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घाटमपुर में कहीं झमाझम तो कहीं पर हल्की बारिश
Updated Fri, 27 Jul 2018 01:52 AM IST
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घाटमपुर (कानपुर )। जुलाई के अंतिम सप्ताह में मानसून मेहरबान हुआ। बुधवार की शाम जहां इलाके के कई गांवों-कसबों में झमाझम बारिश होने से जलभराव हो गया। वहीं, घाटमपुर और आसपास के इलाके में हल्की बारिश ने लोगों को उमस और गर्मी से निजात दिलाई। बारिश का क्रम गुरुवार को भी जारी रहा। किसानों ने बताया कि इस मौसम में पहली बार ठीकठाक बारिश हुई है जिससे खरीफ की फसलों की बुआई करने में आसानी होगी।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक केके दुबे ने बताया कि बारिश के विलंब से खरीफ की फसलों की बुआई का काम ठप सा पड़ा था। लेकिन, बुधवार और गुरुवार को हुई बारिश से फसलें बोने के लिए खेतों में उपयुक्त नमी हो गई है। बताया कि किसान अभी ज्वार, बाजरा, तिली-उड़द, मक्का और मूंग की फसलों की बुआई कर सकते हैं।
भीतरगांव प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार की शाम से हुई बारिश का क्रम रुक-रुककर रातभर जारी रहा, जिससे कसबे के पास स्थित कुम्हऊपुर गांव का संकरा नाला उफना गया। जिससे उसके पास बना राजासिंह का पशुबाड़ा जलमग्न हो जाने से जमींदोज हो गया। संयोग से बाड़े में मवेशी नहीं थे। जबकि, पानी भर जाने से उसके भीतर भरा भूसा-चारा और अन्य सामान बर्बाद हो गया।
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सजेती प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार की देर शाम से शुरू हुई बारिश का क्रम लगातार जारी रहने से सजेती, बरीपाल, रामपुर, टिकवांपुर, हमिरामऊ, अनूपुर मोड़, कोरियां, बीबीपुर, बावन और सांखाहारी सहित कई गांवों में जलभराव हो जाने से लोगों को परेशानी हुई।
पतारा प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को हुई रिमझिम बारिश से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने बताया कि अबतक ठीकठाक बारिश न होने से खेत सूखे पड़े थे। जिससे खरीफ की फसलें नहीं बोई जा सकी थीं। किसानों ने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश से ज्वार-बाजरा, तिली-उड़द, मूंग और मक्का के साथ ही खरीफ की अन्य फसलें बोने में आसानी होगी। जबकि, धान बेल्ट के किसानों ने बताया कि जलभराव वाले खेतों में वह खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई भी कर रहे हैं।
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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक केके दुबे ने बताया कि बारिश के विलंब से खरीफ की फसलों की बुआई का काम ठप सा पड़ा था। लेकिन, बुधवार और गुरुवार को हुई बारिश से फसलें बोने के लिए खेतों में उपयुक्त नमी हो गई है। बताया कि किसान अभी ज्वार, बाजरा, तिली-उड़द, मक्का और मूंग की फसलों की बुआई कर सकते हैं।
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भीतरगांव प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार की शाम से हुई बारिश का क्रम रुक-रुककर रातभर जारी रहा, जिससे कसबे के पास स्थित कुम्हऊपुर गांव का संकरा नाला उफना गया। जिससे उसके पास बना राजासिंह का पशुबाड़ा जलमग्न हो जाने से जमींदोज हो गया। संयोग से बाड़े में मवेशी नहीं थे। जबकि, पानी भर जाने से उसके भीतर भरा भूसा-चारा और अन्य सामान बर्बाद हो गया।
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सजेती प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार की देर शाम से शुरू हुई बारिश का क्रम लगातार जारी रहने से सजेती, बरीपाल, रामपुर, टिकवांपुर, हमिरामऊ, अनूपुर मोड़, कोरियां, बीबीपुर, बावन और सांखाहारी सहित कई गांवों में जलभराव हो जाने से लोगों को परेशानी हुई।
पतारा प्रतिनिधि के अनुसार, बुधवार और गुरुवार को हुई रिमझिम बारिश से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने बताया कि अबतक ठीकठाक बारिश न होने से खेत सूखे पड़े थे। जिससे खरीफ की फसलें नहीं बोई जा सकी थीं। किसानों ने बताया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश से ज्वार-बाजरा, तिली-उड़द, मूंग और मक्का के साथ ही खरीफ की अन्य फसलें बोने में आसानी होगी। जबकि, धान बेल्ट के किसानों ने बताया कि जलभराव वाले खेतों में वह खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई भी कर रहे हैं।