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Kannauj News: घर पर प्रसव के बाद महिला की मौत, बच्ची सुरक्षित
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छिबरामऊ। घर पर प्रसव के दौरान शुक्रवार को एक महिला की हालत अचानक बिगड़ गई। सूचना पर पहुंची एंबुलेंस से परिजन सौ शैया अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। वहीं प्रसव के बाद प्रसूता की मौत ने एक बार फिर सुरक्षित संस्थागत प्रसव और समय पर चिकित्सकीय सुविधा की बदइंतजामी को उजागर कर दिया।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खल्लारूप मंगदपुर निवासी प्रदीप दिवाकर की पत्नी सुरभि का सुबह आठ बजे घर पर ही प्रसव हुआ। उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर परिजन सौ शैया अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद सुरभि को मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार सुरभि की शादी 10 वर्ष पहले हुई थी। पति ईंट भट्टे पर मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है।
सुरभि के दो बेटे अंश और वंश, एक बेटी आंशी तथा प्रसव के दौरान जन्मी नवजात बच्ची है। मां की मौत से बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया और पूरे परिवार में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। चिकित्सक डॉ. स्मृति प्रताप सिंह ने बताया कि महिला की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो चुकी थी।
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प्रसूता की मौत ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल
गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव व स्वास्थ्य को लेकर विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग कर्मियों को रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी उन्हें पोषाहार दिया जाता है। शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव पर सरकार का जोर होने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ऐेसे में असुरक्षित प्रसव के चलते महिलाओं की जान चली जाती है।
वर्जन
छिबरामऊ में महिला विंग में संस्थागत प्रसव की सुविधा शुरू हो गई है। इसके बाद भी लोग घर पर प्रसव करा रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं।
-डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ
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कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खल्लारूप मंगदपुर निवासी प्रदीप दिवाकर की पत्नी सुरभि का सुबह आठ बजे घर पर ही प्रसव हुआ। उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर परिजन सौ शैया अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद सुरभि को मृत घोषित कर दिया। परिजनों के अनुसार सुरभि की शादी 10 वर्ष पहले हुई थी। पति ईंट भट्टे पर मजदूरी करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है।
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सुरभि के दो बेटे अंश और वंश, एक बेटी आंशी तथा प्रसव के दौरान जन्मी नवजात बच्ची है। मां की मौत से बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया और पूरे परिवार में मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। चिकित्सक डॉ. स्मृति प्रताप सिंह ने बताया कि महिला की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो चुकी थी।
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प्रसूता की मौत ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल
गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव व स्वास्थ्य को लेकर विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग कर्मियों को रखा गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी उन्हें पोषाहार दिया जाता है। शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव पर सरकार का जोर होने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ऐेसे में असुरक्षित प्रसव के चलते महिलाओं की जान चली जाती है।
वर्जन
छिबरामऊ में महिला विंग में संस्थागत प्रसव की सुविधा शुरू हो गई है। इसके बाद भी लोग घर पर प्रसव करा रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं।
-डॉ. विकास चंद्रा, सीएमओ