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यूरिया खाद की किल्लत, भटक रहे किसान
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किसान सेवा सहकारी समिति मलिकपुर में लगा ताला।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। जिले में यूरिया खाद की किल्लत है। इससे किसान परेशान हैं। इस समय गेहूं, आलू और सरसों की फसल में यूरिया की जरूरत है। पहले पानी के साथ गेहूं में खाद न पड़ने से पौधे पीले पड़ने लगे हैं। जल्द यूरिया खाद न मिली तो पैदावार प्रभावित होगी। इससे किसानों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।
जिले में इस साल शासन की ओर से मार्च 2020 से मार्च 2021 तक 49 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मार्च से अब तक सिर्फ 27 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद जिले तक पहुंच सकी। मौजूदा समय जिले की 55 साधन सहकारी समितियों में एक से दो हजार मीट्रिक टन यूरिया बची है। कई समितियों मेें एक माह से अधिक समय से यूरिया खाद गायब है। जिले को मार्च तक 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की दरकार है। किसानों के अनुसार गेहूं में यूरिया डालने के लिए यह सही सीजन है। यह पौधों के विकसित होने का समय है। अगर पहले पानी के साथ यूरिया खाद न डाली तो पैदावार काफी गिर जाएगी। गेहूं की पैदावार मुख्य रूप से खाद पर निर्भर करती है। अगर समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिल जाए तो 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक गेहूं का उत्पादन हो जाता है। खाद की कमी के चलते यह आंकड़ा 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक सिमट सकता है। सब्जी उत्पादन के लिए भी यूरिया खाद जरूरी है। वहीं खाद न मिलने से आलू उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ेगा। निजी दुकानदार महंगे दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
वहीं मलिकपुर प्रतिनिधि के मुताबिक इलाकाई किसान महीपाल सिंह, मेघनाथ कठेरिया, जीतपाल सिंह, छेदीलाल, रामशरण, देव सिंह, वर्मा, पम्पी वर्मा, महावीर सिंह, रामस्वरूप, देवेंद्र ठाकुर और रामनरायन ने बताया कि अगर जल्द यूरिया खाद न मिली तो फसलें चौपट हो जाएंगी। समिति सचिव रामवीर सिंह ने बताया कि खाद के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। वहीं अध्यक्ष सुरेशचंद्र दुबे ने बताया कि विभाग के उच्च अफसरों के सामने खाद की समस्या को रखा है।
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जिले में इस साल शासन की ओर से मार्च 2020 से मार्च 2021 तक 49 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मार्च से अब तक सिर्फ 27 हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद जिले तक पहुंच सकी। मौजूदा समय जिले की 55 साधन सहकारी समितियों में एक से दो हजार मीट्रिक टन यूरिया बची है। कई समितियों मेें एक माह से अधिक समय से यूरिया खाद गायब है। जिले को मार्च तक 22 हजार मीट्रिक टन यूरिया की दरकार है। किसानों के अनुसार गेहूं में यूरिया डालने के लिए यह सही सीजन है। यह पौधों के विकसित होने का समय है। अगर पहले पानी के साथ यूरिया खाद न डाली तो पैदावार काफी गिर जाएगी। गेहूं की पैदावार मुख्य रूप से खाद पर निर्भर करती है। अगर समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद मिल जाए तो 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक गेहूं का उत्पादन हो जाता है। खाद की कमी के चलते यह आंकड़ा 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक सिमट सकता है। सब्जी उत्पादन के लिए भी यूरिया खाद जरूरी है। वहीं खाद न मिलने से आलू उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ेगा। निजी दुकानदार महंगे दामों पर बिक्री कर रहे हैं।
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वहीं मलिकपुर प्रतिनिधि के मुताबिक इलाकाई किसान महीपाल सिंह, मेघनाथ कठेरिया, जीतपाल सिंह, छेदीलाल, रामशरण, देव सिंह, वर्मा, पम्पी वर्मा, महावीर सिंह, रामस्वरूप, देवेंद्र ठाकुर और रामनरायन ने बताया कि अगर जल्द यूरिया खाद न मिली तो फसलें चौपट हो जाएंगी। समिति सचिव रामवीर सिंह ने बताया कि खाद के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। वहीं अध्यक्ष सुरेशचंद्र दुबे ने बताया कि विभाग के उच्च अफसरों के सामने खाद की समस्या को रखा है।
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