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भर्ती घोटाले में 16 लोगों से पूछताछ, 2016 में डीजीक्यूए में छह क्लर्कों की भर्ती में हुआ था घोटाला
Fri, 25 Sep 2020 08:58 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 25 Sep 2020 08:58 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाास
डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) कांप्लेक्स स्थित सामान्य वस्तु नियंत्रणालय में वर्ष 2016 में छह क्लर्कों की भर्ती घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार को शहर आई। अफसरों और कर्मचारियों समेत कुल 16 लोगों से पूछताछ की गई।
इसमें क्लर्कों के चयन के लिए बनाए गए ऑफिसर्स बोर्ड में चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी भी शामिल रहे। सभी के बयान दर्ज किए गए। भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल कॉपियों को सीबीआई ने कब्जे में लिया है। बताया गया कि सफेद रंग की स्याही लगाकर मेधावियों के सही जवाब गलत कर दिए गए थे।
इससे जिन्हें नौकरी दी जानी थी, उनके नंबर स्वत: ही अधिक हो गए। कॉपी में सफेद रंग की स्याही के इस्तेमाल की पुष्टि के लिए सीबीआई फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लेगी। सूत्र बताते हैं कि विभाग में पहले हुई नियुक्तियों की फाइलें भी खुल सकती हैं।
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इसमें क्लर्कों के चयन के लिए बनाए गए ऑफिसर्स बोर्ड में चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी भी शामिल रहे। सभी के बयान दर्ज किए गए। भर्ती परीक्षा में इस्तेमाल कॉपियों को सीबीआई ने कब्जे में लिया है। बताया गया कि सफेद रंग की स्याही लगाकर मेधावियों के सही जवाब गलत कर दिए गए थे।
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इससे जिन्हें नौकरी दी जानी थी, उनके नंबर स्वत: ही अधिक हो गए। कॉपी में सफेद रंग की स्याही के इस्तेमाल की पुष्टि के लिए सीबीआई फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद लेगी। सूत्र बताते हैं कि विभाग में पहले हुई नियुक्तियों की फाइलें भी खुल सकती हैं।
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क्योंकि शिकायतकर्ताओं ने सीबीआई अफसरों के सामने यह खुलासा भी किया कि नियुक्ति के समय कार्यालय के अधीक्षक एवं डीजीक्यूए मुख्यालय की सलाहकार समिति के सदस्य ने साठगांठ कर पारिवारिक सदस्यों को भर्ती करा लिया। ये सभी वर्तमान में नौकरी में भी हैं।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए एक आदेश करके उसमें ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उन्हीं की देखरख में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई थी।
परीक्षा में अव्वल आने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत कई अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए और सीबीआई को लिखित रूप में की। शिकायत में आरोप है कि चेयरमैन संतोष तिवारी ने विभाग के ही आफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर फर्जीवाड़ा किया।
सूत्र बताते हैं कि दिल्ली मुख्यालय में तैनात डीजीक्यूए के निर्देशों के तहत विभाग के तत्कालीन नियंत्रक देवकीनंदन ने छह क्लर्कों की नियुक्ति के लिए एक आदेश करके उसमें ऑफिस के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. संतोष तिवारी को भर्ती बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उन्हीं की देखरख में अभ्यर्थियों की परीक्षा हुई थी।
परीक्षा में अव्वल आने के बाद भी नियुक्ति न होने की शिकायत कई अभ्यर्थियों ने रक्षा मंत्री, डीजीक्यूए और सीबीआई को लिखित रूप में की। शिकायत में आरोप है कि चेयरमैन संतोष तिवारी ने विभाग के ही आफिस अधीक्षक एवं डीजीक्यूए सलाहकार समिति के सदस्य एचएन तिवारी से मिलकर फर्जीवाड़ा किया।