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नवजात को गोद देने में डाक्टर को थमाया नोटिस
Updated Thu, 08 Mar 2018 11:24 PM IST
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नवाबगंज। नर्सिंगहोम के शौचालय में मिले नवजात को दूसरे के सुपुर्द करने के मामले में बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के अध्यक्ष ने डाक्टर को नोटिस जारी किया है। डाक्टर को 12 मार्च को नवजात शिशु के साथ न्यायपीठ में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
नवाबगंज की बरतन वाली गली स्थित बच्चा क्लीनिक के शौचालय में पांच मार्च को नवजात शिशु मिला था। डाक्टर उमेश गंगवार ने नवजात को दूसरे के सुपुर्द कर दिया था। इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति न्यायपीठ को नहीं दी। इस मामले को गंभीरता से लेकर न्यायपीठ अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार ने नवाबगंज एसओ के माध्यम
से क्लीनिक के डाक्टर उमेश गंगवार को नोटिस दिया है। इसमें कहा गया कि नर्सिंग होम के शौचालय में नवजात प्राप्त हुआ है। जिसको किसी अन्य दंपती के सुपुर्द कर दिया गया। इसमें यह संज्ञान में आया है कि गर्भवती युवती को नाजायज तरीके से गर्भपात कराने के उद्देश्य से दवा दी गई। जिसके बाद उसके नवजात को लाखों रुपये मेें बेच दिया है। इस पूरे प्रकरण कें संबंध में प्रशासन को जानकारी नहीं दी गई। इस तरह के मामलों को 24 घंटे के भीतर
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बाल कल्याण समिति, पुलिस थाना, बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्प लाइन को नवजात को सौंपने का नियम है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जो अपराध किया गया है, वह जानबूझ कर किया जाना मालूम हो रहा है। किसी लावारिस बच्चे को गोद देने का निर्णय बाल कल्याण समिति करती है। इस कारण नवजात शिशु को गोद लेने वालों से लेकर 12 मार्च को न्यायपीठ में उपस्थित हो। जो नियम विरूद्ध काम किया गया है, उस संबंध में स्पष्टीकरण देने का आदेश डाक्टर को दिया है।
लावारिस को गोद देने में डाक्टर फंसे
- बाल कल्याण समिति न्यायपीठ ने नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण, नर्सिंगहोम के शौचालय में मिला था नवजात
- उठाया सवाल, नवजात को दूसरे के सुपुर्दगी में देने से पहले पीठ को क्या नहीं दी गई जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
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नवाबगंज की बरतन वाली गली स्थित बच्चा क्लीनिक के शौचालय में पांच मार्च को नवजात शिशु मिला था। डाक्टर उमेश गंगवार ने नवजात को दूसरे के सुपुर्द कर दिया था। इसकी जानकारी बाल कल्याण समिति न्यायपीठ को नहीं दी। इस मामले को गंभीरता से लेकर न्यायपीठ अध्यक्ष डा. संजीव गंगवार ने नवाबगंज एसओ के माध्यम
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से क्लीनिक के डाक्टर उमेश गंगवार को नोटिस दिया है। इसमें कहा गया कि नर्सिंग होम के शौचालय में नवजात प्राप्त हुआ है। जिसको किसी अन्य दंपती के सुपुर्द कर दिया गया। इसमें यह संज्ञान में आया है कि गर्भवती युवती को नाजायज तरीके से गर्भपात कराने के उद्देश्य से दवा दी गई। जिसके बाद उसके नवजात को लाखों रुपये मेें बेच दिया है। इस पूरे प्रकरण कें संबंध में प्रशासन को जानकारी नहीं दी गई। इस तरह के मामलों को 24 घंटे के भीतर
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बाल कल्याण समिति, पुलिस थाना, बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्प लाइन को नवजात को सौंपने का नियम है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जो अपराध किया गया है, वह जानबूझ कर किया जाना मालूम हो रहा है। किसी लावारिस बच्चे को गोद देने का निर्णय बाल कल्याण समिति करती है। इस कारण नवजात शिशु को गोद लेने वालों से लेकर 12 मार्च को न्यायपीठ में उपस्थित हो। जो नियम विरूद्ध काम किया गया है, उस संबंध में स्पष्टीकरण देने का आदेश डाक्टर को दिया है।
लावारिस को गोद देने में डाक्टर फंसे
- बाल कल्याण समिति न्यायपीठ ने नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण, नर्सिंगहोम के शौचालय में मिला था नवजात
- उठाया सवाल, नवजात को दूसरे के सुपुर्दगी में देने से पहले पीठ को क्या नहीं दी गई जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो