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कानपुर: नशे और जुआ-सट्टे करवाकर वसूली करती थी स्वाट टीम, प्रभारी समेत 10 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, डीआईजी ने की कार्रवाई
Thu, 10 Sep 2020 11:33 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 10 Sep 2020 11:33 PM IST
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यूपी पुलिस
कानपुर में नशे के कारोबार से लेकर जुआ-सट्टा करवाकर वसूली करने वाली भ्रष्ट स्वाट टीम को डीआईजी ने गुरुवार को भंग कर दिया। टीम के प्रभारी समेत सभी 10 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।
डीजीपी से हुई गोपनीय शिकायत के बाद डीआईजी ने कार्रवाई की है। एसपी क्राइम इन सभी पुलिसकर्मियों की जांच कर रहे हैं। कुछ दिन पहले डीजीपी को एक गोपनीय शिकायती पत्र भेजा गया था जिसमें स्वाट टीम पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
कहा गया था कि टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मी देवी यादव, विनय कुमार यादव, प्रभात कुमार यादव, गोविंद यादव, धर्मेंद्र यादव, विष्णु पाल, राहुल पांडेय, मो. शमशाद, दरोगा मो. आसिफ शहर में वसूली करते हैं।
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जुआ-सट्टा और नशे का कारोबार इन्हीं के संरक्षण में हो रहा है जिसके एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। डरा-धमका कर भी लोगों से वसूली करते हैं। ड्रग्स तस्कर सुशील बच्चा से भी संबंध हैं।
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डीजीपी से हुई गोपनीय शिकायत के बाद डीआईजी ने कार्रवाई की है। एसपी क्राइम इन सभी पुलिसकर्मियों की जांच कर रहे हैं। कुछ दिन पहले डीजीपी को एक गोपनीय शिकायती पत्र भेजा गया था जिसमें स्वाट टीम पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
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कहा गया था कि टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार यादव और अन्य पुलिसकर्मी देवी यादव, विनय कुमार यादव, प्रभात कुमार यादव, गोविंद यादव, धर्मेंद्र यादव, विष्णु पाल, राहुल पांडेय, मो. शमशाद, दरोगा मो. आसिफ शहर में वसूली करते हैं।
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जुआ-सट्टा और नशे का कारोबार इन्हीं के संरक्षण में हो रहा है जिसके एवज में मोटी रकम वसूलते हैं। डरा-धमका कर भी लोगों से वसूली करते हैं। ड्रग्स तस्कर सुशील बच्चा से भी संबंध हैं।
शिकायत पर डीजीपी ने कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने गुरुवार को पूरी स्वाट टीम भंग कर सभी को लाइन हाजिर कर दिया। डीआईजी ने बताया कि एसपी क्राइम की जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
संजीत अपहरण कांड में भी उठे थे सवाल
संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में उनकी बहन ने कहा था कि तीस लाख रुपये की फिरौती बदमाशों को दी गई है। कुछ देर बाद उन्होंने बयान बदल कहा था कि पैसे नहीं दिए थे। जब ये वीडियो वायरल हो गया था तो संजीत की बहन ने आरोप लगाया था कि पैसे न दिए जाने की बात कहने के लिए स्वाट टीम प्रभारी दिनेश कुमार यादव ने कहा था। इसलिए उन्होंने कहा।
पूछताछ करने के बहाने वसूली का खेल
अधिकतर वारदात में स्वाट टीम को लगाया जाता है। यहीं से टीम का वसूली का खेल शुरू होता था। पूछताछ के बहाने वो एक-एक केस में दर्जनों लोगों को उठाते थे। फिर उनको छोड़ने के एवज में रकम वसूलते थे। इसके अलावा शहर के कई चरस और स्मैक तस्करों को संरक्षण दे रखा था।
संजीत अपहरण कांड में भी उठे थे सवाल
संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में उनकी बहन ने कहा था कि तीस लाख रुपये की फिरौती बदमाशों को दी गई है। कुछ देर बाद उन्होंने बयान बदल कहा था कि पैसे नहीं दिए थे। जब ये वीडियो वायरल हो गया था तो संजीत की बहन ने आरोप लगाया था कि पैसे न दिए जाने की बात कहने के लिए स्वाट टीम प्रभारी दिनेश कुमार यादव ने कहा था। इसलिए उन्होंने कहा।
पूछताछ करने के बहाने वसूली का खेल
अधिकतर वारदात में स्वाट टीम को लगाया जाता है। यहीं से टीम का वसूली का खेल शुरू होता था। पूछताछ के बहाने वो एक-एक केस में दर्जनों लोगों को उठाते थे। फिर उनको छोड़ने के एवज में रकम वसूलते थे। इसके अलावा शहर के कई चरस और स्मैक तस्करों को संरक्षण दे रखा था।