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भूसे की किल्लत, बाहर ले जाने पर रोक

Tue, 19 Feb 2019 01:59 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2019 01:59 AM IST
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भूसे की किल्लत, बाहर ले जाने पर रोक

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अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर देहात। कंबाइन मशीन से गेहूं फसल की कटाई और अन्य जिलों में भूसे की बिक्री के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। जिले में भूसे की जबरदस्त किल्लत हो गई है, इससे भूसे के दाम 1000 रुपये कुंतल तक पहुंच गए हैं। हालत ये है कि प्रशासन को गोवंश आश्रय स्थलों के लिए भूसा ढूंढे नहीं मिल रहा है। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने भूसा जिले के बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है। पुलिस को जिले की सीमा पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

जिले में 35 गोवंश आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। इनमें 25 का निर्माण पूरा कर 1793 छुट्टा मवेशी भी बंद किए जा चुके हैं। इन मवेशियों को चारे के लिए प्रशासन को भूसे की जरूरत है। किंतु कमी के चलते भूसा मिल नहीं पा रहा है। भूसे के लिए लेखपाल गांवों के चक्कर काट रहे हैं, मजबूरी में मवेशियों को पयार और बाजरी काटकर खिलाई जा रही है।
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दरअसल कानपुर महानगर के करीब होने के कारण जिले से भारी मात्रा में भूसा यहां से व्यापारी ले जाते हैं। पड़ोसी जिले कन्नौज आलू बाहुल्य है, इससे वहां के लोग भी जनपद के गांवों से भूसा ले जाते हैं। भूसे की कमी और जिले के बाहर खासी मांग होने से दाम बढ़ने के साथ भूसे की किल्लत भी हो गई है। 12 फरवरी को गोवंश आश्रय स्थल समिति की बैठक में भी डीएम के समक्ष चारे के संकट की समस्या उठी थी। इस पर डीएम राकेश कुमार सिंह ने सभी सीओ और थानाध्यक्षों को जिले की सीमाओं पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। उनसे कहा गया है कि जिले के बाहर जाने वाले भूसा लदे वाहनों को कब्जे में ले लिया जाए।
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ईट भट्ठों पर एसडीएम रखेंगे नजर
जिले के ईट भट्टों में कोयले को आग पकड़ाने के लिए भी भूसा जलाया जाता है। इसमें भारी मात्रा में भूसे की खपत होती है। जिलाधिकारी ने सभी छह एसडीएम को अपने अपने क्षेत्र के ईंट भट्ठों की जांच कर भूसा न जलने देने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम से कहा गया है कि सभी ईंट भट्ठों पर नजर रखें।



गांवों और नगरीय निकायों में चल रहे 25 गोवंश आश्रय स्थलों में 1793 मवेशी बंद हैं। सबसे ज्यादा मवेशी रसूलाबाद के असालतगंज में 605, सरवनखेड़ा के बिलसरायां में 209, और गंभीरा में 205 हैं। अन्य 23 आश्रय स्थलों में 743 छुट्टा मवेशी बंद हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बीसी अग्रवाल के अनुसार बड़े मवेशी के लिए प्रतिदिन आठ किलोग्राम भूसा दिया जाना चाहिए। आश्रय स्थलों में बंद छोटे बड़े मवेशियों को मिलाकर रोज करीब 120 क्विंटल भूसे की जरूरत है। इस अनुपात में प्रशासन के प्रतिदिन भूसे पर 120000 रुपये भूसे पर ही खर्च होने हैं।





भूसे की किल्लत, बाहर ले जाने पर रोक
जिलाधिकारी ने सीओ, एसओ को दिए सीमा पर नजर रखने के निर्देश
क्रासर
जब्त होंगी जिले के बाहर जाने वाली भूसा लदी गाड़ियां
कमी से 1000 रुपये कुंतल तक पहुंच गए भूसे के दाम

फोटो संख्या-18 एकेबीपी-17 झींझक आश्रय स्थल मवेशियों को पुवाल और बाजरी खिलाई जा रही है।
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