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25 फीसदी लाभार्थियों को नहीं मिलता राशन
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कानपुर देहात। ई-पॉस व्यवस्था लागू होने के बाद भी जिले के करीब 25 फीसदी कार्डधारकों को राशन नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए अधिकारियों की लापरवाही और कोटेदारों की मनमानी जिम्मेदार है। वितरण व्यवस्था की समीक्षा में मंडल के छह जिलों में कानपुर देहात पांचवें नंबर पर आया है।
जिले में 761 राशन की दुकानों में 31723 राशनकार्ड पंजीकृत हैं। इसमें अंत्योदय राशनकार्डों की संख्या 47644 और पात्र गृहस्थी कार्डों की संख्या 269588 है। अंत्योदय राशनकार्ड धारकों को प्रति कार्ड के हिसाब से जबकि पात्र गृहस्थी में यूनिट (सदस्यों की संख्या) के हिसाब से राशन दिया जाता है। कोटेदार राशन वितरण में धांधली करते थे, इसके चलते ई-पॉश व्यवस्था लागू की गई है। इसके बाद से गड़बड़ी की गुंजाइश कम बची है। कोटेदार नेटवर्क और मशीन में खराबी का बहाना बनाकर वितरण में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे कई जगह मेन्यूअल राशन वितरण भी किया जा रहा है। ऐसा तब है जब ई पॉस कंपनी ने प्रत्येक ब्लाक में एक इंजीनियर लगा रखा है।
इसके बावजूद वितरण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। मंडल की समीक्षा में जनपद में वितरण 74.15 ही पाया गया है, यानी 25 फीसदी से अधिक लाभार्थियों को राशन नहीं मिल पा रहा है। डीएसओ अंशिका दीक्षित ने कहाकि वितरण में तेजी लाने को लेकर सभी पूर्ति निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं वहीं जिन दुकानों की ई-पोस मशीनों में सर्वर की समस्या या फिर कोई और गड़बड़ी है उसे ठीक करने के लिए इंजीनियरों को निर्देशित किया गया है।
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संदलपुर ब्लाक के बहबलपुर निवासी सरोज कुमारी ने बताया कि कोटेदार मनमाने तरीके से वितरण करते हैं। ई-पॉस मशीन से निकले वाले पर्ची भी नहीं देते हैं। इससे कितने यूनिट का राशन मिल रहा है ये पता नहीं चल पाता है। हरपुरा गांव की मिथलेश कुमारी ने बताया कि पास के गांव बहेरा में राशन मिलता है। कोटेदार पर्ची नहीं देता है। राशन भी कम दिया जाता है। बहबलपुर गांव की अंत्योदाय कार्डधारक रानी देवी ने बताया कि 35 किलो की जगह 25 किलो राशन मिलता है। हवासपुर गांव की अंत्योदय राशनकार्डधारक किताबश्री ने बताया कि सुमेरपुरवा का कोटेदार दो माह में 21 किलो राशन देता है।
25 फीसदी लाभार्थियों को नहीं मिलता राशन
ई-पॉश से वितरण के बावजूद मनमानी कर रहे कोटेदार
क्रासर
वितरण में मंडल के छह जिलों में पांचवें पायदान पर जिला
अमर उजाला ब्यूरो
जिले में 761 राशन की दुकानों में 31723 राशनकार्ड पंजीकृत हैं। इसमें अंत्योदय राशनकार्डों की संख्या 47644 और पात्र गृहस्थी कार्डों की संख्या 269588 है। अंत्योदय राशनकार्ड धारकों को प्रति कार्ड के हिसाब से जबकि पात्र गृहस्थी में यूनिट (सदस्यों की संख्या) के हिसाब से राशन दिया जाता है। कोटेदार राशन वितरण में धांधली करते थे, इसके चलते ई-पॉश व्यवस्था लागू की गई है। इसके बाद से गड़बड़ी की गुंजाइश कम बची है। कोटेदार नेटवर्क और मशीन में खराबी का बहाना बनाकर वितरण में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे कई जगह मेन्यूअल राशन वितरण भी किया जा रहा है। ऐसा तब है जब ई पॉस कंपनी ने प्रत्येक ब्लाक में एक इंजीनियर लगा रखा है।
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इसके बावजूद वितरण व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। मंडल की समीक्षा में जनपद में वितरण 74.15 ही पाया गया है, यानी 25 फीसदी से अधिक लाभार्थियों को राशन नहीं मिल पा रहा है। डीएसओ अंशिका दीक्षित ने कहाकि वितरण में तेजी लाने को लेकर सभी पूर्ति निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं वहीं जिन दुकानों की ई-पोस मशीनों में सर्वर की समस्या या फिर कोई और गड़बड़ी है उसे ठीक करने के लिए इंजीनियरों को निर्देशित किया गया है।
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संदलपुर ब्लाक के बहबलपुर निवासी सरोज कुमारी ने बताया कि कोटेदार मनमाने तरीके से वितरण करते हैं। ई-पॉस मशीन से निकले वाले पर्ची भी नहीं देते हैं। इससे कितने यूनिट का राशन मिल रहा है ये पता नहीं चल पाता है। हरपुरा गांव की मिथलेश कुमारी ने बताया कि पास के गांव बहेरा में राशन मिलता है। कोटेदार पर्ची नहीं देता है। राशन भी कम दिया जाता है। बहबलपुर गांव की अंत्योदाय कार्डधारक रानी देवी ने बताया कि 35 किलो की जगह 25 किलो राशन मिलता है। हवासपुर गांव की अंत्योदय राशनकार्डधारक किताबश्री ने बताया कि सुमेरपुरवा का कोटेदार दो माह में 21 किलो राशन देता है।
25 फीसदी लाभार्थियों को नहीं मिलता राशन
ई-पॉश से वितरण के बावजूद मनमानी कर रहे कोटेदार
क्रासर
वितरण में मंडल के छह जिलों में पांचवें पायदान पर जिला
अमर उजाला ब्यूरो