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बेच डाली दान की 19 बीघा जमीन

Sat, 16 May 2015 01:20 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Sat, 16 May 2015 01:20 AM IST
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19 acres of donated land has been sold
सदर तहसील क्षेत्र के बघारा गांव (सनिगवां) की 19 बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि (भूदान की) राज्य सरकार के खाते में दर्ज होगी। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच करने के बाद तहसीलदार सदर अनिल कुमार ने यह सिफारिश एसडीएम सदर कोर्ट से की है।
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तहसीलदार ने कहा है कि भूमि को भूदान समिति के नाम दर्ज करके मामले से हाईकोर्ट को अवगत कराया जाना है। यही वजह है कि तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अमित सिंह बंसल ने भूमि खरीदने वाले स्वरूप नगर के जयंत चतुर्वेदी पुत्र विकास चतुर्वेदी, मृदुला चतुर्वेदी पत्नी विवेक चतुर्वेदी और विवेक चतुर्वेदी पुत्र स्वर्गीय ओंकार चतुर्वेदी को नोटिस दिया है। इनको सुनने के बाद एसडीएम कोर्ट फैसला सुनाएगी।
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मामले की अगली सुनवाई शनिवार (16 मई) को होनी है। तहसीलदार सदर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक  मुताबिक 5 अगस्त 1971 को बघारा गांव की गाटा संख्या 161 रकबा 28-0-0 और 188 रकबा 3-13-0 खतौनी फसली की साढ़े नौ बीघा (9 बीघा 10 बिस्वा) भूमि अंजाम सईद पुत्र मुहम्मद अहमद निवासी 88/218 कानपुर नगर को गलत ढंग से दी गई। वह गांव के निवासी नहीं थे, फिर भी भूदान समिति ने भूमि देने का प्रस्ताव पारित किया।
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अधिकार न होते हुए भी तत्कालीन नायाब तहसीलदार ने भूमि को संक्रमणीय घोषित कर दिया। बाद में (11 जुलाई 1984) यही भूमि 14/41 सिविल लाइंस निवासी अजय कुमार शुक्ला ने कौड़ियों के भाव खरीदी। पट्टे की इस भूमि का बैनामा भी हुआ। 

पावर ऑफ अटार्नी के दम पर अजय कुमार शुक्ला के पिता प्रेम कृष्ण शुक्ला ने यही भूमि मेसर्स लवकुश बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड चैंबर नंबर 7 अपर फ्लोर बेस्टकार्ट बिल्डिंग को बेची।  अब यह भूमि स्वरूप नगर के 113/197 निवासी मृदुला चतुर्वेदी और विवेक चतुर्वेदी के नाम है।

इसी तरह गाटा संख्या 161 की शेष साढ़े नौ बीघा भूमि भी बेची गई है। पहले यह भूमि परवेज फिरोज के नाम थी। उनकी मृत्यु के बाद यह भूमि जवाहर जूनियर हाईस्कूल 53बी शास्त्री नगर कानपुर के प्रबंधक प्रेम कृष्ण शुक्ला पुत्र आश्रय प्रसाद निवासी 14/41 सिविल लाइंस के नाम जरिये वसीयत दर्ज की गई।

जबकि असंक्रमणीय (पट्टे की) भूमि की वसीयत नहीं होती है। इसके बावजूद यह कृष्ण ने  भूमि बिल्डर्स, रसूखदार लोगों को बेची। इसकी प्लाटिंग भी हुई है।  इस बारे में जयंत चतुर्वेदी और विवेक चतुर्वेदी का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष मिलेगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।

बघारा की भूमि असंक्रमणीय (पट्टे) की है, जिसका बैनामा नहीं किया जा सकता है। जिन लोगों ने भूमि खरीदी या बेची, उन्होंने गलत किया है। यह सरकार की भूमि है, इसलिए इसे सरकारी खाते में डालने की सिफारिश एसडीएम कोर्ट से की गई है।


क्योंकि नेचुरल जस्टिस के नाते विपक्षी को सुना जाता है, इस कारण कोर्ट ने नोटिस जारी करके लोगों से जवाब मांगा है। अब भूमि को भूदान समिति के नाम दर्ज करके पूरी रिपोर्ट हाईकोर्ट भेजी जानी है। भूमि से संबंधित कोई भी दस्तावेज किसी के पास नही हैं।    

- अनिल कुमार तहसीलदार सदर
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