{"_id":"698a487628cc8733a9043fc2","slug":"1976-batch-students-donated-rs-1340-crore-to-iit-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1422164-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: आईआईटी को 1976 बैच के छात्रों ने दिए 13.40 करोड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: आईआईटी को 1976 बैच के छात्रों ने दिए 13.40 करोड़
विज्ञापन
आईआईटी में आयोजित स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन समारोह में संस्थान को डमी चेक साैंपते 1976 बैच के छात्
- फोटो : स्रोत : आईआईटी
कानपुर। आईआईटी कानपुर के 1976 बैच के छात्रों ने 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन समारोह आयोजित किया। इसमें देश-विदेश से आए पूर्व छात्रों ने साथियों से मिलकर यादें ताजा कीं। संस्थान को 13.40 करोड़ रुपये का सहयोग देने की घोषणा की। यह राशि शिक्षा, शोध और अन्य विकास कार्यों में उपयोग की जाएगी। बैच ने शुरुआत में 10 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, बाद में यह राशि सभी पूर्व छात्रों के सहयोग से 13.40 करोड़ तक पहुंच गई।
कार्यक्रम में पूर्व छात्रों को आईआईटी कानपुर के निदेशक, शिक्षक और वर्तमान छात्रों से बातचीत करने का अवसर मिला। उन्होंने देखा कि 50 वर्षों में संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कितनी प्रगति की है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर ने उनके जीवन को सही दिशा दी।
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि 1976 बैच का यह पुनर्मिलन केवल यादों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि संस्थान के साथ उनके मजबूत रिश्तों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का यह योगदान आने वाली पीढि़यों के छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करेगा। मुक्तेश पंत ने बताया कि 1976 बैच लंबे समय से संस्थान के विकास में योगदान करता आ रहा है। करीब 25 वर्ष पहले दिया गया एक योगदान एलवीएडी परियोजना में इस्तेमाल हुआ, जिससे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कृत्रिम हृदय संबंधित शोध को बढ़ावा मिला।
विज्ञापन
डीन प्रो. अमेय करकरे ने कहा कि आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र संस्थान की सबसे बड़ी ताकत हैं। 1976 बैच ने यह साबित किया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद भी संस्थान से जुड़ाव बना रहता है। उनका योगदान संस्थान, छात्रों और शिक्षकों के भविष्य को और मजबूत करेगा।
विज्ञापन
कार्यक्रम में पूर्व छात्रों को आईआईटी कानपुर के निदेशक, शिक्षक और वर्तमान छात्रों से बातचीत करने का अवसर मिला। उन्होंने देखा कि 50 वर्षों में संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कितनी प्रगति की है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर ने उनके जीवन को सही दिशा दी।
विज्ञापन
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि 1976 बैच का यह पुनर्मिलन केवल यादों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि संस्थान के साथ उनके मजबूत रिश्तों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों का यह योगदान आने वाली पीढि़यों के छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करेगा। मुक्तेश पंत ने बताया कि 1976 बैच लंबे समय से संस्थान के विकास में योगदान करता आ रहा है। करीब 25 वर्ष पहले दिया गया एक योगदान एलवीएडी परियोजना में इस्तेमाल हुआ, जिससे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कृत्रिम हृदय संबंधित शोध को बढ़ावा मिला।
विज्ञापन
डीन प्रो. अमेय करकरे ने कहा कि आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र संस्थान की सबसे बड़ी ताकत हैं। 1976 बैच ने यह साबित किया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद भी संस्थान से जुड़ाव बना रहता है। उनका योगदान संस्थान, छात्रों और शिक्षकों के भविष्य को और मजबूत करेगा।