनरियों के उत्पादन में 75 प्रतिशत कटौती की तैयारी, दूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में हुआ मंथन
Sat, 08 Jun 2019 10:52 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 08 Jun 2019 10:52 PM IST
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टेनरियों के लिए नई गाइड लाइन में जो बात सामने आई है, उसके मुताबिक टेनरियों में उत्पादन की मात्रा अब 25 प्रतिशत तक करने की तैयारी है। मतलब टेनरियां अभी तक जितना भी उत्पादन कर रहीं थीं, उसका 25 प्रतिशत ही उत्पादन कर सकेंगी। यह नियम कानपुर के जाजमऊ, उन्नाव और बंथर की सभी टेनरियों पर लागू होगा। दरअसल बोर्ड का मानना है कि टेनरियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी में कमी आएगी तो गंगा की स्थिति में सुधार आएगा।
उत्पादन में 75 फीसदी कटौती का यह आदेश पहले उन्नाव और बंथर में संचालित टेनरियों के लिए आया था। उसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की पहल पर इस पर रोक लगा दी गई थी। कहा गया था कि सिर्फ उन्हीं टेनरियों का उत्पादन 25 प्रतिशत किया जाए, जो डिफाल्टर हैं या जो नियमों के अनुरूप नहीं चल रही हैं।
एक दिन पहले लखनऊ में हुई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में इस पर मंथन हुआ कि अभी तक टेनरियों की तरफ से प्रदूषित पानी को लेकर जो भी परेशानी आ रही है, वह निर्धारित मात्रा से ज्यादा केमिकल युक्त पानी प्रयोग करने की वजह से है। बोर्ड की मंशा है कि यदि इस पानी की मात्रा को कम कर दिया जाए तो स्थिति में काफी सुधार आ जाएगा। इसके अलावा टेनरियों के व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांट (पीटीपी) की स्थिति में सुधार के लिए कड़े नियम भी लाने की योजना पर काम हो रहा है। बोर्ड की बैठक लखनऊ में शनिवार को भी जारी रही।
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जाजमऊ क्षेत्र में स्थापित टेनरियों के लिए अलग से बनाए जाने वाले सीईटीपी (कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण की अवधि अगले महीने 13 जुलाई को पूरी हो रही है। अभी तक सीईटीपी का निर्माण ही नहीं शुरू हो पाया। टेंडर में यह प्लांट चेन्नई की एक कंपनी को मिला है। निर्माण टेनरी संचालकों की देखरेख में होना है। स्माल टेनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि एनजीटी में अनुरोध पत्र देकर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की जाएगी। एनजीटी ने 13 जुलाई 2017 को टेनरियों के लिए नए सीईटीपी का निर्माण करने का आदेश जारी किया था। इसके लिए केंद्र सरकार से 600 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है।
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उत्पादन में 75 फीसदी कटौती का यह आदेश पहले उन्नाव और बंथर में संचालित टेनरियों के लिए आया था। उसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की पहल पर इस पर रोक लगा दी गई थी। कहा गया था कि सिर्फ उन्हीं टेनरियों का उत्पादन 25 प्रतिशत किया जाए, जो डिफाल्टर हैं या जो नियमों के अनुरूप नहीं चल रही हैं।
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एक दिन पहले लखनऊ में हुई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में इस पर मंथन हुआ कि अभी तक टेनरियों की तरफ से प्रदूषित पानी को लेकर जो भी परेशानी आ रही है, वह निर्धारित मात्रा से ज्यादा केमिकल युक्त पानी प्रयोग करने की वजह से है। बोर्ड की मंशा है कि यदि इस पानी की मात्रा को कम कर दिया जाए तो स्थिति में काफी सुधार आ जाएगा। इसके अलावा टेनरियों के व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांट (पीटीपी) की स्थिति में सुधार के लिए कड़े नियम भी लाने की योजना पर काम हो रहा है। बोर्ड की बैठक लखनऊ में शनिवार को भी जारी रही।
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जाजमऊ क्षेत्र में स्थापित टेनरियों के लिए अलग से बनाए जाने वाले सीईटीपी (कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण की अवधि अगले महीने 13 जुलाई को पूरी हो रही है। अभी तक सीईटीपी का निर्माण ही नहीं शुरू हो पाया। टेंडर में यह प्लांट चेन्नई की एक कंपनी को मिला है। निर्माण टेनरी संचालकों की देखरेख में होना है। स्माल टेनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि एनजीटी में अनुरोध पत्र देकर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की जाएगी। एनजीटी ने 13 जुलाई 2017 को टेनरियों के लिए नए सीईटीपी का निर्माण करने का आदेश जारी किया था। इसके लिए केंद्र सरकार से 600 करोड़ की राशि भी स्वीकृत हो चुकी है।