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जिला अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में दवाएं नहीं
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:31 AM IST
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उन्नाव। जिला अस्पताल का मनोरोग विभाग जरूरी दवाओं की कमी से जूझ रहा है। डाक्टर पर्ची पर दवाएं तो लिख देता है लेकिन काउंटर पर वह दवाएं नहीं मिल रही। अस्पताल में दवाओं का टोटा तब बना हुआ है जब विभाग के पास दवाओं की खरीद के लिए पर्याप्त बजट भी है।
मानसिक रोगियों के बेहतर इलाज व काउंसलिंग के लिए दो वर्ष पूर्व अस्पताल में मानसिक रोग विभाग का गठन हुआ था। मौजूदा समय में 40 से 50 मरीज रोज मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हालांकि इन मरीजों का दर्द विभाग दूर नहीं कर पा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अस्पताल में दवाओं का टोटा है। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में मिर्गी, डिप्रेशन, स्क्रिजोफेनिया व नींद के मरीज अधिक संख्या में आते हैं। इन मरीजों को डाक्टर दवाओं की कमी होने से सिर्फ सलाह दे रहे हैं। मरीज अस्पताल के स्थान पर बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। सीएमएस डा. एम लाल ने बताया कि दवाओं के लिए बजट है। दवाओं का आर्डर भी भेजा गया लेकिन आपूर्ति नहीं हुई है।
बाजार से खरीद की नहीं मिल रही अनुमति
मनोरोग विभाग में दवाओं की कमी से अधिकारी अंजान नहीं हैं। हालांकि वह बाजार से दवाओं की खरीद की अनुमति नहीं दे रहे हैं। नियमों के तहत दवाओं की कमी होने पर एक लाख रुपये तक की दवाएं खरीदी जा सकती हैं। हालांकि न ही सीएमएस और न ही सीएमओ दवा खरीद की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
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छह माह पहले भेजा गया था आर्डर
मानसिक रोग विभाग की ओर से दवाओं की आपूर्ति के लिए छह माह पूर्व दो आर्डर भेजे गए थे। हालांकि अब तक एक भी आर्डर पर दवाओं की आपूर्ति नहीं हुई। विभाग के कर्मियों के अनुसार उनके पास जो भी दवाएं हैं वह मरीजों को बांट रहे हैं। प्रमुख दवाओं का स्टाक एक माह पहले खत्म हो गया था।
- डाक्टर मरीजों को दे रहे सिर्फ सुझाव, मिर्गी, नींद, डिप्रेशन के मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं
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मानसिक रोगियों के बेहतर इलाज व काउंसलिंग के लिए दो वर्ष पूर्व अस्पताल में मानसिक रोग विभाग का गठन हुआ था। मौजूदा समय में 40 से 50 मरीज रोज मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हालांकि इन मरीजों का दर्द विभाग दूर नहीं कर पा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अस्पताल में दवाओं का टोटा है। मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में मिर्गी, डिप्रेशन, स्क्रिजोफेनिया व नींद के मरीज अधिक संख्या में आते हैं। इन मरीजों को डाक्टर दवाओं की कमी होने से सिर्फ सलाह दे रहे हैं। मरीज अस्पताल के स्थान पर बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। सीएमएस डा. एम लाल ने बताया कि दवाओं के लिए बजट है। दवाओं का आर्डर भी भेजा गया लेकिन आपूर्ति नहीं हुई है।
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बाजार से खरीद की नहीं मिल रही अनुमति
मनोरोग विभाग में दवाओं की कमी से अधिकारी अंजान नहीं हैं। हालांकि वह बाजार से दवाओं की खरीद की अनुमति नहीं दे रहे हैं। नियमों के तहत दवाओं की कमी होने पर एक लाख रुपये तक की दवाएं खरीदी जा सकती हैं। हालांकि न ही सीएमएस और न ही सीएमओ दवा खरीद की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
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छह माह पहले भेजा गया था आर्डर
मानसिक रोग विभाग की ओर से दवाओं की आपूर्ति के लिए छह माह पूर्व दो आर्डर भेजे गए थे। हालांकि अब तक एक भी आर्डर पर दवाओं की आपूर्ति नहीं हुई। विभाग के कर्मियों के अनुसार उनके पास जो भी दवाएं हैं वह मरीजों को बांट रहे हैं। प्रमुख दवाओं का स्टाक एक माह पहले खत्म हो गया था।
- डाक्टर मरीजों को दे रहे सिर्फ सुझाव, मिर्गी, नींद, डिप्रेशन के मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं