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भट्ठियों पर बन रहा घटिया खोया
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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। जिले में संचालित खोया भट्ठियों में घटिया खोया बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है। होली पर घटिया खोया बनाने का काम और तेज हो गया है। पिछले पंद्रह दिनों में खाद्य विभाग की टीम ने 15 भट्ठियों में खोया घटिया होने की आशंका पर सैंपल भरे। टीम को भट्ठियों पर क्रीम व खोया अलग रखा मिलने के साथ गंदगी भी मिली थी।
जिले में खोया बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। भोगनीपुर, पुखरायां, मलासा, रसूलाबाद, झींझक समेत करीब 150 जगह खोया भट्ठियां (कारखाने) चलती हैं। इसमें केवल 55 भट्ठियां ही पंजीकृत हैं। यहां बना खोया जनपद के अलावा कानपुर शहर के बाजार में भेजा जाता है। करीब करीब सभी भट्ठियों में घटिया खोया बनाया जा रहा है। इसका खुलासा पिछले पंद्रह दिनों में खाद्य विभाग की टीम के छापे में हुआ है।
होली के चलते खाद्य विभाग की टीम ने 15 खोया भट्ठियों का निरीक्षण किया। टीम को सभी भट्ठियों पर गंदगी के साथ खोया घटिया (अधोमानक) मिला। इस पर खोया के नमूने भरकर जांच के लिए प्रयोग शाला भेजे गए हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी शैलेश दीक्षित ने बताया कि 15 जगह छापा मारा गया, सभी में खोया अधोमानक मिला। इस पर नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि भट्ठियों में दूध से क्रीम और घी निकालकर खोया बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खोया का नमूना फेल (घटिया) होने पर भट्ठी संचालक पर तीन लाख तक जुर्माना हो सकता है।
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होली त्योहार पर बाजार में रंगीन चकरी खुलेआम बेची जा रही है। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी शैलेश दीक्षित ने बताया कि कचरी में किसी भी तरह का रंग नहीं मिलाया जा सकता है। रंग मिली कचरी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसी तरह मिठाई में भी रंग नहीं मिलाना चाहिए। ज्यादातर दुकानदार रंग मिलाकर मिलावटी मिठाई बेचते हैं। लोगों को रंगीन कचरी व मिठाई नहीं खरीदना चाहिए। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी ने बताया कि रंगीन कचरी पकड़ने के लिए बाजार में अभियान चलाया जा रहा है।
भट्ठियों पर बन रहा घटिया खोया
क्रीम व घी निकालकर बना खोया बाजार में बेचा जा रहा, होली में खपत बढ़ी
क्रासर
150 से अधिक भट्ठियां खोया की जिले में चल रही हैं
55 भट्ठियों का ही है खाद्य विभाग में पंजीकरण
15 दिन में 15 भट्ठियों से भरे जा चुके हैं नमूने
फोटो संख्या 16एकेबीपी10- दुकानों में सजी मिठाई
फोटो संख्या 16एकेबीपी11- प्रतिबंध के बाद भी बिक्री होती रंगीन कचर्री
कानपुर देहात। जिले में संचालित खोया भट्ठियों में घटिया खोया बनाकर बाजार में बेचा जा रहा है। होली पर घटिया खोया बनाने का काम और तेज हो गया है। पिछले पंद्रह दिनों में खाद्य विभाग की टीम ने 15 भट्ठियों में खोया घटिया होने की आशंका पर सैंपल भरे। टीम को भट्ठियों पर क्रीम व खोया अलग रखा मिलने के साथ गंदगी भी मिली थी।
जिले में खोया बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। भोगनीपुर, पुखरायां, मलासा, रसूलाबाद, झींझक समेत करीब 150 जगह खोया भट्ठियां (कारखाने) चलती हैं। इसमें केवल 55 भट्ठियां ही पंजीकृत हैं। यहां बना खोया जनपद के अलावा कानपुर शहर के बाजार में भेजा जाता है। करीब करीब सभी भट्ठियों में घटिया खोया बनाया जा रहा है। इसका खुलासा पिछले पंद्रह दिनों में खाद्य विभाग की टीम के छापे में हुआ है।
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होली के चलते खाद्य विभाग की टीम ने 15 खोया भट्ठियों का निरीक्षण किया। टीम को सभी भट्ठियों पर गंदगी के साथ खोया घटिया (अधोमानक) मिला। इस पर खोया के नमूने भरकर जांच के लिए प्रयोग शाला भेजे गए हैं। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी शैलेश दीक्षित ने बताया कि 15 जगह छापा मारा गया, सभी में खोया अधोमानक मिला। इस पर नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि भट्ठियों में दूध से क्रीम और घी निकालकर खोया बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में खोया का नमूना फेल (घटिया) होने पर भट्ठी संचालक पर तीन लाख तक जुर्माना हो सकता है।
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होली त्योहार पर बाजार में रंगीन चकरी खुलेआम बेची जा रही है। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी शैलेश दीक्षित ने बताया कि कचरी में किसी भी तरह का रंग नहीं मिलाया जा सकता है। रंग मिली कचरी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसी तरह मिठाई में भी रंग नहीं मिलाना चाहिए। ज्यादातर दुकानदार रंग मिलाकर मिलावटी मिठाई बेचते हैं। लोगों को रंगीन कचरी व मिठाई नहीं खरीदना चाहिए। मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी ने बताया कि रंगीन कचरी पकड़ने के लिए बाजार में अभियान चलाया जा रहा है।
भट्ठियों पर बन रहा घटिया खोया
क्रीम व घी निकालकर बना खोया बाजार में बेचा जा रहा, होली में खपत बढ़ी
क्रासर
150 से अधिक भट्ठियां खोया की जिले में चल रही हैं
55 भट्ठियों का ही है खाद्य विभाग में पंजीकरण
15 दिन में 15 भट्ठियों से भरे जा चुके हैं नमूने
फोटो संख्या 16एकेबीपी10- दुकानों में सजी मिठाई
फोटो संख्या 16एकेबीपी11- प्रतिबंध के बाद भी बिक्री होती रंगीन कचर्री