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कानपुर: मासूम से दुष्कर्म में पड़ोसी को 20 साल कैद, जुर्म छिपाने के लिए खुद ही पीड़िता की मां को किया था फोन
Sat, 23 Jan 2021 01:11 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 23 Jan 2021 01:11 AM IST
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सात साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले पड़ोसी को पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश विकास गुप्ता ने 20 साल कैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की धनराशि से 20 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे। जुर्माना अदा न करने पर चार माह की कैद और भुगतनी होगी।
रसूलाबाद निवासी युवक कल्याणपुर में परिवार संग रहकर मजदूरी करता था। 20 अगस्त 2019 को वह पत्नी संग मजदूरी करने गया था। उसकी सात साल की बेटी घर पर अकेली थी। तभी पड़ोस में रहने वाले मनीष निषाद ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया।
पत्नी जब घर लौटी तो गंभीर हालत में लड़की को हॉस्पिटल ले गई। पिता ने मनीष के खिलाफ कल्याणपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने सिर्फ 18 दिन में विवेचना पूरी कर 7 सितंबर 2019 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
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एडीजीसी सुशील कुमार वर्मा व एसपीओ गंगा प्रसाद यादव ने बताया कि मनीष के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व एससीएसटी एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे। जुर्म छिपाने के लिए मनीष ने खुद ही पीड़िता की मां को फोन कर घर बुलाया था और फिर सहानुभूति जताने के लिए पीड़िता के साथ अस्पताल भी गया था लेकिन पुलिस की पूछताछ में वह फंस गया। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने मनीष को सजा सुनाई।
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रसूलाबाद निवासी युवक कल्याणपुर में परिवार संग रहकर मजदूरी करता था। 20 अगस्त 2019 को वह पत्नी संग मजदूरी करने गया था। उसकी सात साल की बेटी घर पर अकेली थी। तभी पड़ोस में रहने वाले मनीष निषाद ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया।
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पत्नी जब घर लौटी तो गंभीर हालत में लड़की को हॉस्पिटल ले गई। पिता ने मनीष के खिलाफ कल्याणपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने सिर्फ 18 दिन में विवेचना पूरी कर 7 सितंबर 2019 को आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
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एडीजीसी सुशील कुमार वर्मा व एसपीओ गंगा प्रसाद यादव ने बताया कि मनीष के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व एससीएसटी एक्ट के तहत आरोप तय किए गए थे। जुर्म छिपाने के लिए मनीष ने खुद ही पीड़िता की मां को फोन कर घर बुलाया था और फिर सहानुभूति जताने के लिए पीड़िता के साथ अस्पताल भी गया था लेकिन पुलिस की पूछताछ में वह फंस गया। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने मनीष को सजा सुनाई।