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सालों बाद भी क्लीन कन्नौज का सपना अधूरा

Sun, 18 Jan 2015 11:32 PM IST
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज Updated Sun, 18 Jan 2015 11:32 PM IST
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Years later, dream of Clean Kannauj incomplete
जिले को चमकाने में लगी प्रदेश सरकार जहां करोड़ों रुपये तमाम योजनाओं में फूंक रही हैं। वहीं साफ-सफाई और कचरे के निस्तारण पर जरा की ध्यान नहीं दिया है। जिले भर में जगह-जगह जमा कूड़े के ढ़ेर यहां दुर्दशा की कहानी बयां कर रहे हैं। वहीं करोड़ों की लागत से जिले में बने एक मात्र सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का नागरिकों को लाभ नहीं मिल रहा है। सितंबर 2011 में संचालित प्लांट में अभी तक पूरी मशीनें नहीं लग पाई हैं। जिससे यह पूरी क्षमता से कचरे का निस्तारण नहीं कर पा रहा है। प्लांट में कई टन पॉलीथीन डंप है।
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शहर के मोहल्ला अलाउद्दीनपुर निवासी सिन्टू कुशवाहा का कहना है कि गलियों की सफाई में लापरवाही बरती जाती है। बजरिया गली में तो ट्रैक्टर न पहुंचने का हवाला देकर कई-कई दिनों तक सफाईकर्मी कूड़ा उठाने नहीं आते हैं। इससे मोहल्लेवासियों को काफी परेशानी होती है।
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भटपुरी मोहल्ले के आलम खां का कहना है कि चौराहे पर कूड़े का ढ़ेर लगा रहता है। कूड़ेदान के अभाव में लोगों को खुले में कचरा डालना पड़ता है। कूड़े के ढ़ेर पर आवारा पशु घूमा करते हैं। इससे यहां पर संक्रामक बीमारियों के फैलने का अंदेशा बना है।
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भटपुरी मोहल्ले के मास्टर महबूब का कहना है कि कूड़ेदान गायब हो चुके हैं। गलियों में खुले में लोगों को कूड़ा फेंकना पड़ता है। इससे दुपहिया वाहन चालक फिसलकर चुटहिल हो जाते हैं। सफाई के अभाव में व कूड़ा नालियों में चला जाने से आए दिन गलियों में जलभराव हो जाता है।

रोजाना 25 टन कूड़ा निस्तारण की क्षमता
शहर के कचरे का सुरक्षित निपटान के लिए शासन ने मोहल्ला अजयपाल में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की स्थापना कराई। इस संयत्र में 25 टन रोजाना कूड़े का निस्तारण की क्षमता है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह कूड़े के ढ़ेर लगे रहते हैं। यही नहीं हल्की बारिश होने पर तो गलियों में सिल्ट फैल जाती है। इससे पैदल गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। सूत्रों की मानें तो शहर से रोजाना 12-14 टन कचरा निकलता है। इसे ट्रैक्टरों द्वारा संयंत्र में भेजा जाता है।

सफाई प्रभारी भी हैं जिम्मेदार
हम्मालीपुरा से युसुफपुर भगवान जाने वाले रास्ते पर कई टन कूड़ा डंप है। आए दिन ट्रैक्टर चालक व हाथ ठिलिया के जरिए सफाईकर्मी जमा कर जाते हैं। इसे उठाने के लिए पालिका प्रशासन रुचि नहीं ले रहा है। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट होने के बाद भी कूड़े को खुले स्थान डंप किए जाने से लोगों में रोष है।

कूड़े से उठने वाली दुर्गन्ध से मोहल्ले वासियों को काफी परेशानी होती है। वार्ड सभासद हाजी कमरूद्दीन का कहना है कि खुले में पड़ रहे कूड़े के बारे में पालिका प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है।

प्लांट में लगे कूड़े के ऊंचे ढ़ेर
अजयपाल मोहल्ले में स्थापित कूड़ा निस्तारण संयंत्र में काम धीमी गति से चल रहा है। रविवार को मशीनें बंद रहती हैं। जबकि शहर में कूड़ा रोजाना उठाने का निर्देश है। इसके चलते ट्रैक्टर चालक इधर-उधर कूड़ा डंप करने का प्रयास करते हैं। वहीं परिसर में जगह की कमी भी बताई जाती है। कूड़ा सुखाने के बाद ही मशीनों में इस्तेमाल किया जाता है। परिसर में ऊंचे ढ़ेर लग जाने से इसे सुखाने में भी कर्मचारियों को दिक्कतें होती हैं।

तीन साल से खाद को नहीं मिला नाम
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में कूड़े के डिस्पोजल के बाद बनाने वाली खाद का तीन साल बाद भी कोई नाम नहीं मिला है। इससे बिक्री को बढ़ावा देने के लिए भी कोई पहल कारगर नहीं हुई है। खुली खाद खरीदने से किसान संकोच करते हैं। खाद में कृषि योग्य पोषक तत्वों की मात्रा को लेकर भी किसानों में संशय रहता है। खाद को पैंकिंग कर बाजार में बेचने की योजना पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है।

हाइड्रोलिक ट्रालियां हो रही बदहाल
कूड़े को शहर की विभिन्न गलियों से उठाकर संयंत्र तक सुरक्षित लाने के लिए शासन द्वारा हाइड्रोलिक ट्रालियां भेजी गयी थीं। ढुलाई के दौरान गलियों में गिरने वाले कूड़े-कचरे से भी नागरिकों को निजात दिलाने का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। इनके जरिए कूड़े को बंद कर संयंत्र तक लाने की योजना थी। लेकिन विभागीय अफसरों की उपेक्षा के चलते संयंत्र में खड़ी हाइड्रोलिक ट्रालियां बदहाल हो रही हैं।

पॉलीथीन निस्तारण का कोई उपाय नहीं
दैनिक जीवन में दिनोंदिन बढ़ते प्लास्टिक के चलन ने प्रदूषण की समस्या को भी काफी बढ़ाया है। स्वत: नष्ट होने में कई दशक लेने वाली पालीथीन के निस्तारण का मंत्र सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के अफसरों के पास भी नहीं है। कूड़े से पालीथीन को बीनकर शेष अवशेष से जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। जबकि पालीथीन के डिस्पोजल को कोई मशीन नहीं है। इससे परिसर में पालीथीन के ढ़ेरों का अंबार है। इससे कूड़ा सुखाने में जगह की कमी से भी कर्मचारियों को जूझना पड़ता है।

कूड़ा निस्तारण का काम पूरी क्षमता से किया जा रहा है। विगत दिनों मौसम की खराबी से कूड़ा सुखाने में दिक्कतें आ रही थीं। पालीथीन के डिस्पोजन के लिए मशीनों को मंगाया जा रहा है। तैयार खाद की बिक्री के लिए किसानों को जागरूक किया जाएगा। एक पखवारे में व्यवस्थाओं को बेहतर कर लिया जाएगा।

मनीष शुक्ला, प्रभारी, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, कन्नौज।

सफाई व्यवस्था के प्रति नागरिक भी उदासीनता बरत रहे हैं। कूड़ेदान को अपने घर के पास या गली में रखने नहीं देते हैं। ट्रैक्टर के चले जाने के बाद सड़क या गलियों में खुले में कूड़ा फेंकते हैं। कूड़े के ढ़ेर लगे होने या सफाई कर्मचारियों द्वारा अवैध तरीके से सड़क किनारे कूड़ा डंप करने की शिकायत करें। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बीडी भट्ट, अधिशाषी अधिकारी,  नगरपालिका
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