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तैर कर नहीं, टहलकर पार कर रहे गंगा-यमुना
Updated Tue, 29 May 2018 12:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जिले मेें गंगा और यमुना नदी का जलस्तर तेजी से घटा है। कुछ हिस्सों में नदी पार करने के लिए नाव या किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं बची, बल्कि लोग टहलते हुए नदी पार कर रहे हैं। जिले में आठ-नौ साल बाद ऐसी स्थिति दिखी है। नदी किनारे वाले गांवों के हैंडपंप भी सूख गए हैं। इस भीषण गर्मी में लोग एक से डेढ़ किमी चलकर नदी से पानी घरों में ला रहे हैं।
खजुहा विकास खंड के ककोरा गांव के रामघाट से करीब डेढ़ किमी दूर तक यमुना नदी का पानी चार से साढ़े चार फीट रह गया है, जिससे ग्रामीण टहल कर नदी पार कर रहे हैं। यह केवल जलस्तर तेजी से घटने की वजह से हुआ है, वरना सामान्य दिनों में यमुना नदी को तैर कर भी पार करने की कोई नहीं सोचता है। इससे भी ज्यादा दुरूह स्थिति अमौली विकास खंड के रिठवां और मवईधाम के पास है। बीच-बीच का यह दायरा आधा-आधा किमी का है। यहां यमुना का जलस्तर घटने से तीन से चार फीट पानी रह गया है, जिससे रिठवां गांव के लोग बांदा के बुधेड़ा नारायण, मवईधाम के लोग हमीरपुर जिले के पकेवरा तक टहल कर पार कर रहे हैं। यमुना टहल कर पार करने वाले रिठवां के आत्म प्रकाश ने बताया कि ऐसी स्थिति 12-15 दिनों से है। पिछले साल भी जलस्तर घटा था, पर वह फिर भी पांच फीट तक था। अब तक मई और जून में जलस्तर घटने के बाद भी औसतन यहां दस से बारह फीट पानी रहता था। इस बार तो हद हो गई है।
गंगा : सिहार से रामपुर महेवा का इलाका ज्यादा प्रभावित
भिटौरा विकास खंड के सिहार गांव से रामपुर महेवा तक एक किमी का इलाका ज्यादा प्रभावित है। रामपुर महेवा के पास गंगा तीन फीट गहराई में हैं। सिहार गांव के पास चार से पांच फीट पर है। नरौली के पास तीन फीट पर जलस्तर है। रामपुर महेवा घाट में जल स्तर नीचे जाने से किसान परेशान हैं। महेवा के सुरेश कुमार, पुत्तीलाल, रामपुर के कल्लू, गुलाब, रामपुर फूलचंद्र, सिहार के प्रधानपति शेखचंद्र मौर्य ने कहा कि जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है, यह चिंता का विषय बन गया है।
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मछलियों, जलीय जंतुओं को खतरा
गंगा-यमुना में पानी कम होने से मछलियां व अन्य जलीय जंतु बेहाल हो उठे हैं। ओमघाट के स्वामी विज्ञानानंद का कहना है कि करीब तीन साल पहले सर्वे में यहां गंगा नदी में डाल्फिन मछलियां मिली थीं। अब वह नहीं दिख रहीं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य हेमंत कुमार बताते हैं कि सामान्य दिनों में गंगा में मछलियों की रोहू, मांगुर, टेंगन, सेउरी आदि नस्लें पाई जाती हैं, जबकि यमुना में मांगुर व टेंगन मछलियों की अधिकता रहती है। इनकी संख्या भी घटी है। पश्चिम बारिश में फिर सामान्य स्थिति आ जाएगी।
जवाब दे गए आसपास के हैंडपंप
खजुहा विकास खंड के ककोरा, रामघाट, रेंगना, अमौली के रिठवां, धाना, गौरी अवाजीपुर आदि क्षेत्रों में 40 से 45 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। हैंडपंपों की स्थिति भूगर्भ जलस्तर में तेजी से गिरावट का प्रमाण है। हालांकि, सरकारी स्तर पर भूगर्भ जलस्तर के ताजे आंकड़े मौजूद नहीं है। लघु सिंचाई विभाग के पास चार साल पहले के भूगर्भ जल के आंकड़े ही मौजूद हैं।
‘गंगा का जलस्तर गर्मी में घटा है। यमुना का जलस्तर घटने का मामला संज्ञान में नहीं था। पता लगवाया है, कुछ जगह जलस्तर कम दिखा है। जरूरत पड़ी गंगा में तो नरौरा बांध को पत्र लिखकर पानी छोड़ने को कहा जाएगा। यमुना में कभी ऐसी नौबत नहीं आई थी। 15-20 दिन की बात है। जून के आखिरी हफ्ते तक भी बारिश हो गई तो बेतवा व केन में पानी तेजी से बढ़ने से यमुना का जलस्तर बढ़ जाएगा। झांसी में बने बांध के अफसरों से भी इस मुद्दे पर बात कर जल्द समाधान निकाल लिया जाएगा।’
कुमार प्रशांत, जिलाधिकारी
इंसेट---
‘गंगा का जलस्तर जरूरत से ज्यादा घटने की वजह नरौरा बांध से पानी कम मिलना है। गर्मी में वैसे भी नदियों का जलस्तर घटता है। गंगा की सहायक नदियां में केवल पांडु नदी का पानी ही गंगा में मिलता है।’
राजबहादुर सिंह, सेंट्रल वाटर कमीशन टीम के सदस्य
इंसेट---
‘कालागढ़ डैम से पानी गंगा में छोड़ा जाता है। वहां से नरौरा आता है, नरौरा से हम लोग नहरों के लिए उठा लेते हैं। वहीं पानी कम है, जिससे दिक्कत है। यमुना के जल स्तर घटने की मुख्य वजह केवल गर्मी है।’
वैभव सिंह, अधिशासी अभियंता, निचली गंगानहर
इंसेट---
‘यमुना की सहायक नदियां कई हैं। जिले में बेतवा व केन नदी का पानी यमुना में मिलता है। यमुना में कभी जलस्तर ऐसा घटा नहीं कि पानी छुड़वाने की जरूरत पड़े। अभी कुछ जगहों पर ऐसी स्थिति है, बारिश होते ही सब ठीक हो जाएगा।’
महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड
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फतेहपुर। जिले मेें गंगा और यमुना नदी का जलस्तर तेजी से घटा है। कुछ हिस्सों में नदी पार करने के लिए नाव या किसी अन्य साधन की जरूरत नहीं बची, बल्कि लोग टहलते हुए नदी पार कर रहे हैं। जिले में आठ-नौ साल बाद ऐसी स्थिति दिखी है। नदी किनारे वाले गांवों के हैंडपंप भी सूख गए हैं। इस भीषण गर्मी में लोग एक से डेढ़ किमी चलकर नदी से पानी घरों में ला रहे हैं।
खजुहा विकास खंड के ककोरा गांव के रामघाट से करीब डेढ़ किमी दूर तक यमुना नदी का पानी चार से साढ़े चार फीट रह गया है, जिससे ग्रामीण टहल कर नदी पार कर रहे हैं। यह केवल जलस्तर तेजी से घटने की वजह से हुआ है, वरना सामान्य दिनों में यमुना नदी को तैर कर भी पार करने की कोई नहीं सोचता है। इससे भी ज्यादा दुरूह स्थिति अमौली विकास खंड के रिठवां और मवईधाम के पास है। बीच-बीच का यह दायरा आधा-आधा किमी का है। यहां यमुना का जलस्तर घटने से तीन से चार फीट पानी रह गया है, जिससे रिठवां गांव के लोग बांदा के बुधेड़ा नारायण, मवईधाम के लोग हमीरपुर जिले के पकेवरा तक टहल कर पार कर रहे हैं। यमुना टहल कर पार करने वाले रिठवां के आत्म प्रकाश ने बताया कि ऐसी स्थिति 12-15 दिनों से है। पिछले साल भी जलस्तर घटा था, पर वह फिर भी पांच फीट तक था। अब तक मई और जून में जलस्तर घटने के बाद भी औसतन यहां दस से बारह फीट पानी रहता था। इस बार तो हद हो गई है।
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गंगा : सिहार से रामपुर महेवा का इलाका ज्यादा प्रभावित
भिटौरा विकास खंड के सिहार गांव से रामपुर महेवा तक एक किमी का इलाका ज्यादा प्रभावित है। रामपुर महेवा के पास गंगा तीन फीट गहराई में हैं। सिहार गांव के पास चार से पांच फीट पर है। नरौली के पास तीन फीट पर जलस्तर है। रामपुर महेवा घाट में जल स्तर नीचे जाने से किसान परेशान हैं। महेवा के सुरेश कुमार, पुत्तीलाल, रामपुर के कल्लू, गुलाब, रामपुर फूलचंद्र, सिहार के प्रधानपति शेखचंद्र मौर्य ने कहा कि जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है, यह चिंता का विषय बन गया है।
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मछलियों, जलीय जंतुओं को खतरा
गंगा-यमुना में पानी कम होने से मछलियां व अन्य जलीय जंतु बेहाल हो उठे हैं। ओमघाट के स्वामी विज्ञानानंद का कहना है कि करीब तीन साल पहले सर्वे में यहां गंगा नदी में डाल्फिन मछलियां मिली थीं। अब वह नहीं दिख रहीं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य हेमंत कुमार बताते हैं कि सामान्य दिनों में गंगा में मछलियों की रोहू, मांगुर, टेंगन, सेउरी आदि नस्लें पाई जाती हैं, जबकि यमुना में मांगुर व टेंगन मछलियों की अधिकता रहती है। इनकी संख्या भी घटी है। पश्चिम बारिश में फिर सामान्य स्थिति आ जाएगी।
जवाब दे गए आसपास के हैंडपंप
खजुहा विकास खंड के ककोरा, रामघाट, रेंगना, अमौली के रिठवां, धाना, गौरी अवाजीपुर आदि क्षेत्रों में 40 से 45 हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। हैंडपंपों की स्थिति भूगर्भ जलस्तर में तेजी से गिरावट का प्रमाण है। हालांकि, सरकारी स्तर पर भूगर्भ जलस्तर के ताजे आंकड़े मौजूद नहीं है। लघु सिंचाई विभाग के पास चार साल पहले के भूगर्भ जल के आंकड़े ही मौजूद हैं।
‘गंगा का जलस्तर गर्मी में घटा है। यमुना का जलस्तर घटने का मामला संज्ञान में नहीं था। पता लगवाया है, कुछ जगह जलस्तर कम दिखा है। जरूरत पड़ी गंगा में तो नरौरा बांध को पत्र लिखकर पानी छोड़ने को कहा जाएगा। यमुना में कभी ऐसी नौबत नहीं आई थी। 15-20 दिन की बात है। जून के आखिरी हफ्ते तक भी बारिश हो गई तो बेतवा व केन में पानी तेजी से बढ़ने से यमुना का जलस्तर बढ़ जाएगा। झांसी में बने बांध के अफसरों से भी इस मुद्दे पर बात कर जल्द समाधान निकाल लिया जाएगा।’
कुमार प्रशांत, जिलाधिकारी
इंसेट---
‘गंगा का जलस्तर जरूरत से ज्यादा घटने की वजह नरौरा बांध से पानी कम मिलना है। गर्मी में वैसे भी नदियों का जलस्तर घटता है। गंगा की सहायक नदियां में केवल पांडु नदी का पानी ही गंगा में मिलता है।’
राजबहादुर सिंह, सेंट्रल वाटर कमीशन टीम के सदस्य
इंसेट---
‘कालागढ़ डैम से पानी गंगा में छोड़ा जाता है। वहां से नरौरा आता है, नरौरा से हम लोग नहरों के लिए उठा लेते हैं। वहीं पानी कम है, जिससे दिक्कत है। यमुना के जल स्तर घटने की मुख्य वजह केवल गर्मी है।’
वैभव सिंह, अधिशासी अभियंता, निचली गंगानहर
इंसेट---
‘यमुना की सहायक नदियां कई हैं। जिले में बेतवा व केन नदी का पानी यमुना में मिलता है। यमुना में कभी जलस्तर ऐसा घटा नहीं कि पानी छुड़वाने की जरूरत पड़े। अभी कुछ जगहों पर ऐसी स्थिति है, बारिश होते ही सब ठीक हो जाएगा।’
महेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड