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रेफर सेंटर बन गया जिला अस्पताल
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:39 PM IST
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हमीरपुर। जिला अस्पताल में बमुश्किल तीन-चार दिन की ही दवाएं बचीं है। अस्पताल आने वाले ज्यादातर मरीजों को देखते ही रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में आक्सीजन सिलेंडर भरे रखे रहते हैं, उनकी जरूरत ही नहीं पड़ती। हालांकि अस्पताल प्रशासन की माने तो रोजाना दो आक्सीजन सिलेंडरों की खपत है।
सदर अस्पताल से ज्यादातर मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में तैनात एक डाक्टर ने बताया अस्पताल के हालात बदतर हैं। जब डाक्टर व दवाइयाें की कमी है तो मरीजों को कैसे रोक सकते हैं। सीएमएस डा. राजीव कुमार शर्मा ने बताया दवाइयां खत्म होने को हैं बमुश्किल तीन से चार दिन ही चलेंगी।
डाक्टरों के 28 पद हैं जिनमें कुल 11 पर तैनाती है। शासन को जानकारी दी है। जिलाधिकारी ने प्रयास किए तब शासन से ढाई लाख का बजट मिला है। जबकि अस्पताल के ऊपर आठ लाख से ज्यादा की दवाई कंपनियों की उधारी बाकी है। दवा कैसे खरीदी जाए। अब जब डाक्टर और दवा दोनो की कमी है तो मरीजों को रेफर तो होना ही है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डा. राजीव कुमार शर्मा ने कहा अस्पताल में अभी तक 50 सिलेंडर थे। 11 नए सिलेंडर और मिल गए हैं। जिनमें दो सप्ताह में लगभग 30 सिलेंडर प्रयोग होते हैं। इनमें चार सिलेंडर आपातकालीन कक्ष में, चार भर्ती वार्ड में, एक एनआरसी और एक एंबुलेंस में रहता है बाकी स्टाक में हैं।
हर माह 60 सिलेंडरों की खपत
महिला अस्पताल के सीएमएस डा. आरके सचान ने बताया 40 आक्सीजन सिलेंडर हैं। इसमें 10 सिलेंडर भर्ती वार्ड व लेबर रूम में और चार सिलेंडर एसएनसीयू में रहते हैं। यहां पांच आक्सीजन कंसर्ट ट्रेंडर हैं जिसमें एक लेबर रूम और तीन भर्ती वार्ड में लगे हैं। महिला अस्पताल में महीने भर में 60 सिलेंडर प्रयोग में आ जाते हैं।
आक्सीजन की आपूर्ति कानपुर से आती है। आक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति लाइफ केयर प्रोडक्ट शिवाजी नगर कानपुर से की जा रही है। सिलेंडरों की खरीद चेक के जरिये होती है। प्रत्येक सिलेंडर में 170 रुपये के साथ 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है।
-चिकित्सक और दवाइयाें की कमी से जूझ रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
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सदर अस्पताल से ज्यादातर मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। जिला अस्पताल में तैनात एक डाक्टर ने बताया अस्पताल के हालात बदतर हैं। जब डाक्टर व दवाइयाें की कमी है तो मरीजों को कैसे रोक सकते हैं। सीएमएस डा. राजीव कुमार शर्मा ने बताया दवाइयां खत्म होने को हैं बमुश्किल तीन से चार दिन ही चलेंगी।
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डाक्टरों के 28 पद हैं जिनमें कुल 11 पर तैनाती है। शासन को जानकारी दी है। जिलाधिकारी ने प्रयास किए तब शासन से ढाई लाख का बजट मिला है। जबकि अस्पताल के ऊपर आठ लाख से ज्यादा की दवाई कंपनियों की उधारी बाकी है। दवा कैसे खरीदी जाए। अब जब डाक्टर और दवा दोनो की कमी है तो मरीजों को रेफर तो होना ही है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डा. राजीव कुमार शर्मा ने कहा अस्पताल में अभी तक 50 सिलेंडर थे। 11 नए सिलेंडर और मिल गए हैं। जिनमें दो सप्ताह में लगभग 30 सिलेंडर प्रयोग होते हैं। इनमें चार सिलेंडर आपातकालीन कक्ष में, चार भर्ती वार्ड में, एक एनआरसी और एक एंबुलेंस में रहता है बाकी स्टाक में हैं।
हर माह 60 सिलेंडरों की खपत
महिला अस्पताल के सीएमएस डा. आरके सचान ने बताया 40 आक्सीजन सिलेंडर हैं। इसमें 10 सिलेंडर भर्ती वार्ड व लेबर रूम में और चार सिलेंडर एसएनसीयू में रहते हैं। यहां पांच आक्सीजन कंसर्ट ट्रेंडर हैं जिसमें एक लेबर रूम और तीन भर्ती वार्ड में लगे हैं। महिला अस्पताल में महीने भर में 60 सिलेंडर प्रयोग में आ जाते हैं।
आक्सीजन की आपूर्ति कानपुर से आती है। आक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति लाइफ केयर प्रोडक्ट शिवाजी नगर कानपुर से की जा रही है। सिलेंडरों की खरीद चेक के जरिये होती है। प्रत्येक सिलेंडर में 170 रुपये के साथ 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है।
-चिकित्सक और दवाइयाें की कमी से जूझ रहा अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो