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साफ-सफाई और बेहतर प्रबंधन में टोडरपुर जिले में अव्वल

Tue, 19 Mar 2019 01:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2019 01:24 AM IST
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साफ-सफाई और बेहतर प्रबंधन में टोडरपुर जिले में अव्वल
अमर उजाला ब्यूरो
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कानपुर देहात। मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत जिले के पांच गांवों को पुरस्कार मिला है। इन गांवों में शिक्षा, स्वच्छता, जीवन स्तर आदि कई बिंदुओं पर सर्वेक्षण कराया गया था। जिसमें मानक के अनुसार खरा पाए जाने पर शासन की ओर से पुरस्कार दिया गया है। मैथा ब्लाक के टोडरपुर ग्राम सभा को जिले में पहला स्थान मिला है। इस पर 8 लाख रुपये का पुरस्कार ग्राम सभा को दिया गया है। इस धनराशि को गांव के विकास में खर्च किया जाएगा।
मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत ग्राम सभाओं में छह माह पूर्व सर्वे कराया गया था। निर्धारित प्रारूप पर सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। सर्वे के लिए शासन की ओर से भी टीमें आई थीं। उन टीमें गांवों में जाकर हकीकत देखी थी। इसके बाद रिपोर्ट शासन को भेजी थी। सर्वेक्षण में स्वच्छता, रहन सहन, शिक्षा, पंचायत व स्कूलों में अभिलेखों का रखरखाव, स्कूलों की संचालन, ओडीएफ, गांव का जीवन स्तर आदि 54 बिंदुओं पर सर्वे किया गया था। जिसमें मैथा ब्लाक के टोडरपुर को जिले में पहला, रसूलाबाद के आलमपुर खेड़ा को दूसरा, राजपुर के खासबरा को तीसरा व मलासा के बरगवां को चौथा व मैथा के करोम गांव को पांचवां स्थान मिला है। पहले स्थान पर रहने वाले गांव को आठ लाख, दूसरे स्थान पर सात लाख, तीसरे स्थान पर पांच लाख, चौथे स्थान पर रहने वाले गांव को तीन लाख और पांचवे स्थान पर रहने वाले गांव को दो लाख रुपये का पुरस्कार मिला है। यह धनराशि ग्राम प्रधानों को गांव के विकास कार्य में खर्च करना है। डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने शासन की ओर से सर्वेक्षण कराया गया था वहीं से गांवों का चयन किया गया है। पांच गांव मानक पर खरे उतरे हैं। उन्हें पुरस्कार की धनराशि दी गई है।
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प्रधान बोले गांव में बनवाएंगे पंचायत भवन
जिले में पहला स्थान पाने वाली ग्राम सभा टोडरपुर के प्रधान प्रधान डा. हरिपाल सिंह ने बताया कि यह उनके गांव के लिए बड़ी उपलब्धि है। सरकार की ओर से पुरस्कार स्वरूप मिली आठ लाख रुपये की धनराशि से गांव में पंचायत भवन बनवाएंगे। गांव में पंचायत भवन न होने से सरकारी कार्यों को सार्वजनिक स्थल पर बैठकर निपटाने में समस्या आती है। जिससे स्कूल भवन का उपयोग करना पड़ता है। कई बार वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की नौबत आ जाती है। जिसे देखते हुए गांव में पंचायत भवन बनाना जरूरी है। प्रधान हरिपाल सिंह खुद शिक्षित हैं वह पीएचडी करने के बाद नौकरी भी करते थे। सेवानिवृत्त होने पर चुनाव लड़े और लोगों ने उन्हें पसंद किया। उन्होंने कहा कि गांव को आदर्श गांव बनाना ही उनका उद्देश्य है।
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