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UP: देश में बन रहे हैं विश्व के सबसे बड़े टेलिस्कोप के 100 मिरर, दो बिलियन डॉलर का है प्रोजेक्ट, जानें डिटेल्स

Sat, 26 Aug 2023 09:05 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 26 Aug 2023 09:05 AM IST
सार

Kanpur News: अभी तक का सबसे बड़ा टेलिस्कोप स्पेन में स्थापित है। ग्रैन टेलिस्कोपियो कैनारियास दुनिया का सबसे बड़ा आप्टिकल टेलिस्कोप है, जिसके मिरर का व्यास 10.4 मीटर है।

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100 mirrors of the world's largest telescope are being built in the country, a project worth two billion dolla
देश में बन रहे हैं टेलिस्कोप के 100 मिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

30 मीटर व्यास के विश्व के सबसे बड़े टेलिस्कोप के लिए 100 मिरर बनने का काम देश में शुरू हो गया है। इंडियन इंस्टीट़्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बंगलुरू में यह मिरर बनाए जा रहे हैं। ऐसे 500 मिरर टेलिस्कोप के लेंस में लगेंगे। इसमें से 100 भारत में बनाए जा रहे हैं।

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आईआईटी कानपुर के स्पेस प्लेनेटरी एंड एस्ट्रोनॉमिकल साइंसेज एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अमितेश ओमर इस प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक पहलुओं को लीड कर रहे हैं। प्रो. अमितेश ने बताया कि इस साल प्रोडक्शन शुरू हुआ है। एक मिरर तैयार होने की स्थिति में है।
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ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों की खोज करने, करोड़ों सौर मंडल और उनके ग्रहों का पता लगाने और विशेष रूप से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए विश्व में सबसे बड़े आप्टिकल टेलिस्कोप का निर्माण किया जा रहा है। माना जाता है कि इंसानों ने ब्रह्मांड का 10 फीसदी हिस्सा ही देखा है।

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वैज्ञानिक बना रहे हैं इस टेलिस्कोप को
न जाने कितने अनगिनत सौरमंडल, ग्रह, आकाशगंगाएं, उल्कापिंड, एलियन हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। इस रहस्य को जानने के लिए भारत, अमेरिका, जापान, चीन और कनाडा के विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिक इस टेलिस्कोप को बना रहे हैं।

प्रो. अमितेष ओमर हैं समिति के अध्यक्ष
इसके लिए अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना की गई है। इसे टीएमटी इंटरनेशनल आब्जर्वेटरी कहा जाता है। इसके लिए पांचों देशों में वैज्ञानिक सलाहकार समिति का गठन किया गया है, जो प्रोजेक्ट की बागडोर संभालेंगे। समिति के अध्यक्ष आईआईटी कानपुर के प्रो. अमितेष ओमर हैं।

1.4 मीटर व्यास का है मिरर
प्रो. ओमर ने कहा कि लेंस में लगने वाले मिरर को अलग-अलग बनाया जा रहा है। यूएसए की तकनीक पर पांचों देश मिरर बनाने का काम कर रहे हैं। एक मिरर 1.4 मीटर व्यास का है और इसका वजन 242 किलो है। मिरर के साथ टेलिस्कोप का सपोर्ट सिस्टम भी देश में ही तैयार किया जा रहा है।

दो बिलियन डॉलर का है प्रोजेक्ट
प्रो. ओमर ने कहा कि यह प्रोजेक्ट काफी महंगा दो बिलियन डॉलर का है। इसलिए केवल सक्षम देश ही इसका हिस्सा हैं। इस प्रोजेक्ट को सभी देशों में बांटा गया है। मौजूदा समय में दो बड़े टेलिस्कोप पर काम किया जा रहा है। कई यूरोपियन देश भी 25 मीटर के टेलिस्कोप पर काम कर रहे हैं।

यह है उद्देश्य
प्रो. ओमर ने कहा कि इसका उद्देश्य तारों की संरचना, ग्रहों के निर्माण का पता करना है। तारों का निर्माण कैसे हुआ? कौन कौन से तत्वों से मिलकर हुआ? ब्रह्मांड जब शुरू हुआ तो केवल हाईड्रोजन और हीलियम था, उनको मिलाकर ही तत्वों का निर्माण हुआ। उनकी निर्माण प्रक्रिया कैसे हुई? इसका पता लगाया जाएगा।

देश का सबसे बड़ा टेलीस्कोप नैनीताल में
देश का सबसे बड़ा टेलीस्कोप 4 और 3.6 मीटर व्यास का है, जो नैनीताल आर्ब्जवेटरी में स्थित है। प्रो. ओमर बताया कि उन्होंने भी इस टेलीस्कोप को स्थापित करने में योगदान दिया है। उन्होंने खगोल विज्ञान इमेजिंग के लिए जटिल उपकरणों और कैमरे का निर्माण किया है।

10.4 मीटर का है विश्व का सबसे बड़ा टेलिस्कोप
अभी तक का सबसे बड़ा टेलिस्कोप स्पेन में स्थापित है। ग्रैन टेलिस्कोपियो कैनारियास दुनिया का सबसे बड़ा आप्टिकल टेलिस्कोप है, जिसके मिरर का व्यास 10.4 मीटर है।

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