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194 टीमें घर-घर खोजेंगी टीबी के रोगी

Sun, 06 Jan 2019 12:55 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jan 2019 12:55 AM IST
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194 टीमें घर-घर खोजेंगी टीबी के रोगी
उन्नाव। टीबी को नजरअंदाज करने से एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) मरीजों की संख्या बढ़ रही है। एक एमडीआर मरीज अपने आसपास के 15 व्यक्तियों को आसानी से टीबी का रोगी बना देता है। टीबी मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग 7 से 17 जनवरी तक जिले में टीबी रोगियों की खोज के लिए अभियान चलाएगा। 194 टीमें घर-घर दस्तक देकर रोगियों की खोज करेंगी।
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मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएमओ डॉ. लालता प्रसाद ने बताया कि टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए सात से 17 जनवरी तक जिले में सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की 194 टीमें घर-घर जाकर टीबी रोगियों की पहचान करेंगी। इस दौरान 459327 जनसंख्या को लक्षित किया गया है। सीएमओ ने बताया कि टीबी की पहचान के बाद भी अगर उसका इलाज नहीं कराया जाता है तो स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में टीबी का मरीज अपने आसपास के 15 लोगों को बीमार बना देता है। टीबी के मरीजों की पहचान कर उन्हें इलाज उपलब्ध कराने के लिए ही अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान में 44 टीम सुपरवाइजर भी तैनात किए गए हैं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान डॉ. आरके गौतम, डॉ. आरके रावत, लाल बहादुर यादव, मो एजाज, विनोद कुमार यादव, बीएन मिश्रा, शिवचंद्र व धीरज कुमार आदि मौजूद रहे।
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क्या है एमडीआर टीबी
एमडीआर टीबी के मरीजों में सामान्य टीबी के दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इससे दवाएं रोग पर असर करना बंद कर देती हैं। इस वर्ष टीबी के रोगियों में 178 को एमडीआर की पुष्टि हो चुकी हैं। वहीं 11 मरीज एक्सडीआर की स्टेज तक पहुंच चुके हैं।
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ज्यादातर टीबी मरीज इलाज में लापरवाही बरतते हैं। इससे सामान्य टीबी एमडीआर में परिवर्तित हो जाती है। इस स्टेज पर लापरवाही से एमडीआर का मरीज एक्सडीआर (एक्सटेंसिव ड्रग रजिस्टेंस) का शिकार हो जाता हैं। इस रोग की अगला स्टेज ड्रग रजिस्टेंट है, जिसमें कोई भी दवा काम करना बंद कर देती है और रोग लाइलाज हो जाता है।
-डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डीटीओ
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