फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   जहर जो घोलते हैं...

जहर जो घोलते हैं...

Mon, 05 Mar 2018 10:48 PM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
जहर जो घोलते हैं...
‘जहर जो घोलते हैं हिंदू-मुस्लिम दोस्तानों में...’
विज्ञापन

बांदा। बज्मे इकरारिया के तत्वाधान में आयोजित होली मिलन समारोह में मुशायरे की महफिल सजी। शायर हकीम बशीर तालिब ने सुनाया ‘जहर जो घोलते हैं हिंदू-मुस्लिम दोस्तानों में, लगता कौन है पाबंदियां इनकी जुबानों में’। अजिज तारिक ने पढ़ा-‘शिकारी ने बिछा रखे हैं इतने जाल नजरों के, परिदें खौफ से बैठे हैं अपने आशियानों में’। शायर रईस अब्बा ने सुनाया-‘यही इक मुल्क है अपना फकत नक्शे में दुनियां में, जहां भगवान बिकते हैं सियासत की दुकानों में’। शायर शरीफ ने पढ़ा-‘हकीकत रह गई है अब सिमट कर दास्तानों में, मेहरबानी नजर आती है मेहरबानों में’। इनके अलावा सईद वारसी, वाकिफ, मुन्ना बाबा, सब्बू पहलवान, जाकिर, इमरान अली आदि ने कलाम पेश किए। मुशायरे की सदारत शायर नवाब असर और निजामत काजी जमीर ने की। इसके पूर्व मुशायरे की शुरुआत सईद वारसी की नात से हुई। अगले माह के मुशायरे का मिसरा तरह ‘उसने जमीर बेच के शोहरत खरीद ली’ दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed